कागजों पर ‘कायाकल्प’ खेल: आगरा के सरकारी स्कूलों में बदहाली का कड़वा सच, कहीं बरामदे में कक्षाएं तो कहीं बिना शिक्षक के पढ़ रहे बच्चे

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Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Wednesday, 08 July, 2026, 04:15:20 PM IST.

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tajnews.in | आगरा: सरकारी स्कूलों को कॉन्वेंट और निजी शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने के बड़े-बड़े सरकारी दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर में संचालित महत्वाकांक्षी ‘कायाकल्प योजना’ की धज्जियां उड़ाती एक गंभीर रिपोर्ट सामने आई है, जहां कागजी दस्तावेजों में तो सब कुछ चकाचक नजर आ रहा है, लेकिन हकीकत में नौनिहाल बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। कई परिषदीय विद्यालयों में कमरों के गंभीर अभाव के चलते बच्चे तपती गर्मी और उमस के बीच खुले बरामदों में बैठकर ककहरा सीखने को मजबूर हैं, तो कहीं स्कूलों के शौचालय इस कदर बदहाल हो चुके हैं कि वहां जाना भी दूभर है। इसके अलावा, कई विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है, जिससे बच्चों के भविष्य पर अंधकार मंडरा रहा है।

HIGHLIGHTS
  1. कागजी कायाकल्प: आगरा के प्राथमिक और परिषदीय विद्यालयों में सरकारी दावों के उलट धरातल पर समस्याओं के चक्रव्यूह में फंसे मासूम बच्चे।
  2. शिक्षकों का अकाल: गोकुलपुरा के मनसा देवी स्कूल में 19 बच्चों पर एक भी शिक्षक तैनात नहीं, वहीं दूसरे स्कूल में 25 बच्चे महज एक महिला शिक्षक के भरोसे।
  3. बिल्डिंग तैयार फिर भी ताला: नाला कंसखार में नई इमारत बनने के बावजूद बुनियादी काम अधूरे, बच्चे किराए के तंग कमरों में पढ़ने को मजबूर।
  4. अधिकारियों का आश्वासन: बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ राकेश सिंह ने कहा, ‘जिन स्कूलों में कमियां मिली हैं, उनकी जांच कराकर मूलभूत सुविधाएं पूरी कराई जाएंगी।’

शहरी क्षेत्र के पांच प्रमुख परिषदीय विद्यालयों में की गई गहन पड़ताल के दौरान चौकाने वाली अव्यवस्था उजागर हुई है। एत्माद्दौला क्षेत्र में स्थित एक परिषदीय विद्यालय में भवन संकट इस कदर गहराया है कि पूरा स्कूल महज दो कमरों में सिमट कर रह गया है। इसके एक कमरे में स्कूल का प्रशासनिक कार्यालय संचालित होता है, जबकि दूसरे कमरे में बच्चों की कक्षाएं लगती हैं। भीषण गर्मी और उमस के दिनों में जगह कम पड़ने के कारण बच्चों को छोटे से बरामदे में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। स्कूल की शिक्षिका ने एक और व्यावहारिक प्रशासनिक समस्या की ओर इशारा करते हुए बताया कि विद्यालय के बिल्कुल समीप नगर निगम का कूड़ा डंपिंग पॉइंट और लाउडस्पीकर बजने के कारण दिनभर होने वाले शोर-शराबे से बच्चों की पढ़ाई और एकाग्रता पूरी तरह प्रभावित होती है।

दूसरी ओर, गोकुलपुरा क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। यहां स्थित एक परिषदीय विद्यालय में कुल 25 बच्चों का नामांकन है, लेकिन उनकी पढ़ाई-लिखाई और पूरे स्कूल के संचालन की जिम्मेदारी महज एक महिला शिक्षक के कंधों पर टिकी है। इस स्कूल की भौतिक स्थिति भी अत्यंत दयनीय पाई गई, जिससे सरकार के कायाकल्प दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसी क्षेत्र के मनसा देवी कन्या विद्यालय की स्थिति तो और भी बदतर है। यहां 19 छात्राओं का नामांकन होने के बावजूद लंबे समय से एक भी स्थाई शिक्षक की तैनाती नहीं की गई है। यह स्कूल पूरी तरह से शिक्षक विहीन है और छात्राओं की पढ़ाई केवल भगवान भरोसे और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के सहारे घिसट रही है। इसके साथ ही स्कूल का एकमात्र शौचालय पूरी तरह खंडहर और बदहाल अवस्था में पड़ा है, जिससे छात्राओं को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है।

सरकारी बजट के दुरुपयोग और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये का सबसे बड़ा नमूना नाला कंसखार स्थित परिषदीय विद्यालय में देखने को मिलता है। इस स्कूल के लिए सरकारी धन से एक नई और भव्य इमारत तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन आज तक इसके मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है। भवन का निर्माण तकनीकी रूप से अधूरा है; कमरों में फर्श का निर्माण नहीं हुआ है और बिजली व पानी जैसी अत्यंत अनिवार्य आवश्यकताओं का कोई कनेक्शन नहीं लिया गया है। इस लापरवाही के चलते बच्चे आज भी एक अन्य क्षेत्र कटरा नील में किराए के तंग कमरों में बैठकर पढ़ने को विवश हैं। इसी प्रकार कटरा नील के अपने परिषदीय विद्यालय के हालात भी बद से बदतर हैं। यह स्कूल भी एक ही छोटे से कमरे में संचालित हो रहा है, जहां न तो बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त टाट-पट्टी है और न ही रोशनी और हवा का कोई उचित प्रबंध किया गया है।

इस पूरे मामले में जब जिला शिक्षा प्रशासन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ राकेश सिंह ने इस कड़वी हकीकत को स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया। उन्होंने आधिकारिक तौर पर बयान जारी करते हुए कहा कि जिन-जिन परिषदीय विद्यालयों में भवनों की जर्जर स्थिति, शौचालय की बदहाली अथवा शिक्षकों की कमी की शिकायतें या रिपोर्ट सामने आई हैं, उनकी एक उच्च स्तरीय जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी चिन्हित स्कूलों में कायाकल्प योजना के तहत बजट आवंटित कर मूलभूत छात्र सुविधाएं अत्यंत शीघ्र पूरी कराई जाएंगी और शिक्षक विहीन विद्यालयों में अध्यापकों के समायोजन की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा, ताकि बच्चों की शिक्षा में कोई व्यवधान न आए।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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