मैया मोरी मैं नहीं मंगलसूत्र चुरायो! : अयोध्या चढ़ावा विवाद पर तीखा प्रहार

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Article Desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 06 July, 2026, 08:52:37 PM IST.

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Rajendra Sharma
राजेंद्र शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार व संपादक
देश के प्रतिष्ठित वरिष्ठ पत्रकार और साप्ताहिक पत्रिका ‘लोकलहर’ के संपादक राजेंद्र शर्मा राजनैतिक और सामाजिक विसंगतियों पर अपनी पैनी, धारदार और व्यंग्यात्मक लेखनी के लिए जाने जाते हैं। अपनी बेबाक शैली के माध्यम से वे प्रशासनिक पारदर्शिता, लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक जवाबदेही के सुलगते सवालों को निरंतर उठाते रहते हैं।

मैया मोरी मैं नहीं मंगलसूत्र चुरायो! : अयोध्या चढ़ावा विवाद पर तीखा प्रहार

— राजेंद्र शर्मा

अब इसमें मंगलसूत्र की चोरी की बात कहां से आ गयी। माना कि रामलला के घर में चोरी हुई है। माना कि अयोध्या में रामलला के चढ़ावे में से चोरी हुई है। माना कि छोटी-मोटी नहीं, करोड़ों रुपए की चोरी हुई है। माना कि किसी एक दिन नहीं, दो-चार बार भी नहीं, बार-बार, लगातार, सालों चोरी हुई है। माना कि मंदिर बनने के बाद ही नहीं, मंदिर बनने से पहले से चोरी हुई है। माना कि मोदी जी के शिला पूजन से पहले से चोरी हुई है, मोदी जी के मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठापन तक और उन्हीं के कर कमलों से ध्वजारोहण के पहले और बाद तक चोरी हुई है।

माना कि किसी तरह की हड़बड़ी में नहीं, बड़े इत्मीनान से, व्यवस्थित तरीके से चोरी हुई है। सिर्फ रुपये-पैसे की ही नहीं, हर कीमती चीज की चोरी हुई है। रामलला की चरण पादुका से लेकर गले के हार तक की। सोने से मढ़ी रामायण से लेकर, रत्नजड़ित काकभुशुंडी तक की। सुना है कि चांदी की दो सौ ईंटें तक चोरी हो गयीं, जो मंदिर की नींव में लगनी थीं। और हां! जमीन की भी चोरी हुई है। वैसे जमीन तो मस्जिद की भी चोरी हुई थी, मगर हम उसकी बात नहीं करेंगे। सबसे बड़ी अदालत जिस चोरी को ही न्याय कहे, उसे चोरी कहने की जुर्रत कौन करेगा? एंटी-राम और एंटी-नेशनल कहलाएगा सो कहलाएगा, सबसे ऊंची अदालत को बदनाम करने के जुर्म में, अदालत में ही रगड़ा और जाएगा। पर जमीनें और भी चुराई गई हैं, मस्जिद की जमीन के सिवा। वह सब तो सही है।

माना कि चोरी की एक-एक बात सब सही है। फिर भी इसमें मंगलसूत्र की चोरी की बात कहां से आ गयी। इस सब का मंगलसूत्र की चोरी से क्या लेना-देना है? चंदा चोरी करने वालों पर मंगलसूत्र की चोरी का इल्जाम यूं ही नहीं लगाया जा सकता। मंगलसूत्र की बात डिफरेंट है। बाकी सारी चोरी के इल्जाम एक तरफ, मां-बहनों के मंगलसूत्र की चोरी का इल्जाम एक तरफ। मंगलसूत्र की चोरी का अलग से खंडन इसलिए करना पड़ रहा है कि अयोध्या से किन्हीं साधु-महात्मा जी का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में साधु बाबा एक किस्सा सुनाते हैं। अयोध्या में मार-काट वाली कार सेवा के दौरान, दक्षिण भारत की एक महिला बाबा के पास आती है। बताती है कि उसका पति कार सेवा में शहीद हो गया है, क्या अयोध्या में उसका अंतिम संस्कार हो सकता है? बाबा ने कहा, अवश्य। अंतिम संस्कार के बाद उस महिला ने बाबा जी को रूमाल की छोटी सी पोटली देनी चाही। बाबा ने पूछा इसमें क्या है? महिला ने दिखाया, उसमें मंगलसूत्र था। बाबा ने कहा, हम तो साधु-महात्मा हैं, इसे नहीं रख सकते। पर जब राम मंदिर बन जाएगा, तब आकर इसे मंदिर में चढ़ा जाना। मंदिर बन गया, वह महिला फिर आयी और अपना मंगलसूत्र दानपात्र में चढ़ा भी गयी। पर मंगलसूत्र, रामलला के खाते में तो चढ़ा ही नहीं। चंदा चोरी करने वालों ने मंगलसूत्र भी नहीं छोड़ा। कारसेवक की विधवा का मंगलसूत्र भी चुरा लिया!

