आजमगढ़ में सपा सांसद दरोगा प्रसाद पर गरीबों की जमीन और तालाब कब्जाने का आरोप, ग्रामीणों ने दी आत्मदाह की चेतावनी

खबर शेयर कीजिए

Varanasi Desk, 🌐 tajnews.in | Saturday, 18 July, 2026, 12:03:00 PM IST.

Taj News Logo
Taj News
Varanasi Desk

tajnews.in | आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से भू-माफियाई और राजनीतिक रसूख के दुरुपयोग का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ लालगंज तहसील के अंतर्गत आने वाले मोहनपुर पटवास गांव के पीड़ित ग्रामीणों ने समाजवादी पार्टी (सपा) के मौजूदा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज और उनके परिजनों पर सार्वजनिक संपत्ति और निर्धन ग्रामीणों की पैतृक भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने का संगीन आरोप लगाया है। न्याय की आस में लामबंद होकर ग्रामीणों ने मंडलायुक्त (कमिश्नर) कार्यालय पहुंचकर एक विधिक शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें पूरे प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। इस दौरान एक पीड़ित महिला ने न्याय न मिलने की स्थिति में मुख्यमंत्री आवास के समक्ष आत्मदाह करने की विधिक चेतावनी देकर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

HIGHLIGHTS
  1. सांसद पर संगीन आरोप: आजमगढ़ के लालगंज में सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज और उनके बेटों पर सरकारी तालाब व गरीबों की जमीन हड़पने का आरोप।
  2. आत्मदाह की चेतावनी: पीड़ित महिला गीता सरोज ने प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्महत्या करने का विधिक एलान किया।
  3. तालाब पर फार्म हाउस: ग्रामीणों का दावा है कि आराजी संख्या 137 के लगभग 50 बीघे के सार्वजनिक तालाब को पाटकर अवैध रूप से फार्म हाउस का विन्यास खड़ा किया गया।
  4. सांसद का खंडन: सांसद ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए डीएम और कमिश्नर को मौके पर आकर खुली जांच करने की चुनौती दी है।

सार्वजनिक पोखरे को पाटकर बनाया विशाल फार्म हाउस, दबंगई के आरोप

कमिश्नर को सौंपे गए विधिक शिकायती पत्र और ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोहनपुर पटवास गांव की सरकारी आराजी संख्या 137 (कुल क्षेत्रफल 7.798 हेक्टेयर) राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक तालाब के खाते में दर्ज है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस जमीन पर सांसद और उनके करीबियों ने बलपूर्वक एक आलीशान फार्म हाउस का निर्माण करा लिया है, जिसके भीतर अवैध रूप से बड़े पैमाने पर कमर्शियल मछली पालन और बिना अनुमति के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। पहले जिस तालाब का उपयोग पूरा गांव अपने पशुओं को पानी पिलाने और सार्वजनिक सामाजिक हितों के लिए करता था, उसे अब चारों तरफ से कटीले और कड़े बिजली के तारों से घेर दिया गया है, जिसके भीतर 5 से 6 हैवी बोरिंग भी कराई गई हैं।

मुख्य शिकायतकर्ता गीता सरोज ने अत्यंत भावुक होकर बताया कि सांसद के रसूख के चलते उनकी अपनी एक बीघा पुश्तैनी जमीन पर भी जबरन कब्जा कर वहां मौजूद निजी पोखरे को पाट दिया गया है। जब भी ग्रामीण इसका विधिक विरोध करने का प्रयास करते हैं, तो सांसद के बेटे मनोज सरोज, प्रमोद सरोज और पोता अभिषेक सरोज कथित रूप से सत्ता और रसूख के नशे में चूर होकर ग्रामीणों के साथ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां देते हैं। पीड़िता ने बताया कि उन्होंने पूर्व में स्थानीय एसडीएम, तहसीलदार और क्षेत्रीय पुलिस से कई बार लिखित शिकायत की थी, परंतु सांसद के राजनीतिक प्रभाव और विधिक दबाव के कारण अधीनस्थ अधिकारियों ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिससे परेशान होकर अब उन्हें कमिश्नर की चौखट पर आना पड़ा।

सांसद दरोगा प्रसाद का पलटवार— एक इंच भी अवैध कब्जा मिला तो भुगतेंगे जुर्माना

दूसरी ओर, इन तमाम आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज ने मीडिया के समक्ष आकर इन सभी शिकायतों का पूरी तरह से खंडन किया है। उन्होंने विरोधियों की इस मुहिम को राजनीति से प्रेरित और पूरी तरह निराधार करार दिया है। सांसद ने विधिक स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने गांव के ही मूल निवासी शारदा विश्वकर्मा से नियमानुसार लगभग 3.5 से 4 बीघा जमीन का बाकायदा बैनामा कराया है, जिसकी पैमाइश पूर्व में प्रशासनिक राजस्व अधिकारियों द्वारा की जा चुकी है और सरकारी पैमाइश में उनकी खरीदी गई जमीन बिल्कुल सही पाई गई है। इसके अतिरिक्त उन्होंने लाला जी, तिवारी जी और गांव के अन्य प्रतिष्ठित लोगों से भी विधिक विन्यास के तहत ही जमीनें क्रय की हैं।

सांसद ने अपने बच्चों और पोते पर लगे मारपीट व हुड़दंग के आरोपों को पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठा बताते हुए जिला प्रशासन को खुली चुनौती दे डाली है। उन्होंने कहा कि वे किसी भी स्तर की निष्पक्ष न्यायिक या प्रशासनिक जांच के लिए सहर्ष तैयार हैं। वे जिलाधिकारी (DM), कमिश्नर और तहसीलदार को आमंत्रित करते हैं कि वे स्वयं मौके पर आकर जमीनों के कागजात और स्थलीय विन्यास की जांच करें। सांसद ने एलान किया कि यदि उनके कब्जे में एक इंच भी भूमि अवैध या सरकारी तालाब की पाई जाती है, तो वे दंडात्मक रूप से लाखों रुपये का जुर्माना भरने और कानून के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हैं। कमिश्नर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि राजस्व टीम का गठन कर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

यह भी पढ़ें

इतिहास का वो अद्भुत स्वाद: कैसे चाट, गोल गप्पे बने भारत की सबसे लोकतांत्रिक डिश | बृज खंडेलवाल पासपोर्ट है, नागरिकता नहीं! भारतीय पहचान का नया गणित | वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल का प्रहार काफी हुआ है, बहुत बाकी है! चमकते एक्सप्रेसवे, जर्जर इंसाफ़: क्या सिर्फ़ सड़कें विकसित होने से देश विकसित होता है? | बृज खंडेलवाल सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने को मौलिक अधिकार बनाया, अब परीक्षा आगरा की है | बृज खंडेलवाल का विशेष विश्लेषण “जनता मालिक, प्रतिनिधि सेवक: लोकतंत्र में वास्तविक VIP कौन?” | डॉ प्रमोद कुमार का विशेष विश्लेषण
Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Chief Editor, Taj News


खबर शेयर कीजिए

Leave a Comment