‘ट्रंप के हस्ताक्षर की कोई कीमत नहीं’: शांति समझौता टूटने पर भड़के मोजतबा खामेनेई, ईरान ने अमेरिका को दे डाली भीषण युद्ध की धमकी

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International Desk, 🌐 [tajnews.in] | Sunday, 19 July, 2026, 08:38:00 AM IST.

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tajnews.in | तेहरान: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के राजनैतिक विन्यास में एक बार फिर भीषण युद्ध के काले बादल मंडराने लगे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ ऐतिहासिक शांति समझौता (MoU) मजह एक महीने के भीतर ही पूरी तरह से तार-तार हो गया है। शांति समझौता टूटने से बेहद आक्रोशित ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने वाशिंगटन पर तीखा विधिक और रणनीतिक हमला बोला है। खामेनेई ने देश की जनता के नाम जारी एक कड़े संदेश में गरजते हुए कहा कि अमेरिका ने समझौते का खुला उल्लंघन कर यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षरों की विधिक रूप से कोई कीमत नहीं है, वे पूरी तरह से बेकार और अमान्य हैं। इस बड़े उलटफेर के बाद ईरान ने भी समझौते के सभी नियमों को विधिक तौर पर मानना बंद कर दिया है और अमेरिकी हमलों का करारा सैन्य जवाब देने के लिए अपने ‘प्रतिरोध मोर्चे’ (रेसिस्टेंस फ्रंट) को हाई-अलर्ट पर डाल दिया है।

HIGHLIGHTS
  1. समझौता पूरी तरह ध्वस्त: ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका पर लगाया शांति समझौते के विधिक उल्लंघन का गंभीर आरोप।
  2. ट्रंप पर सीधा प्रहार: खामेनेई ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षरों को बताया रद्दी का टुकड़ा, कहा— अमेरिका का असली बेनकाब चेहरा दुनिया के सामने आया।
  3. बातचीत के रास्ते बंद: उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी का बड़ा एलान— ईरान ने वादों को निभाना किया बंद, अब वार्ता की कोई विधिक गुंजाइश नहीं।
  4. भयानक सबक की चेतावनी: युद्ध भड़काने पर रेसिस्टेंस फ्रंट द्वारा अमेरिका को इतिहास का सबसे गंभीर और न भूलने वाला सबक सिखाने की सैन्य धमकी।

18 जून को पेजेश्कियान और ट्रंप ने किए थे दस्तखत, 60 दिनों का विन्यास हुआ शून्य

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विन्यास और शिन्हुआ समाचार एजेंसी के आधिकारिक विवरण के अनुसार, दोनों शत्रु देशों के मध्य बढ़ते भू-राजनैतिक तनाव को कम करने के उद्देश्य से इसी वर्ष 18 जून को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) पर विधिक दस्तखत किए थे। इस विन्यास के तहत दोनों महाशक्तियों को 60 दिनों की तय समयसीमा के भीतर एक अंतिम और स्थायी शांति समझौते के लिए मेज पर बैठकर विधिक बातचीत आगे बढ़ानी थी। परंतु, इस विधिक पहल के बावजूद दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा था। अमेरिका की ओर से हाल ही में किए गए कथित हवाई हमलों ने इस शांति विन्यास की पूरी तरह से रीढ़ तोड़ दी, जिसके बाद ईरान के सर्वोच्च नेता ने अमेरिका के इस कृत्य को उसके झूठ, अतार्किक, अविश्वसनीय और साम्राज्यवादी बुरे स्वभाव का एक और ठोस विधिक प्रमाण बताया है।

ईरान के सर्वोच्च नेता ने वाशिंगटन को चेतावनी भरे लहजे में आगाह किया है कि यदि व्हाइट हाउस ने मध्य पूर्व के भीतर युद्ध भड़काने और सैन्य चौकियों को निशाना बनाने की अपनी आक्रामक साम्राज्यवादी कोशिशें तत्काल बंद नहीं कीं, तो पेंटागन को ऐसा भारी रणनीतिक और मानवीय नुकसान उठाना पड़ेगा जिसकी कल्पना भी अमेरिकी जनरलों ने नहीं की होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिकी हमले जारी रहे, तो ईरान की नियमित सेना, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और समूचा ‘प्रतिरोध मोर्चा’ (रेसिस्टेंस फ्रंट) मिलकर अमेरिकी सैन्य विन्यासों और ठिकानों पर एक ऐसा विनाशकारी आत्मघाती पलटवार करेगा, जिसे अमेरिकी इतिहास में कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

सरकारी टीवी पर उप विदेश मंत्री गरीबाबादी का एलान, रक्षात्मक विन्यास में आया ईरान

राजनैतिक संकट के इस चरम बिंदु पर ईरान के कानूनी और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने शनिवार की रात एक आधिकारिक विधिक घोषणा कर दी। उन्होंने ईरान के प्रतिष्ठित सरकारी टेलीविजन चैनल आईआरआईबी (IRIB) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में बेहद कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि अमेरिका ने इस ऐतिहासिक समझौते के तहत किए गए अपने सभी वादों को एकतरफा निलंबित अथवा विधिक रूप से तोड़ दिया है। इसी के प्रतिशोध में ईरान ने भी इस शांति समझौते के अंतर्गत स्वेच्छा से स्वीकार की गई अपनी समस्त परमाणु और सामरिक जिम्मेदारियों को तुरंत प्रभाव से पूरा करना बंद कर दिया है।

उप विदेश मंत्री ने वैश्विक राजनय को दो टूक शब्दों में अवगत करा दिया है कि अब वाशिंगटन के कपटी नेतृत्व के साथ किसी भी प्रकार की राजनैतिक या विधिक बातचीत की कोई गुंजाइश शेष नहीं बची है। ईरान का पूरा ध्यान अब केवल और केवल शत्रु ताकतों से अपनी संप्रभुता और भौगोलिक सीमाओं की विधिक रक्षा करने के सैन्य विन्यास पर केंद्रित है। उन्होंने दावा किया कि हालिया अमेरिकी हमलों का अत्यंत करारा और आक्रामक जवाब तेहरान द्वारा दिया जा चुका है और यदि अमेरिका अपने सैनिकों की जान की सुरक्षा चाहता है, तो उसे समझदारी दिखाते हुए युद्ध का उन्माद छोड़कर दूसरा विधिक रास्ता चुनना चाहिए। इस महा-तनाव के बाद खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में भी कड़ा हड़कंप मच गया है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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