पैलेट गन पर विवाद: क्या है यह हथियार, कब और किन परिस्थितियों में किया जा सकता है इसका इस्तेमाल?

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National Desk, 🌐 tajnews.in | Saturday, 25 July, 2026, 01:05:00 PM IST.

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tajnews.in | नई दिल्ली: दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर शुरू हुई बहस के बीच यह हथियार एक बार फिर चर्चा में है। प्रदर्शनकारियों की ओर से पैलेट गन से घायल होने के दावे किए गए हैं, जबकि दिल्ली पुलिस ने ऐसे आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि पैलेट गन क्या होती है, भारत में इसका उपयोग कब शुरू हुआ और भीड़ नियंत्रण के दौरान इसके इस्तेमाल से जुड़े नियम क्या हैं।

HIGHLIGHTS
  1. पैलेट गन पर विवाद: दिल्ली छात्र प्रदर्शन के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच दावों-प्रतिदावों से गर्माया माहौल।
  2. क्या है यह हथियार: फायर करने पर तेजी से बिखरते हैं दर्जनों धातु के छर्रे, दिशा पर नियंत्रण रखना होता है मुश्किल।
  3. 1992 से शुरुआत: आरएएफ के गठन के बाद बेल्जियम और इस्राइल से खरीद के बाद डीआरडीओ ने देश में शुरू किया निर्माण।
  4. कानूनी नियम: बीएनएसएस की धारा 148 और 149 के तहत केवल विषम परिस्थितियों एवं एसओपी के तहत ही बल प्रयोग की अनुमति।

क्या है पूरा मामला?
हालिया छात्र प्रदर्शन के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों को पैलेट गन के छर्रे लगे। वहीं, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि उसके पास पैलेट गन नहीं है और प्रदर्शन के दौरान इस प्रकार के किसी हथियार का इस्तेमाल नहीं किया गया।

क्या होती है पैलेट गन?
पैलेट गन ऐसा हथियार है, जिससे फायर करने पर बड़ी संख्या में छोटे-छोटे धातु के छर्रे निकलते हैं। ये छर्रे तेज गति से फैलते हैं और सीमित दूरी के बाद उनकी दिशा पर सटीक नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाता है। इसी कारण इसके इस्तेमाल और इससे होने वाली चोटों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

भारत में कब शुरू हुआ इस्तेमाल?
भारत में शुरुआत में पैलेट गन विदेशों से मंगाई गई थीं। वर्ष 1992 में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के गठन के बाद इस्राइल और बेल्जियम से इनकी खरीद की गई। बाद में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की सहायता से इनका निर्माण देश में भी शुरू हुआ और समय के साथ इनकी क्षमता में बदलाव किए गए।

एक बार में कितने छर्रे दागे जा सकते हैं?
मल्टी बैरल लॉन्चर में छह से आठ शेल लगाए जा सकते हैं। एक शेल से लगभग 30 छर्रे निकलते हैं। इस प्रकार कुछ ही क्षणों में बड़ी संख्या में पैलेट दागे जा सकते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनका उपयोग मुख्य रूप से रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) द्वारा किया जाता है।

सरकार ने क्या कदम उठाए?
पैलेट गन से होने वाली गंभीर चोटों को लेकर उठी चिंताओं के बाद केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी। समिति को कम घातक विकल्पों की तलाश करने का दायित्व सौंपा गया। इसके बाद भीड़ नियंत्रण के लिए पीएवीए (चिली) शेल, स्टन-लैक शेल, टियर स्मोक शेल और अन्य कम घातक साधनों के उपयोग पर भी जोर दिया गया।

क्या सीधे पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा सकता है?
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पैलेट गन का इस्तेमाल केवल गंभीर कानून-व्यवस्था की परिस्थितियों में और निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत किया जा सकता है। इसका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना होता है और बल का प्रयोग उतना ही किया जाना चाहिए, जितना स्थिति को संभालने के लिए आवश्यक हो। साथ ही नागरिकों और सुरक्षाबलों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।

सुरक्षाकर्मियों को दी जाती है विशेष ट्रेनिंग
कम घातक हथियारों के उपयोग के लिए सुरक्षाकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण में दंगा नियंत्रण, बल प्रयोग के नियम, हथियारों का सुरक्षित इस्तेमाल तथा व्यावहारिक अभ्यास शामिल होते हैं।

कानून क्या कहता है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 148 के तहत यदि कोई गैरकानूनी भीड़ सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बनती है और चेतावनी के बाद भी नहीं हटती, तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बल प्रयोग किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के निर्देश पर भीड़ में शामिल लोगों को हटाने या गिरफ्तार करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

यदि सामान्य पुलिस बल स्थिति नियंत्रित करने में सक्षम न हो, तो बीएनएसएस की धारा 149 के तहत जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट सशस्त्र बलों की सहायता ले सकता है। हालांकि, कानून यह भी स्पष्ट करता है कि बल का प्रयोग न्यूनतम आवश्यक स्तर तक ही सीमित रखा जाना चाहिए, ताकि लोगों और संपत्ति को कम से कम नुकसान पहुंचे।

भीड़ नियंत्रण के अन्य विकल्प
भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों के पास टियर गैस, पीएवीए (चिली) शेल, वाटर कैनन, रबर एवं प्लास्टिक की गोलियां, दंगारोधी सुरक्षा उपकरण और अन्य कम घातक साधनों का भी उपयोग किया जाता है। इनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और न्यूनतम आवश्यक बल प्रयोग के साथ स्थिति को नियंत्रित करना होता है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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