सफेद चादर का घेरा, सिविल ड्रेस में जवान और ‘लद्दाख के गांधी’ का रेस्क्यू: जंतर-मंतर से कैसे उठाए गए सोनम वांगचुक, तड़के सुबह का वो सीक्रेट ऑपरेशन

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National Desk, 🌐 [tajnews.in] | Saturday, 18 July, 2026, 12:46:00 PM IST.

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tajnews.in | नई दिल्ली: राजधानी के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हटाने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक बेहद चौंकाने वाले और अति-गोपनीय मेगा ऑपरेशन को अंजाम दिया है। शनिवार की तड़के सुबह जब दिल्ली सो रही थी, तब जंतर-मंतर छावनी में तब्दील हो चुका था। नए पुलिस कमिश्नर के कार्यभार संभालते ही एक उच्चस्तरीय विन्यास के तहत इस त्रि-स्तरीय फुल प्रूफ रणनीति को हरी झंडी दी गई थी। इस पूरे खुफिया ऑपरेशन की भनक विभाग के इंस्पेक्टर स्तर तक के अधिकारियों को भी नहीं थी। सादे कपड़ों में आए जवानों, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के कड़े चक्रव्यूह और सफेद चादरों के घेरे के बीच अनशन के 21वें दिन की सुबह वांगचुक को धरना स्थल से उठाकर सीधे सफदरजंग अस्पताल पहुँचाया गया।

HIGHLIGHTS
  1. सीक्रेट रणनीति: नए पुलिस कमिश्नर की उच्चस्तरीय विधिक बैठक में बनी रणनीति, भनक न लगे इसलिए केवल चुनिंदा सीनियर अफसरों तक सीमित रही जानकारी।
  2. सफेद चादर का चक्रव्यूह: कैमरों और अनावश्यक भीड़ से विन्यास को बचाने के लिए सोनम वांगचुक के पूरे मंच को सफेद चादरों से ढका गया।
  3. तड़के सुबह का एक्शन: प्रदर्शनकारियों की संख्या न्यूनतम होने और मुख्य सहयोगी अभिजीत दीपके के कुछ देर के लिए बाहर जाते ही पुलिस ने बोला धावा।
  4. त्रि-स्तरीय सुरक्षा चक्र: सादे कपड़ों में स्पेशल स्टाफ ने संभाला मंच, बाहर आरएएफ (RAF) व सीआरपीएफ मुस्तैद, ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अस्पताल भेजी गई एम्बुलेंस।

अभिजीत दीपके के हटते ही सादे कपड़ों में स्पेशल स्टाफ ने बोला धावा

पुलिस विभाग के शीर्ष विधिक सूत्रों के अनुसार, इस पूरे खुफिया ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए शनिवार की सुबह का समय बेहद चालाकी से चुना गया था, क्योंकि उस वक्त धरना स्थल पर प्रदर्शनकारी और छात्र सबसे कम संख्या में मौजूद थे। पुलिस रणनीतिकारों ने उस सटीक क्षण का इंतजार किया जब वांगचुक के सबसे भरोसेमंद और कड़े सहयोगी अभिजीत दीपके नित्यक्रिया व फ्रेश होने के लिए कुछ देर के लिए मंच से बाहर निकले। ठीक इसी समय, नई दिल्ली जिले के स्पेशल स्टाफ और स्थानीय पुलिस के लगभग 30 से 35 कमांडो व जवान सादे कपड़ों (सिविल ड्रेस) में बैरिकेडिंग को लांघकर सीधे मुख्य मंच की ओर बढ़े। किसी को भनक न लगे और कोई विधिक टकराव न हो, इसलिए पूरी टीम बिना किसी वर्दी के आम नागरिकों की तरह विन्यास में घुसी थी।

मंच पर पहुँचते ही सादे कपड़ों में मौजूद जवानों ने सबसे पहले सोनम वांगचुक के बिस्तर और पूरे मंच को चारों तरफ से विशाल सफेद चादरों से पूरी तरह कवर कर दिया। पुलिस का मुख्य उद्देश्य यह था कि कार्रवाई के दौरान मीडिया के कैमरों में कोई भी विजुअल या तस्वीरें लाइव कैद न हो सकें और न ही अचानक कोई भगदड़ मचे। चादरों के इसी अभेद्य घेरे के बीच बेहद संयम बरतते हुए पुलिस के जवानों ने 20 दिनों के उपवास से अत्यधिक आहत और कमजोर हो चुके वांगचुक को बिस्तर सहित उठाया और मंच से नीचे ले आए। इस दौरान जैसे ही चादर हटी, तो वांगचुक ने हवा में हाथ उठाकर प्रदर्शनकारियों को अपने होने का अहसास कराया, जिससे कुछ पलों के लिए जंतर-मंतर पर भारी अफरा-तफरी और तीखी नोकझोंक की स्थिति पैदा हो गई।

तीन चरणों का फुल प्रूफ विन्यास और सफदरजंग अस्पताल में हाई-अलर्ट

दिल्ली पुलिस के इस पूरे ऑपरेशन का विन्यास तीन कड़े और पृथक चरणों में विभाजित था। प्रथम चरण के तहत सिविल ड्रेस वाले खुफिया दस्ते ने आंतरिक घेरा बनाकर वांगचुक को मंच से सुरक्षित बाहर निकाला। द्वितीय चरण में बैरिकेडिंग के ठीक बाहर मुस्तैद सीआरपीएफ (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के बख्तरबंद जवानों ने बाहरी सुरक्षा चक्र को संभाल रखा था, जिनका मुख्य कार्य आक्रोशित हो रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों को लाठीचार्ज की नौबत आने से पहले ही विधिक रूप से नियंत्रित रखना था। तृतीय और अंतिम चरण के तहत दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी एम्बुलेंस के पास बनाए गए एक अस्थाई विधिक कंट्रोल पॉइंट से पूरे घटनाक्रम की वायरलेस पर लगातार मॉनिटरिंग कर रहे थे।

जैसे ही वांगचुक को एम्बुलेंस के भीतर शिफ्ट किया गया, ट्रैफिक पुलिस के विन्यास ने तुरंत सक्रिय होकर पूरे रास्ते को खाली कराते हुए एक अस्थाई ‘ग्रीन कॉरिडोर’ स्थापित कर दिया, जिससे बिना किसी व्यवधान के उन्हें सीधे सफदरजंग अस्पताल पहुँचाया जा सका। दिल्ली पुलिस ने पहले ही सफदरजंग अस्पताल के भीतर और बाहर दक्षिण-पश्चिमी जिले की पुलिस फोर्स को तैनात कर आपातकालीन वार्ड को पूरी तरह छावनी में बदल दिया था। अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, लंबे उपवास और डिहाइड्रेशन के कारण वांगचुक की सेहत काफी नाज़ुक है, परंतु वर्तमान में वे स्थिर हैं और डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी सघन विधिक निगरानी कर रही है। इधर जंतर-मंतर पर वांगचुक को हटाए जाने के आक्रोश में युवा नेता अभिजीत दीपके ने खुद भूख हड़ताल पर बैठने का एलान कर दिया है, जिससे टकराव के आसार और बढ़ गए हैं।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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