Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Friday, 31 July, 2026, 08:14:12 PM IST.

tajnews.in | आगरा: नागरी प्रचारिणी सभा, आगरा द्वारा शुक्रवार को सभा भवन में प्रेमचंद जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में साहित्यकारों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने मुंशी प्रेमचंद के साहित्य, व्यक्तित्व और सामाजिक सरोकारों पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद केवल एक महान कथाकार ही नहीं, बल्कि समाज के वंचित, शोषित और कमजोर वर्ग की आवाज़ को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्ति देने वाले युगप्रवर्तक रचनाकार थे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सेंट एंड्रयूज़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीएमडी डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद को भारतीय साहित्य में ‘उपन्यास सम्राट’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि 1880 से 1936 तक का उनका साहित्यिक काल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक परिवर्तन के दौर का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। प्रेमचंद ने अपने लेखन के माध्यम से समाज और राष्ट्र की चेतना को नई दिशा प्रदान की।
मुख्य वक्ता प्रो. उमापति दीक्षित, विभागाध्यक्ष, सायंकालीन पाठ्यक्रम विभाग, केंद्रीय हिंदी संस्थान (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) ने कहा कि प्रेमचंद बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने समाज के गरीब, शोषित और वंचित वर्ग की पीड़ा को गहराई से समझा और उसे अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। उनके साहित्य में तत्कालीन भारतीय समाज और इतिहास का यथार्थ चित्रण मिलता है। उन्होंने बताया कि प्रेमचंद की रचनाओं का अनेक विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ, जिसके कारण उन्हें विश्व साहित्य में भी सम्मानजनक स्थान प्राप्त हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि प्रेमचंद को भारत का “टॉलस्टॉय” भी कहा जाता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नागरी प्रचारिणी सभा के सभापति डॉ. खुगीराम शर्मा ने कहा कि जिस समय प्रेमचंद ने लेखन शुरू किया, उस दौर में हिंदी कथा साहित्य में प्रगतिशील विचारधारा की कोई सशक्त परंपरा विकसित नहीं हुई थी। प्रेमचंद ने अपनी मौलिक दृष्टि और सामाजिक सरोकारों के बल पर हिंदी कथा साहित्य को नई दिशा प्रदान की।
वरिष्ठ कवि रामेंद्र मोहन त्रिपाठी ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व और कृतित्व के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए उनकी रचनाओं की सामाजिक प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभा की उपसभापति प्रो. कमलेश नागर ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उनके समय में थीं। वहीं सभा के मंत्री प्रो. चंद्रशेखर शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि प्रेमचंद से पहले हिंदी कथा साहित्य में तिलिस्म, कल्पना और राजदरबारों का प्रभाव अधिक था, लेकिन प्रेमचंद ने यथार्थवादी कथा लेखन की परंपरा स्थापित कर हिंदी साहित्य को नई दिशा दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. शशि तिवारी द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। अतिथियों का स्वागत डॉ. ब्रज बिहारी बाल वर्मा ‘बिरजू’ ने किया। मुख्य वक्ता का परिचय डॉ. मधु भारद्वाज तथा मुख्य अतिथि का परिचय डॉ. विनोद माहेश्वरी ने कराया।
इस अवसर पर प्रो. आभा चतुर्वेदी, डॉ. नीलम भटनागर, डॉ. मधुरिमा शर्मा, डॉ. हरबंस पाण्डेय, रमेश पंडित, डॉ. महेश धाकड़, नंद नंदन गर्ग, ओम स्वरूप गर्ग, लखमीचंद, शैलेंद्र कुमार वशिष्ठ, शरद गुप्त, रामेंद्र शर्मा रवि, शैल अग्रवाल, नूतन अग्रवाल, सपना सिंह, मनीष सिंह, हेमंत कुमार द्विवेदी, प्रकाश गुप्ता, शैलेंद्र वर्मा, डॉ. यशोयश, प्रकाश चंद्र अग्रवाल, खुशी सिंह और उमा शंकर पाराशर सहित अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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Thakur Pawan Singh
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