पारसनाथ जैन ट्रस्ट का बड़ा खेल: आगरा में कोर्ट के स्टे ऑर्डर की धज्जियां उड़ाकर 7 हजार गज पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जा

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Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Saturday, 04 July, 2026, 06:34:55 PM IST.

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tajnews.in | आगरा: ताजनगरी के थाना रकाबगंज अंतर्गत छीपीटोला क्षेत्र में करोड़ों रुपये की पुश्तैनी भूमि पर अवैध कब्जे और जालसाजी को लेकर एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। राम नारायण शिवहरे के वंशजों ने पारसनाथ जैन ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर न्यायालय द्वारा जारी स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) की खुलीआम धज्जियां उड़ाने, पुश्तैनी जमीन पर अवैध निर्माण करने और राजनीतिक रसूखदारों को गुमराह करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। संजय प्लेस स्थित आहार रेस्टोरेंट में आयोजित एक आपातकालीन प्रेसवार्ता के दौरान पीड़ित परिवार ने दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ खुलासा किया कि ट्रस्ट के भू-माफिया तत्वों ने न केवल करीब 7 हजार वर्ग गज पुश्तैनी जमीन पर अवैध रूप से बाउंड्री वॉल खड़ी कर कब्जा कर लिया, बल्कि विरोध करने पर एक पर्यटक महिला अधिकारी के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट और दुर्व्यवहार भी किया। पीड़ित परिवार ने सूबे के मुख्यमंत्री, पुलिस कमिश्नर और जिला प्रशासन से इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कड़ी विधिक कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।

HIGHLIGHTS
  1. अवैध कब्जे का खेल: छीपीटोला में स्टे ऑर्डर के बावजूद पारसनाथ जैन ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर 7 हजार गज पुश्तैनी जमीन हड़पने का आरोप।
  2. जालसाजी और मारपीट: दिवंगत अधिवक्ता और पीड़ित नितिन के फर्जी हस्ताक्षर बनाने व महिला अधिकारी से मारपीट की नामजद शिकायत।
  3. रसूख का दुरुपयोग: न्यायालय का यथास्थिति (स्टेटस-क्वे) आदेश छुपाकर राजनीतिक रसूखदारों को गुमराह करने का सनसनीखेज खुलासा।
  4. बुजुर्ग बेघर: भू-माफियाओं के आतंक के कारण 80 वर्षीय हृदय रोगी बुजुर्ग महिला राजकुमारी देवी और उनका परिवार अपने ही घर से हुआ बेघर।

महानगर के हृदय स्थल छीपीटोला में स्थित इस पुश्तैनी और विवादित भूमि को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है। प्रेसवार्ता के दौरान पीड़ित राम नारायण शिवहरे के कानूनी वारिसों ने बताया कि जिस विवादित भूमि पर न्यायालय का स्पष्ट यथास्थिति बनाए रखने का वैधानिक आदेश प्रभावी है, उस पर ट्रस्ट के लोगों ने कानून के इकबाल को चुनौती देते हुए रातों-रात निर्माण कार्य करा दिया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि 29 और 30 जून की दरमियानी रात को भारी संख्या में असामाजिक तत्वों को मौके पर बुलाकर बलपूर्वक एक कमरे का अवैध निर्माण कराया गया। आरोप है कि पारसनाथ जैन ट्रस्ट के पास केवल 3000 वर्ग गज भूमि की ही एक विवादित गिफ्ट रजिस्ट्री उपलब्ध है, जिसकी वैधानिकता स्वयं वर्ष 2000 से न्यायालय में गंभीर चुनौती के अधीन है। इसके बावजूद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए करीब 7000 वर्ग गज पुश्तैनी भूमि को चारों तरफ से बाउंड्री वॉल बनाकर घेरने और उसे हड़पने का सुनियोजित प्रयास किया है।

जमीन के इस बड़े खेल में सिर्फ अवैध कब्जे की ही कहानी नहीं है, बल्कि इसमें बेहद संगीन स्तर की जालसाजी और कूटरचना का भी समावेश है। पीड़ितों ने पुलिस प्रशासन को साक्ष्य सौंपते हुए आरोप लगाया कि 28 जून को पुलिस के समक्ष जो दस्तावेज ट्रस्ट की ओर से प्रस्तुत किए गए थे, उनमें एक दिवंगत अधिवक्ता और पीड़ित परिवार के सदस्य नितिन के कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए थे। इस फर्जीवाड़े का उद्देश्य सरकारी तंत्र को भ्रमित करना था। इससे भी अधिक शर्मनाक वाकया तब घटित हुआ जब पुश्तैनी मकान पर कब्जे का विरोध करने पहुंची एक पर्यटक महिला अधिकारी के साथ सरेआम दुर्व्यवहार किया गया और उनके साथ मारपीट की गई। पीड़ित परिवार ने सीधे तौर पर इस वीभत्स कृत्य में शामिल होने वाले आरोपियों के नामों का खुलासा करते हुए बताया कि अखिलेश जैन, राजीव जैन, दीपक जैन और कांता जैन ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर महिला अधिकारी पर हमला किया था।

📹 छीपीटोला जमीन विवाद: यहाँ देखें घटना का एक्सक्लूसिव वीडियो रपट

इस पूरी घटना के अकाट्य वीडियो साक्ष्य भी प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए हैं, परंतु राजनैतिक दबाव के चलते अब तक कोई प्रभावी विधिक कदम नहीं उठाया गया है। इस भू-माफिया सिंडिकेट के आतंक का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि इस पुश्तैनी विवाद के कारण 80 वर्षीय हृदय रोगी बुजुर्ग महिला राजकुमारी और उनके बच्चे आज अपने ही घर से बेघर होकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं। अपराधियों ने बुजुर्ग महिला की गंभीर चिकित्सीय स्थिति का भी लिहाज नहीं किया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर संपत्ति से बेदखल कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि ट्रस्ट के लोग कोर्ट के स्टे ऑर्डर को जानबूझकर छुपा रहे हैं और सत्ता के गलियारों में बैठे राजनीतिक रसूखदारों को झूठे तथ्य पेश कर गुमराह कर रहे हैं ताकि पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष कार्रवाई करने से रोका जा सके। राम नारायण शिवहरे के वंशजों ने जिला प्रशासन और आगरा पुलिस कमिश्नरेट से तत्काल हस्तक्षेप करने, दोषियों के विरुद्ध जालसाजी और कूटरचना (आईपीसी व बीएनएस की सुसंगत धाराओं) के तहत मुकदमा दर्ज कर उनकी पुश्तैनी संपत्ति का विधिक अधिकार बहाल कराने की मांग दोहराई है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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