अयोध्या में रामधन लूटकांड में नया मोड़: आरोपी रामशंकर के परिवार का सनसनीखेज दावा–’चोरी बड़े लोगों ने की, बलि का बकरा बने छोटे मुलाजिम’

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uttar pradesh desk, 🌐 tajnews.in | Saturday, 04 July, 2026, 05:02:18 PM IST.

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tajnews.in | अयोध्या: भव्य राम मंदिर में रामधन (श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित चढ़ावा) की लूट से जुड़े देश के सबसे बड़े धार्मिक महाघोटाले में हर दिन नए और चौंकाने वाले मोड़ सामने आ रहे हैं। इस बहुचर्चित प्रकरण की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे जांच के घेरे में आए छोटे मुलाजिमों की हैरान करने वाली जमीनी हकीकत उजागर हो रही है। करोड़ों रुपये के इस घोटाले में नामजद किए गए प्रमुख आरोपी रामशंकर मिश्रा के परिजनों ने अब खुलकर मीडिया के सामने आकर एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है, जिसने पुलिसिया तफ्तीश और मंदिर प्रबंधन की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आरोपी के बदहाल परिवार का सीधा आरोप है कि मंदिर के चढ़ावे में बड़ी डकैती रसूखदार और बड़े लोगों द्वारा कोहरे की तरह अंजाम दी गई है, लेकिन असली गुनाहगारों को बचाने के लिए चंद हजार की नौकरी करने वाले छोटे प्यादों को जानबूझकर बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

HIGHLIGHTS
  1. घोटाले में नया मोड़: रामधन लूट मामले के आरोपी रामशंकर मिश्रा के परिजनों ने मंदिर प्रबंधन और बड़े अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप।
  2. गुरबत की जिंदगी: करोड़ों की लूट के आरोपी के पैतृक घर की दीवारें बिना प्लास्टर की, बदहाली देख हैरान हुए जांच अधिकारी।
  3. वेतन महज 16 हजार: पिछले 6 वर्षों से मंदिर परिसर में चढ़ावे की गिनती का काम कर रहा था आरोपी रामशंकर, किराए के कमरे में रहता था।
  4. बलि का बकरा: परिजनों का तीखा सवाल- बड़ी चोरी रसूखदारों ने की, क्या करोड़ों चुराने वाले का परिवार ऐसी फटेहाली में जिएगा?

राम मंदिर में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित हेरफेर की यह घटना इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस और विशेष जांच एजेंसियों द्वारा जारी की गई आरोपियों की सूची में शामिल रामशंकर मिश्रा के पैतृक आवास की तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं, जो पुलिस की थ्योरी से पूरी तरह मेल नहीं खातीं। आरोपी का परिवार आज भी अत्यंत गरीबी और लाचारी की जिंदगी बसर कर रहा है। घर की जर्जर दीवारों पर प्लास्टर तक नसीब नहीं हुआ है, खिड़कियों और दरवाजों की हालत खस्ता है और टूटे हुए किवाड़ घर की आर्थिक तंगी को चीख-चीख कर बयां कर रहे हैं। इस बदहाली के बीच रहने वाले परिजनों के चेहरों पर करोड़ों के घोटाले का कोई अक्स नहीं, बल्कि केवल लाचारी और बेबसी दिखाई देती है।

इस पूरे घटनाक्रम पर मीडिया के कैमरों के सामने आकर आरोपी रामशंकर मिश्रा की भाभी साधना मिश्रा ने व्यवस्था के खिलाफ कई चौंकाने वाले खुलासे किए। साधना मिश्रा ने भारी मन से बताया कि रामशंकर पिछले करीब 6 साल से राम मंदिर परिसर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे संबंधित कार्यों में तैनात था। आस्था के इस सबसे बड़े केंद्र में इतनी बड़ी और संवेदनशील जिम्मेदारी संभालने के बावजूद ट्रस्ट अथवा संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी द्वारा उसे हर महीने महज 16 हजार रुपये का मामूली वेतन दिया जाता था। इस अल्प मानदेय के कारण वह अपने पैतृक परिवार की मदद करने की स्थिति में भी नहीं था और स्वयं अयोध्या में एक छोटा सा कमरा किराए पर लेकर अस्थाई रूप से रह रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्हें इस पूरे मामले और रामशंकर पर लगे आरोपों की भनक भी महज एक महीने पहले ही लगी है, जब पुलिस की हलचल बढ़ी।

साधना मिश्रा ने देश के प्रतिष्ठित प्रशासनिक और धार्मिक प्रबंधन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि मंदिर में जो भी हेरफेर हुई है, वह किसी साधारण कर्मचारी के बस की बात नहीं है। इसके पीछे ऊंचे पदों पर बैठे रसूखदार अधिकारी और प्रभावशाली लोग शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मामला खुलने लगा और जांच की आंच बड़े अधिकारियों तक पहुँचने की नौबत आई, तो खुद को बेदाग साबित करने के लिए इन बड़े मगरमच्छों ने 16 हजार रुपये की मासिक तनख्वाह पर दिन-रात खटने वाले छोटे मुलाजिमों को आगे कर दिया। परिवार ने तार्किक सवाल उठाया है कि जो व्यक्ति सचमुच करोड़ों रुपये की डकैती या घोटाले का हिस्सा होगा, क्या उसका परिवार इस कदर फटेहाली और गुरबत की जिंदगी जिएगा? क्या करोड़ों रुपये की अवैध कमाई करने वाले के घर की छतें टपकेंगी?

परिजनों द्वारा उठाए गए इन तीखे सवालों और सनसनीखेज दावों के बाद अब राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीमों (SIT) और सुरक्षा एजेंसियों पर चौतरफा दबाव बेहद बढ़ गया है। धार्मिक क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्ध वर्गों और आम जनमानस में भी इस बात को लेकर संशय गहराने लगा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या वाकई सुरक्षा घेरे और सीसीटीवी की जद में रहने वाले इन छोटे श्रेणी के कर्मचारियों ने इतनी बड़ी सेंधमारी को अकेले अंजाम दे दिया, या फिर पर्दे के पीछे कोई ऐसा बड़ा और संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है जिसने करोड़ों रुपये की राशि डकार ली और कानूनी शिकंजे से बचने के लिए छोटे प्यादों का इस्तेमाल ढाल के रूप में कर लिया। बहरहाल, पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी तरह से वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित है, लेकिन आरोपी परिवार के इन आरोपों ने पूरे मामले की दिशा को बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ा कर दिया है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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