इतिहास का वो अद्भुत स्वाद: कैसे चाट, गोल गप्पे बने भारत की सबसे लोकतांत्रिक डिश

खबर शेयर कीजिए

Article Desk, tajnews.in | Wednesday, June 24, 2026, 04:14:27 PM IST

Taj News Logo
Taj News
Article Desk
Brij Khandelwal
बृज खंडेलवाल
वरिष्ठ पत्रकार
एवं पर्यावरणविद्
आगरा के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ पत्रकार और प्रतिष्ठित पर्यावरणविद् बृज खंडेलवाल ने वर्ष 1972 में ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC, नई दिल्ली) से पत्रकारिता की शुरुआत की। वे ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘इंडिया टुडे’, ‘इंडिया एब्रॉड’, और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी ‘IANS’ सहित देश-विदेश के कई शीर्ष मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। ‘ब्रज मंडल हेरिटेज कंवर्जेशन सोसाइटी’ के संस्थापक खंडेलवाल ने यमुना और ताजमहल संरक्षण पर दो ऐतिहासिक पुस्तकें लिखी हैं तथा बीबीसी (BBC), सीएनएन (CNN) और नेशनल ज्योग्राफिक के अंतरराष्ट्रीय वृत्तचित्रों में ब्रज की पर्यावरणीय आवाज़ को मुखर किया है। वे डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा और केंद्रीय हिंदी संस्थान में पत्रकारिता के अध्यापन से भी जुड़े रहे हैं।
HIGHLIGHTS
  1. ऐतिहासिक मर्म और मिथक: शाहजहाँ की बेटी जहाँआरा बेगम द्वारा निर्मित चाँदनी चौक की नहर में शाही मेहमानों द्वारा नाव की सैर करते हुए चाट खाने के मिथकों तथा हकीमों के विधिक-आयुर्वेदिक नुस्खों की ऐतिहासिक विवेचना।
  2. प्राचीन मगध से पुर्तगाली प्रभाव: दो हज़ार वर्ष प्राचीन मगध साम्राज्य और महाभारत कालीन द्रौपदी की कथाओं से लेकर सोलहवीं सदी में पुर्तगालियों द्वारा भारत लाए गए आलू के सांस्कृतिक व कृषि वैज्ञानिक आगमन की पड़ताल।
  3. सांस्कृतिक समावेश की बानगी: दिल्ली के शाह जहां रोड की लजीज चाट, आगरा की करारी आलू टिक्की और मथुरा की भक्तिभाव से सराबोर शाकाहारी जैन व हिन्दू खाद्य परंपराओं के विकास का दस्तावेजीकरण।
  4. लोकतांत्रिक स्ट्रीट फूड: विभाजन के पश्चात आए शरणार्थियों, रेलवे के विस्तार और मुंबई की भेलपूरी से लेकर कोलकाता के तीखे पुचके तक, अमीरी-गरीबी की विजातीय खाइयों को पाटने वाले बेजोड़ स्वाद का तटस्थ रेखांकन।

इतिहास का वो अद्भुत स्वाद: कैसे चाट, गोल गप्पे बने भारत की सबसे लोकतांत्रिक डिश

आगरा से कोलकाता और दिल्ली से मुंबई तक—सड़क किनारे सजे ठेलों का बेताज बादशाह

— बृज खंडेलवाल

आगरा से लेकर कोलकाता, चेन्नई से लेकर मुंबई, अहमदाबाद, भारत का सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड बन चुका है गोल गप्पा, पानी पूरी, पानी की टिकिया! क्या आपने कभी सोचा है कि पहला गोलगप्पा किसने खाया होगा? किसी बादशाह ने, किसी रानी ने, या किसी भूखे राहगीर ने? दिल्ली की चाँदनी चौक से लेकर आगरा, मथुरा, लखनऊ, बनारस और कोलकाता तक, चाट सिर्फ़ एक नाश्ता नहीं, बल्कि हमारी तहज़ीब का ज़िंदा हिस्सा है। यह अमीर-गरीब, छोटे-बड़े, बच्चे-बूढ़े, सबकी पसंद है। सड़क किनारे ठेले पर मिलने वाली यह मामूली-सी दिखने वाली चीज़ सदियों का इतिहास अपने भीतर समेटे हुए है।

आगरा के हॉस्पिटल रोड पर शाम ढलते ही वही पुरानी खुशबू हवा में घुल जाती है। गरम तेल की महक, हरे धनिये की ताज़गी और इमली की खटास। ठेले पर खड़े बुलाकी चाट वाले अपनी उँगली से फुर्ती से गोलगप्पे में छेद करते हैं, मसालेदार पानी भरते हैं और ग्राहक के हाथ में पकड़ा देते हैं। “अभी खाइए,” वे मुस्कराकर कहते हैं। “गोलगप्पा किसी का इंतज़ार नहीं करता।” शायद यही बात चाट पर भी लागू होती है। इसे हमेशा ताज़ा ही खाना पड़ता है, और इसकी कहानी भी हर पीढ़ी के साथ नई हो जाती है।

