Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Friday, 10 July, 2026, 03:10:15 PM IST.

tajnews.in | आगरा: विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती की पावन दरगाह के सज्जादानशीन पीरज़ादा रईस मियां चिश्ती के दुखद अवसान पर समूची ताजनगरी शोक में डूबी हुई है। इसी क्रम में साझा संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पित प्रमुख संस्था ‘ऑल इंडिया हिंदुस्तानी बिरादरी’ द्वारा गुरुवार को एक विशेष शोकसभा का आयोजन किया गया। शोकसभा में उपस्थित प्रबुद्ध प्रवासियों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सूफी परंपरा के इस देदीप्यमान स्तंभ को अत्यंत भावभीनी और अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित समस्त गणमान्य लोगों ने दिवंगत आत्मा की आत्मिक शांति और मग़फ़िरत के लिए दो मिनट का मौन धारण कर रूहानी दुआ मांगी तथा शोक संतप्त चिश्ती परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।
शोकसभा को संबोधित करते हुए बिरादरी के चेयरमैन एवं भारत सरकार के प्रतिष्ठित ‘कबीर सम्मान’ से अलंकृत हाजी डॉ. सिराज कुरैशी ने भावुक होते हुए कहा कि पीरज़ादा रईस मियां चिश्ती महज़ एक धार्मिक गद्दी के अधिकारी नहीं थे, बल्कि वे सादगी, इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द की जीती-जागती मिसाल थे। अपने पुराने संस्मरणों को साझा करते हुए डॉ. कुरैशी ने बताया कि जब उन्हें फतेहपुर सीकरी वक्फ कमेटी के अध्यक्ष पद का दायित्व निभाने का अवसर मिला था, तब अपने दो वर्ष के ऐतिहासिक कार्यकाल के दौरान रईस मियां कमेटी के अत्यंत सक्रिय और मार्गदर्शक सदस्य रहे थे। उस पूरी अवधि में उन्होंने वक्फ की बेशकीमती संपत्तियों की सुरक्षा, दरगाह की मर्यादा और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने में प्रशासनिक स्तर पर अपना संपूर्ण और कड़ा सहयोग दिया था। उनका सरल स्वभाव, अद्भुत दूरदर्शिता और समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोकर साथ लेकर चलने की अनूठी सोच सदैव भावी पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
इसी क्रम में ऑल इंडिया हिंदुस्तानी बिरादरी के उपाध्यक्ष एवं आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर के सचिव विशाल शर्मा ने सूफी संत के वैश्विक अवदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पीरज़ादा रईस मियां चिश्ती ने फतेहपुर सीकरी की ऐतिहासिक और रूहानी सूफी विरासत को न केवल भारत के कोने-कोने में, बल्कि वैश्विक पटल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने में अपना अमूल्य जीवन समर्पित कर दिया। उनके पावन व्यक्तित्व में आध्यात्मिकता की गहराई, अद्वितीय विनम्रता और सामाजिक समरसता का एक बहुत ही विलग और अद्भुत संगम देखने को मिलता था। उनका संपूर्ण जीवन काल विभिन्न धर्मों, पंथों और समुदायों के बीच पारस्परिक प्रेम, अटूट भाईचारे और आपसी सम्मान की जड़ों को सींचने का काम करता रहा। उनका असमय जाना केवल आगरा या उत्तर प्रदेश की ही नहीं, अपितु पूरे राष्ट्र की साझी सांस्कृतिक विरासत के लिए एक ऐसा शून्य पैदा कर गया है, जिसकी निकट भविष्य में भरपाई कर पाना अत्यंत दुष्कर कार्य है।
सभा में उपस्थित अन्य प्रबुद्ध वक्ताओं ने भी सूफी संत के सामाजिक अवदानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पीरज़ादा रईस मियां चिश्ती ने अपने 81 वर्षों के लंबे सज्जादानशीन के कार्यकाल में मानव सेवा और कौमी एकता को हमेशा सर्वोपरि रखा। इस गरिमामयी शोकसभा के आयोजन में मुख्य रूप से बिरादरी के महासचिव विजय उपाध्याय, ज़ियाउद्दीन, समी आगाई, इरफान सलीम, दीप शर्मा, राजकुमार नागरथ, समीर कुरैशी, मुकेश कर्दम, ग्यास कुरैशी और समीउद्दीन सहित महानगर के अनेक गणमान्य नागरिक, इतिहासकार और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में दिवंगत आत्मा की रूह की शांति के लिए प्रार्थना की और कहा कि उनके द्वारा दिखाए गए शांति और इंसानियत के मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
यह भी पढ़ें

Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
7579990777




