National Desk, 🌐 [tajnews.in] | Saturday, 18 July, 2026, 07:43:00 PM IST.

tajnews.in | नई दिल्ली: देश की संसद के भीतर मॉनसून सत्र के आगाज से ठीक पहले एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक राजनैतिक भूचाल आ गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को एक ऐतिहासिक विधिक फैसला लेते हुए उद्धव ठाकरे खेमे की शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना में आधिकारिक विलय को विधिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके साथ ही, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी संसद में करारा झटका लगा है। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत कर अलग हुए 20 लोकसभा सांसदों को भी अध्यक्ष ने सदन के भीतर ‘नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) के रूप में एक नई राजनैतिक पहचान देते हुए अलग सीटिंग अरेंजमेंट (बैठने की व्यवस्था) आवंटित कर दी है। इस फैसले के बाद संसद के भीतर विपक्षी इंडी (I.N.D.I.A.) गठबंधन का संख्या बल बुरी तरह बिखर गया है।
मॉनसून सत्र से पहले बदला संसद का गणित, रिजिजू ने बागी गुट को माना असली हिस्सेदार
लोकसभा सचिवालय के आधिकारिक विधिक विन्यास से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मॉनसून सत्र की शुरुआत से महज 48 घंटे पूर्व लिए गए इस बड़े निर्णय ने देश की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल दी है। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नई राजनैतिक पहचान को हरी झंडी दिए जाने के तुरंत बाद, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरिन रिजिजू ने बेहद मुस्तैदी दिखाते हुए टीएमसी से अलग होकर बनी नवगठित नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के नवनिर्वाचित संसदीय दल के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय को एक आधिकारिक पत्र प्रेषित किया। इस पत्र के माध्यम से सरकार ने रविवार (19 जुलाई) को आहूत होने वाली सर्वदलीय फ्लोर लीडर्स (Floor Leaders) की महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने के लिए उन्हें विधिक रूप से आमंत्रित किया है। इस बैठक में मॉनसून सत्र के दौरान आने वाले महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और सरकारी विधेयकों पर चर्चा होनी है। इसके अतिरिक्त, रिजिजू ने एनसीपीआई की मुख्य सचेतक (Chief Whip) डॉ. काकोली घोष दस्तिदार को भी इस बैठक में सम्मिलित होने का विधिक अनुरोध भेजा है, जो स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार ने इस धड़े को पूर्ण राजनैतिक मान्यता दे दी है।
दूसरी ओर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना के मुख्य विन्यास प्रमुख एकनाथ शिंदे ने इस विधिक विलय पर अपार हर्ष व्यक्त करते हुए नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। शिंदे ने उद्धव ठाकरे खेमे और समूचे विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें सांसदों की इस टूट को निजी स्वार्थ और धनबल का प्रयोग बताया जा रहा था। शिंदे ने कड़े शब्दों में कहा कि जो 6 सांसद शिवसेना (UBT) छोड़कर उनके साथ आए हैं, वे किसी भी प्रकार के निजी रसूख, दबाव या लालच में नहीं, बल्कि डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों और संगठन के प्रति अटूट विश्वास के कारण विधिक रूप से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व वाली शिवसेना की नीति किसी भी राजनैतिक दल को द्वेषपूर्वक तोड़ने की नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए लोगों को जोड़ने और जनहितैषी विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की है।
अमित शाह से मिले नए सांसद, विकास निधि के आवंटन का विधिक आश्वासन
विपक्षी दलों पर तीखा तंज कसते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि केवल पैसों की घटिया राजनीति की सोच रखने वाले लोग ही इस प्रकार के मनगढ़ंत आरोप लगा सकते हैं। सच यह है कि इन सभी 6 सांसदों के क्षेत्रों का विकास पिछले लंबे समय से ठप पड़ा था, जिससे आम जनता त्रस्त थी। शिंदे ने खुलासा किया कि इन सभी नवनिर्वाचित और विलीन हुए सांसदों के संसदीय क्षेत्रों के लिए सरकार द्वारा एक विशेष केंद्रीय विकास निधि का विन्यास तैयार कर लिया गया है, ताकि जनहित के कार्य बिना किसी रुकावट के पूरे किए जा सकें।
राजनैतिक विन्यास को और अधिक मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने इन सभी सांसदों की एक उच्चस्तरीय विधिक मुलाकात देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी करवाई है। गृह मंत्री के साथ हुई इस विशेष बैठक में इन सभी लोकसभा क्षेत्रों से जुड़े वर्षों से लंबित पड़े बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर विधिक स्वीकृति प्रदान करने की सहमति बनी है। शिंदे ने आश्वस्त किया कि नए विन्यास में शामिल हुए प्रत्येक सांसद को संगठन और सरकार के स्तर पर हर संभव विधिक सहयोग और पूर्ण सम्मान प्रदान किया जाएगा, जिससे वे बिना किसी राजनैतिक भेदभाव के अपने मतदाताओं की सेवा कर सकें।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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