Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 13 July, 2026, 04:30:15 PM IST.

tajnews.in | आगरा: ताजनगरी में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की संयुक्त टीमों ने तीन चरणों में कड़ा और बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाकर नकली जीवनरक्षक दवाओं के एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। यह शातिर दवा माफिया गिरोह देश की नामी और विख्यात फार्मा कंपनियों की बाजार में सर्वाधिक बिकने वाली ब्रांडेड दवाओं की हूबहू नकली कॉपियां तैयार कर देश के छह प्रमुख राज्यों में बड़े पैमाने पर तस्करी कर रहा था। इस राष्ट्रव्यापी सिंडिकेट की रीढ़ तोड़ने के लिए औषधि विभाग ने विधिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए तीसरे चरण में 13 संदिग्ध मेडिकल फर्मों के 14 मुख्य संचालकों व स्वामियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया है। इस ताबड़तोड़ प्रशासनिक कार्रवाई से समूचे दवा बाजार और माफियाओं के नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।
औषधि विभाग की उच्च स्तरीय और विधिक जांच रिपोर्ट खंगालने पर पता चला कि इस सिंडिकेट के तार उत्तराखंड के रुड़की क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, जहां माफियाओं ने नकली दवाओं के निर्माण और उनकी हूबहू पैकेजिंग के लिए एक अवैध फैक्टरी स्थापित कर रखी थी। जांच दल ने रुड़की स्थित मुख्य ठिकानों पर कड़ा छापा मारकर नामी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नकली पैकेजिंग सामग्री, प्रिंटेड फॉयल और लाखों नकली रैपर बरामद किए हैं। यह सिंडिकेट उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे बड़े राज्यों के बाजारों में इन नकली दवाओं को अवैध रूप से खपा रहा था। जब इन राज्यों के स्थानीय औषधि निरीक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में नकली दवाओं की विधिक सैंपलिंग की, तब कड़ियों को जोड़ने पर यह मुख्य तथ्य प्रकाश में आया कि इन समस्त नकली खेपों की अवैध खरीद और मुख्य सप्लाई चेन का केंद्र ताजनगरी आगरा ही था।
इस इनपुट के आधार पर औषधि विभाग की टीमों ने गत 22 फरवरी को आगरा के मंटोला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक मकान पर आकस्मिक दबिश देकर दमा (अस्थमा) रोग की नामी ब्रांडेड दवा के लगभग 8 हजार से अधिक प्रिंटेड रैपर जब्त किए थे, जिसके बाद मुख्य आरोपी जुबैर मौके से फरार होने में सफल रहा था। इसके बाद लखनऊ मुख्यालय से गठित विशेष जांच दल ने तीन अलग-अलग चरणों में आक्रामक छापे मारकर महानगर की करीब 120 विधिक मेडिकल फर्मों की सघन जांच की। इस कड़े प्रहार के तहत वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध सौदों में संलिप्त पाए गए 58 थोक दवा विक्रेताओं के विधिक लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए। टीमों ने बाजार से 128 दवाओं के कड़े नमूने (सैंपल) एकत्रित कर राजकीय प्रयोगशाला भेजे हैं तथा अब तक 3.72 करोड़ रुपये मूल्य की नकली, फिजिशियन सैंपल, सरकारी आपूर्ति की प्रतिबंधित और एक्सपायर्ड दवाएं जब्त की हैं। वर्तमान में भी माफियाओं के चार बड़े गोदाम विधिक रूप से सील हैं, जिनमें करोड़ों रुपये की दवाएं भरी पड़ी हैं।
इस महाकार्रवाई के विषय में विस्तृत विधिक जानकारी देते हुए एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि खुफिया विभाग से आगरा के रास्ते सरकारी, एक्सपायर्ड और नकली दवाओं के अंतरराज्यीय परिवहन की सटीक सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद लखनऊ से विशेष रणनीति तैयार कर एफएसडीए और एसटीएफ के 50 तेजतर्रार अधिकारियों की एक कडी संयुक्त टास्क फोर्स का गठन किया गया था। इस विशेष टीम ने लगातार 5 से 6 महीनों तक धरातल पर रेकी की, संदिग्धों के फोटो, उनके नाम, उनकी फर्मों के विधिक विवरण और नकली दवाओं की पूरी गोपनीय सूची तैयार कर साक्ष्य जुटाए। दवा माफिया इतने शातिर थे कि वे देश-विदेश की लगभग 30 से 35 नामी कंपनियों की 150 से अधिक ऐसी दवाओं की नकली कॉपियां बनवा रहे थे, जिनकी कुल बाजार खपत में 40 से 50 फीसदी की बड़ी हिस्सेदारी है। इन दवाओं में एंटीबायोटिक, मधुमेह (शुगर), हृदय रोग, त्वचा रोग, पेट के विकार, थायराइड, हार्मोन्स, हाइपरटेंशन और कॉस्मेटिक से जुड़ी औषधियां शामिल थीं, जिनकी हूबहू पैकिंग आधुनिक एआई तकनीक के जरिए तैयार कर बाजार में दुकानदारों को मोटे कमीशन के लालच पर बेची जा रही थीं। एफएसडीए आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि इस अवैध सिंडिकेट की जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ने तक यह कड़ा चरणबद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा।
यह भी पढ़ें

Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
7579990777




