National Desk, 🌐 [tajnews.in] | Sunday, 19 July, 2026, 02:08:00 PM IST.

tajnews.in | नई दिल्ली: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में सामने आए चढ़ावा चोरी के सनसनीखेज मामले ने अब देश के सर्वोच्च राजनैतिक हलकों में भारी उबाल पैदा कर दिया है। संसद के दोनों सदनों के विपक्ष के नेताओं ने इस मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बेहद तीखा पत्र प्रेषित कर दिया है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संयुक्त हस्ताक्षरों से जारी इस पत्र में प्रधानमंत्री की चुप्पी पर कड़े सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और गाढ़ी कमाई से जुड़े इस महा-घोटाले पर सरकार का मौन अत्यंत चिंताजनक है। पत्र के माध्यम से दोनों शीर्ष नेताओं ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराने और ट्रस्ट के वित्तीय खातों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
‘श्रद्धालु महसूस कर रहे हैं ठगा’, विपक्ष ने नियुक्तियों और संबंधों पर खड़े किए सीधे सवाल
संसद के आधिकारिक लेटरहेड पर प्रेषित इस साझा पत्र के विवरण के अनुसार, दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि वे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए हजारों करोड़ रुपये के चढ़ावे की चोरी से पूरी तरह अवगत हैं. देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा, भक्ति और अटूट विश्वास के साथ अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा मंदिर निर्माण के लिए दान किया था, जो अब इस महा-चोरी के बाद खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. पत्र में याद दिलाया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्वयं प्रधानमंत्री ने संसद में इस ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी, परंतु इसके सदस्यों का चयन पूरी तरह सरकार द्वारा अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया.

मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने सीधे आरोप लगाया कि यह सार्वजनिक रूप से सभी को ज्ञात है कि वर्तमान ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और उनके अनुषांगिक संगठनों से जुड़े हुए हैं. इतना ही नहीं, पत्र में मंदिर परिसर में प्रशासनिक बदलावों की लपेट में आए पूर्व महासचिव को भी प्रधानमंत्री का बेहद करीबी सहयोगी बताया गया है. विपक्ष ने कड़े शब्दों में कहा कि इतने बड़े धार्मिक और वित्तीय अपराध के सामने प्रधानमंत्री की वर्तमान चुप्पी पूरी तरह से अस्वीकार्य है और यह सरकार का नैतिक उत्तरदायित्व है कि वे मामले में पूर्ण जवाबदेही सुनिश्चित कर नुकसान की भरपाई कराएं.
सोने, चांदी और नकदी के हिसाब को सार्वजनिक करे सरकार, देश की जनता रख रही है नजर
राजनैतिक विन्यास के तहत उठाए गए इस कदम में विपक्ष ने केंद्र सरकार से तत्काल एक स्वतंत्र और व्यापक स्तर की समयबद्ध जांच समिति गठित करने का आग्रह किया है. यह जांच समिति ट्रस्ट के संपूर्ण वित्तीय मामलों के साथ-साथ मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे, सोने और चांदी के आभूषणों व अन्य बहुमूल्य सामग्रियों के रखरखाव व प्रबंधन की बारीकी से ऑडिट करे. पत्र में जोर देकर कहा गया है कि जांच के जो भी निष्कर्ष आएं और ट्रस्ट के जो भी वास्तविक खाते हों, उन्हें पूरी पारदर्शिता के साथ देश की आम जनता के सामने रखा जाए, ताकि हर एक भक्त को यह ज्ञात हो सके कि उनके द्वारा दिए गए दान का उपयोग किस प्रकार किया गया है.
दोनों नेताओं ने पत्र के अंत में कड़ा संदेश देते हुए लिखा कि इस चोरी के लिए जो भी लोग जिम्मेदार पाए जाएं, उन्हें उनके रसूख, पद अथवा राजनैतिक प्रभाव को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए और कानून के शिकंजे में लाया जाए. उन्होंने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार और स्वयं राम मंदिर ट्रस्ट की विश्वसनीयता अब पूरी तरह इस बात पर टिकी है कि प्रधानमंत्री इस संवेदनशील मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ कदम उठाते हैं, क्योंकि पूरे देश की जनता और करोड़ों सनातनी इस समय सरकार के हर एक एक्शन को बेहद करीब से देख रहे हैं. इस पत्र के सामने आने के बाद संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर भारी हंगामे के आसार बन गए हैं.
यह भी पढ़ें

Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
7579990777