वायरल वीडियो वाले साधु-बाबा कितने साधु हैं और कितने बाबा, हम नहीं जानते। अयोध्या में तो कहते हैं कि जहां भी कोई ईंट खिसकाओ, नीचे दो-तीन भगवाधारी तो निकल ही आएंगे। फिर भी, साधु-बाबा की कहानी अगर पूरी सच भी मान ली जाए और कार सेवक विधवा के राम मंदिर में अपना मंगलसूत्र चढ़ाने के दावे को सच भी मान लिया जाए, तब भी इससे ज्यादा से ज्यादा मंगलसूत्र दान पेटी में डाले जाने की बात साबित होती है, मंगलसूत्र की चोरी की नहीं। दान पेटी में डालने और रामलला के खाते तक पहुंचने के बीच में, मंगलसूत्र कई और संदों में भी सरक सकता है, चोरी के सिवा।

हो सकता है कि दान पेटी में डालते समय ही मंगलसूत्र इधर-उधर सरक गया हो और दान पेटी के अंदर गया ही नहीं हो। दान पेटी से जो खुद ही सरक जाए, उसे रामलला का चढ़ावा कैसे कहेंगे? वह तो रामलला द्वारा रिजेक्टेड चढ़ावा ही माना जाएगा। उसे हटाने में चोरी कैसी? या हो सकता है कि मंगलसूत्र ज्यादा ही पतला हो और दान पेटी में ही अटका रह गया हो। पेटी से नोट-नोट निकलते हों, मंगलसूत्र अब भी उसी में अटका हुआ हो। या मंगलसूत्र पेटी खाली करते समय, इधर-उधर खिसक कर छिप गया हो। या रामलला ने ही खेल-खेल में छुपा लिया हो और फिर भूल गए हों। यानी और भी बहुत कुछ है, जो हो सकता है, मंगलसूत्र की चोरी के सिवा। इसलिए, जब तक सीधे चोरी का साक्ष्य न हो, तब तक यूं ही चढ़ावा चोरों पर मंगलसूत्र की चोरी का इल्जाम लगाना ठीक नहीं है।

यूं तो जब तक चोरी साबित नहीं हो जाए, तब तक किसी भी चीज की चोरी का इल्जाम लगाना ही ठीक नहीं है। सुना है कि राम मंदिर के ट्रस्टी गोपाल राव को लखनऊ से बंगलूरु की उड़ान में सह-यात्रियों ने चढ़ावा चोर और चंदा चोर कहकर घेर लिया। विमान चालक दल को उन्हें उग्र भीड़ से बचाना पड़ा। यह ठीक है क्या? खैर! चढ़ावा चोरी और चंदा चोरी तक की बात तो फिर भी टेढ़े-मेढ़े तर्कों से मानी जा सकती है, पर मंगलसूत्र की चोरी की बात हम हरगिज नहीं मानेंगे। चंपत राय हों तो, गोपाल राव हों तो, नृपेन्द्र मिश्र हों तो या कोई और ट्रस्टी, सब के सब मोदी जी ने खुद चुन-चुनकर ट्रस्ट में रखे हैं। सब के सब नागपुर दीक्षित हैं, सब के सब पक्के वाले संस्कारी हैं। यहां तक कि उन्होंने मंदिर की व्यवस्था से लेकर नोटों की गिनती तक के लिए जितने भी लोगों को लगाया है, उन्हें भी और कुछ आता हो या नहीं आता हो, हैं पक्के संस्कारी। पक्का संस्कारी चुराने पर आ जाएगा, तो कुछ भी चुराएगा, रामलला की गुल्लक से भी चुराएगा, पर किसी मां-बहन का मंगलसूत्र नहीं चुराएगा!

आखिरकार, मंगलसूत्र की चोरी तो गैर-संस्कारी विपक्षियों के लिए रिजर्व्ड है। मोदी जी ने पिछले चुनाव के समय ही माताओं-बहनों को चेता दिया था कि विपक्षी, कुछ नहीं छोड़ेंगे, मंगलसूत्र भी चुरा लेंगे। जिन मोदी जी ने 2024 के चुनाव में अपनी कुर्सी ही नहीं बचायी, माताओं-बहनों का मंगलसूत्र भी बचाकर दिखाया, वह अपने मंदिर में मंगलसूत्र की चोरी, अपने पट्ठों तक को कैसे करने दे सकते हैं? अगले चुनाव में भी तो हिंदू माताओं-बहनों को मंगलसूत्र के लिए विपक्ष वालों से खतरा दिखाना है!

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Pawan Singh

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Chief Editor, Taj News

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