आगरा को स्मार्ट सिटी नहीं, विश्व धरोहर नगर का सम्मान चाहिए
अब समय आ गया है कि आगरा को यूनेस्को विश्व धरोहर नगर का दर्जा मिले
— बृज खंडेलवाल
किसी शहर को अपनी महानता साबित करने के लिए और क्या चाहिए? तीन विश्व धरोहर स्मारक? हजारों वर्षों का इतिहास? ऐसी सांस्कृतिक विरासत जिसने साम्राज्यों, धर्मों, कला, स्थापत्य, संगीत, खानपान और सभ्यता को आकार दिया हो? अगर यही कसौटी है, तो आगरा यह परीक्षा बहुत पहले पास कर चुका है। फिर भी विडंबना देखिए। ताजमहल के शहर को आज भी विश्व धरोहर नगर के रूप में पहचान नहीं मिल सकी है। दूसरी ओर अतिक्रमण बढ़ रहे हैं, ऐतिहासिक क्षेत्रों का स्वरूप बिगड़ रहा है और नागरिकों में अपनी धरोहर के प्रति गर्व की भावना लगातार कमजोर पड़ रही है।
आगरा आज एक चौराहे पर खड़ा है। एक रास्ता अव्यवस्थित शहरीकरण, प्रदूषण और विरासत के क्षरण की ओर जाता है। दूसरा रास्ता संरक्षण, सांस्कृतिक गौरव, टिकाऊ पर्यटन और वैश्विक पहचान की ओर। चुनाव कठिन नहीं होना चाहिए। दशकों से सरकारें स्मारकों की सुरक्षा पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करती रही हैं। लेकिन उन स्मारकों को जन्म देने वाले पूरे शहर की अनदेखी होती रही है। ताजमहल अकेले नहीं बच सकता। विरासत केवल संगमरमर की एक इमारत नहीं होती। विरासत पूरे सांस्कृतिक परिदृश्य का नाम है।
ताजगंज की गलियों में चलिए। सिकंदरा, एतमादुद्दौला, दिल्ली गेट या फतेहपुर सीकरी का चक्कर लगाइए। हर जगह एक दर्दनाक विरोधाभास दिखाई देता है। एक ओर भव्य इतिहास खड़ा है, दूसरी ओर अतिक्रमण, कूड़े के ढेर, अव्यवस्थित निर्माण और बदहाल नागरिक व्यवस्था। ऐतिहासिक क्षेत्रों के आसपास अतिक्रमण लगातार बढ़ रहे हैं। नोटिस जारी होते हैं, सर्वेक्षण होते हैं, समितियाँ बनती हैं, लेकिन जमीन पर बदलाव बहुत कम दिखाई देता है। नतीजा सबके सामने है। जो शहर दुनिया की सबसे बड़ी ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाना चाहिए, वह अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
यमुना और पर्यावरणीय संकट
पर्यावरणीय संकट ने स्थिति और गंभीर बना दी है। यमुना, जिसने आगरा की सभ्यता को जन्म दिया और ताजमहल की सुंदरता को निखारा, आज दम तोड़ती दिखाई देती है। कभी जीवनदायिनी रही यह नदी अब कई जगह सूखी और बीमार नजर आती है। सूखे नदी तल से उड़ती धूल और रेत हवा को प्रदूषित कर रही है। वाहनों की बढ़ती संख्या स्थिति को और खराब बना रही है। क्या कोई विरासत नगर अपनी जीवनरेखा नदी के बिना जीवित रह सकता है? यह सवाल केवल पर्यावरण का नहीं, आगरा के भविष्य का है।
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, विडंबना यह भी है कि स्मार्ट सिटी बनने की दौड़ में कहीं न कहीं आगरा की ऐतिहासिक पहचान दांव पर लग गई है। नई सड़कें, फ्लाईओवर और व्यावसायिक परियोजनाएँ अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जो इतिहास को कुचल कर आगे न बढ़े। यहीं पर विश्व धरोहर नगर की अवधारणा अधिक सार्थक दिखाई देती है। यह मांग नई नहीं है। पर्यावरणविदों, इतिहासकारों और संरक्षण कार्यकर्ताओं ने वर्षों पहले केंद्र सरकार से आगरा को यूनेस्को विश्व धरोहर नगर का दर्जा दिलाने की मांग की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने भी ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र के लिए एक दृष्टि दस्तावेज तैयार करने का निर्देश दिया था।
आगरा का साझा सांस्कृतिक दस्तावेज़
आगरा का दावा केवल ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी तक सीमित नहीं है। यह शहर भारत की साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यमुना किनारे बसे बटेश्वर के प्राचीन शिव मंदिर इस क्षेत्र को भारत की सबसे पुरानी धार्मिक परंपराओं से जोड़ते हैं। फतेहपुर सीकरी में सम्राट अकबर ने दीन-ए-इलाही के माध्यम से विभिन्न धर्मों के बीच संवाद का प्रयोग किया। आगरा के ऐतिहासिक चर्च ईसाई विरासत की कहानी कहते हैं। सिकंदरा के निकट गुरु का ताल धार्मिक स्वतंत्रता के लिए सिख बलिदान की याद दिलाता है। राधास्वामी मत का जन्म भी इसी शहर में हुआ, जिसके अनुयायी आज पूरी दुनिया में हैं।
आगरा केवल मुगलों का शहर नहीं है। यह भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक यात्रा का जीवंत दस्तावेज है। मध्यकाल में आगरा को लंदन और पेरिस से भी बड़ा और अधिक विश्वनगरीय शहर बताया गया था। वह आत्मा आज भी पुरानी मंडियों, पारंपरिक शिल्प, स्थानीय व्यंजनों और ऐतिहासिक मोहल्लों में जीवित है। लेकिन केवल जीवित रहना पर्याप्त नहीं है। विरासत को बचाना, संजोना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी जरूरी है।
विरासत चेतना की आवश्यकता
विश्व धरोहर नगर का दर्जा आगरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान देगा। इससे संरक्षण परियोजनाओं को गति मिलेगी, बेहतर शहरी नियोजन संभव होगा और सबसे महत्वपूर्ण, स्थानीय लोगों में अपनी विरासत के प्रति गर्व की भावना पैदा होगी। समस्या स्मारकों की कमी नहीं, बल्कि विरासत चेतना की कमी है। स्कूलों, कॉलेजों और समाज में धरोहर शिक्षा को मजबूत करने की जरूरत है। हेरिटेज वॉक और सांस्कृतिक उत्सवों के माध्यम से लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ा जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, नीति निर्माताओं के सामने सवाल सीधा है—यदि आगरा विश्व धरोहर नगर बनने योग्य नहीं है, तो फिर कौन सा भारतीय शहर है? अब रिपोर्टों और आश्वासनों का समय बीत चुका है। यमुना को पुनर्जीवित कीजिए। अतिक्रमण हटाइए। शहर के गौरव को पुनर्स्थापित कीजिए। आगरा केवल वह शहर नहीं होना चाहिए जहाँ पर्यटक कुछ घंटे बिताकर आगे बढ़ जाएँ। इसे दुनिया के महानतम विरासत नगरों में सम्मानजनक स्थान मिलना ही चाहिए।
(लेखक आगरा के वरिष्ठ पत्रकार, पर्यावरणविद् और ब्रज मंडल हेरिटेज कंजर्वेशन सोसाइटी के संस्थापक हैं।)
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