शाही मुगलिया फसाने और चाँदनी चौक की ऐतिहासिक नहर

सबसे मशहूर किस्सा यह है कि मुगल बादशाह चाँदनी चौक की नहर में नाव की सैर करते हुए चाट खाते थे। कहा जाता है कि रात में चाँद की रोशनी पानी पर पड़ती थी, संगीत बजता था और शाही मेहमान चटपटी चाट का लुत्फ़ उठाते थे। सुनने में यह कहानी बेहद ख़ूबसूरत लगती है। लेकिन इतिहास इसकी पूरी तस्दीक़ नहीं करता। इतिहासकार मानते हैं कि चाँदनी चौक की नहर सचमुच थी। इसे शाहजहाँ की बेटी जहाँआरा बेगम ने बनवाया था। उसी नहर की वजह से इस बाज़ार का नाम चाँदनी चौक पड़ा। लेकिन कहीं भी ऐसा कोई भरोसेमंद दस्तावेज़ नहीं मिलता जिसमें लिखा हो कि बादशाह नाव में बैठकर चाट खाते थे। यह शायद उन कहानियों में से एक है जो हर बार सुनाए जाने पर थोड़ी और रंगीन होती चली गईं।

ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, एक और कहानी कुछ ज़्यादा भरोसेमंद लगती है। कहा जाता है कि शाहजहाँ के हकीमों ने दिल्ली के खारे पानी से होने वाली बदहज़मी दूर करने के लिए दही, इमली और मसालों वाली चाट खाने की सलाह दी थी। इसका भी कोई पक्का सबूत नहीं है, लेकिन यह बात पूरी तरह नामुमकिन भी नहीं लगती। असलियत यह है कि चाट मुगलों से भी कहीं ज़्यादा पुरानी है। गोलगप्पे की कहानी तो दो हज़ार साल पहले के मगध साम्राज्य तक पहुँच जाती है। एक और मशहूर दास्तान महाभारत से जुड़ी है। कहा जाता है कि द्रौपदी ने बचे हुए आटे और सब्ज़ियों से पांडवों के लिए पहला गोलगप्पा बनाया था। इन दोनों बातों का कोई ठोस प्रमाण नहीं है, लेकिन इतना तय है कि यह व्यंजन सदियों से आम लोगों का साथी रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, हाँ, उस समय आलू नहीं था। आलू तो सोलहवीं सदी में पुर्तगाली भारत लाए थे। इसलिए शुरुआती गोलगप्पों में दाल, अनाज या मसालेदार साग भरा जाता होगा। फूडी दर्शन भाई बताते हैं, “मुगलों ने चाट बनाई नहीं, लेकिन उसे नया मुक़ाम ज़रूर दिया। उनके दौर में दिल्ली, आगरा और मथुरा के बाज़ार तेज़ी से आबाद हुए। हिन्दू और जैन समाज की शाकाहारी परंपराओं ने आलू, दही, दाल और मसालों से बनने वाले सस्ते और स्वादिष्ट नाश्तों को खूब बढ़ावा दिया। यही बाज़ार आगे चलकर चाट की असली पहचान बने।”

यह भी पढ़ें

विभाजन, रेलवे का विस्तार और स्वाद का लोकतंत्रीकरण

दिल्ली की पापड़ी चाट, आगरा की करारी आलू टिक्की और मथुरा की भक्तिभाव से जुड़ी चाट आज भी उसी विरासत की याद दिलाती हैं। दिल्ली में शाह जहां रोड पर दही भल्ले की चाट खाने नेताओं की भीड़ लगी रहती थी, लोग बताते हैं मेनका गांधी भी इनकी चाट की शौकीन थीं। फिर रेल आई। लोग एक शहर से दूसरे शहर पहुँचे। बँटवारे के बाद लाखों शरणार्थी दिल्ली आए और अपने साथ चाट के नए स्वाद भी ले आए। मुंबई ने भेलपूरी बनाई, कोलकाता ने पुछका को और तीखा कर दिया, जबकि हर शहर ने अपनी ज़ुबान में चाट का नया अध्याय लिख दिया।

ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, आज चाट करोड़ों रुपये का कारोबार है। शादियों की दावतों में सबसे ज्यादा भीड़ चाट स्टॉल पर रहती है। बड़े बड़े इमरतबानों में तरह तरह के मसालेदार पानी रहते हैं। पाँच सितारा होटलों के मेन्यू में भी है और सोशल मीडिया की तस्वीरों में भी। बादशाहों के किस्से सच हों या अफ़साने, इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता। सच यह है कि चाट ने हर सल्तनत को पीछे छोड़ दिया। आज भी भारत की गलियों में वही सबसे बड़ा बादशाह है, जिसके सामने हर कोई बराबर खड़ा होता है; जेब चाहे भरी हो या खाली। यही स्वाद की वह वास्तविक संप्रभुता और सामाजिक समरसता है, जिसने गोलगप्पे को पूरे उपमहाद्वीप की सबसे अनूठी और मुकम्मल लोकतांत्रिक डिश बना दिया है।

(लेखक आगरा के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ पत्रकार, चिंतक एवं ब्रज मंडल हेरिटेज कंजर्वेशन सोसाइटी के संस्थापक हैं

Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News

खबर शेयर कीजिए

Leave a Comment

Verified by MonsterInsights