अमेरिका-ईरान जंग की भीषण आग में झुलसा आगरा का 4,000 करोड़ का निर्यात: कच्चे माल की कीमतों और रिकॉर्ड तोड़ भाड़े से कराह उठे उद्यमी

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Agra Desk, 🌐 [tajnews.in] | Sunday, 19 July, 2026, 11:53:00 AM IST.

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tajnews.in | आगरा: अमेरिका और ईरान के मध्य छिड़े भीषण युद्ध की तपिश अब ताजनगरी के व्यापारिक गलियारों तक आ पहुंची है. इस अंतरराष्ट्रीय सैन्य टकराव के कारण आगरा का सबसे प्रतिष्ठित जूता, मार्बल हैंडीक्राफ्ट और कारपेट उद्योग पूरी तरह संकट के मुहाने पर आ गया है, जिससे लगभग 4,000 करोड़ रुपये का भारी निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. स्थानीय निर्यातकों का कहना है कि यदि यह वैश्विक महा-संकट शीघ्र समाप्त नहीं हुआ, तो शहर के सैकड़ों कारखाने हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे और हजारों कारीगर बेरोजगार हो जाएंगे. कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों और समुद्री माल भाड़े में हुई बेतहाशा वृद्धि ने ताजनगरी के उद्यमियों की कमर तोड़कर रख दी है.

HIGHLIGHTS
  1. चौतरफा मंदी: युद्ध के कारण सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों से आने वाले एक्सपोर्ट ऑर्डर 50 फीसदी तक घट गए हैं.
  2. कंटेनर भाड़ा हुआ पांच गुना: पहले 20 फीट का जो कंटेनर 80 हजार रुपये में बुक होता था, उसका किराया अब 4.50 लाख रुपये हो चुका है.
  3. कच्चा माल 40% महंगा: शू कंपोनेंट्स, रेजिन, कलर और केमिकल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 30 से 40 फीसदी तक बढ़ गई हैं.
  4. सप्लाई चेन ध्वस्त: समुद्री जलमार्ग ठप होने से जो शिपिंग पहले 7 से 10 दिन लेती थी, अब उसमें 45 से 60 दिनों का लंबा समय लग रहा है.

खाड़ी देशों से ऑर्डर्स बंद, मुनाफा तो दूर फैक्टरी का खर्च निकालना हुआ दूभर

आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (AFMEC) के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने उद्यमियों की पीड़ा साझा करते हुए बताया कि इस युद्ध की सबसे ज्यादा मार जूता निर्यात पर पड़ रही है. वैश्विक संकट के चलते खाड़ी देशों से नए ऑर्डर्स आने लगभग बंद हो गए हैं और फैक्ट्रियों को सुचारू रूप से चलाना नामुमकिन हो रहा है. भाड़ा और लागत बढ़ने से उद्यमी मुनाफा कमाने की बात तो दूर, कारखानों का दैनिक खर्च भी नहीं निकाल पा रहे हैं. बड़े पैमाने पर किए गए पूर्व के भुगतानों के अटक जाने से भारी वित्तीय संकट खड़ा हो गया है और जोखिम से बचने के लिए विदेशी खरीदार माल की डिलीवरी लेने से कतरा रहे हैं. एक तरफ जहां लॉजिस्टिक और इनपुट कॉस्ट रिकॉर्ड स्तर पर है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक बाजार में तैयार फुटवियर उत्पादों का मूल्य नहीं बढ़ पा रहा है.

आगरा सोल एंड शू कंपोनेंट एसोसिएशन के महासचिव अंबा प्रसाद गर्ग ने बताया कि जूता बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कंपोनेंट्स, रेजिन, कलर और केमिकल की कीमतों में अचानक 30 से 40 फीसदी की भारी उछाल आई है, क्योंकि इनमें से अधिकतर कंपोनेंट्स विदेशों से आयात किए जाते हैं. वहीं, प्रसिद्ध जूता निर्यातक आशीष जैन ने माल भाड़े को निर्यात की कमर तोड़ने वाली मुख्य वजह बताया. उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स का यह आलम है कि 40 फीट वाला कंटेनर जो पहले 1.40 लाख रुपये में मिलता था, वह अब 7 लाख रुपये की भारी भरकम राशि में बुक हो रहा है. खाड़ी देशों के लिए मोटी रकम चुकाने पर भी समय से कंटेनर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं और तैयार माल भारतीय बंदरगाहों पर ही सड़ रहा है.

सरकारी सहयोग न मिलने से निराशा, बंदी की कगार पर पहुंचे ताजनगरी के कई कारखाने

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन फुटवियर इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष उपेंद्र सिंह लवली ने गंभीर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि युद्ध के कारण हालात दिन-ब-दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं. ताजनगरी के कई लघु और मध्यम दर्जे के कारखाने पूरी तरह से बंदी की कगार पर आ पहुंचे हैं. सबसे निराशाजनक बात यह है कि इस गंभीर आर्थिक मंदी और संकट के दौर में सरकार या वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से निर्यातकों को कोई विशेष नीतिगत राहत या सब्सिडी का सहयोग नहीं मिल रहा है, जिससे उद्यमी बेहद परेशान हैं. खाड़ी देशों के लिए रवाना हुए कंटेनर भी बीच समुद्र में फंसे हुए हैं.

निर्यातकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप कर माल भाड़े को नियंत्रित करने के लिए शिपिंग कंपनियों के साथ बैठक नहीं की अथवा ड्यूटी रिफंड का कोई विशेष पैकेज घोषित नहीं किया, तो आगरा का यह पारंपरिक हस्तशिल्प और शू-उद्योग पूरी तरह से तबाह हो जाएगा, जिसका सीधा असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ना तय है.

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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