लाइसेंस निरस्त होने से आहत चिकित्सक ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान: अस्पताल निर्माण में खर्च कर चुके थे बड़ी रकम, सीएमओ कार्यालय के चक्कर काटने के बाद उठाया आत्मघाती कदम

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Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 13 July, 2026, 02:45:10 PM IST.

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tajnews.in | आगरा: महानगर के सिकंदरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गुरुद्वारा गुरु का ताल के समीप शनिवार की रात को एक हृदयविदारक और सनसनीखेज घटनाक्रम सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की लालफीताशाही और नए अस्पताल के पंजीकरण का विधिक लाइसेंस न मिलने से मानसिक रूप से टूट चुके एक वरिष्ठ चिकित्सक ने मालगाड़ी के आगे कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतक चिकित्सक की पहचान लटूरी सिंह यादव के रूप में हुई है, जिनकी कार रेलवे ट्रैक के पास सर्विस रोड पर खड़ी बरामद की गई है। इस दुखद और खौफनाक आत्मघाती कदम की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय पुलिस और आला अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए। पुलिस के प्राथमिक अनुसंधान के अनुसार, चिकित्सक काफी समय से नया हॉस्पिटल खोलने के प्रयासों में जुटे थे, परंतु पंजीकरण की विधिक प्रक्रिया में लगातार अड़चनें आने के कारण वे गहरे अवसाद और मानसिक तनाव से गुजर रहे थे, जिसके चलते उन्होंने यह अतिवादी कदम उठाया।

HIGHLIGHTS
  1. खौफनाक आत्मघाती कदम: गुरुद्वारा गुरु का ताल के सामने मालगाड़ी की चपेट में आने से वरिष्ठ चिकित्सक लटूरी सिंह यादव की दर्दनाक मौत।
  2. लाइसेंस निरस्त होने का झटका: छह महीने से चल रही थी नए अस्पताल की तैयारी, सीएमओ (CMO) कार्यालय से पंजीकरण खारिज होने के बाद अवसाद में थे चिकित्सक।
  3. लाखों रुपये हुए थे खर्च: कमला नगर में किराए के भवन के बाद ‘साईं कृपा’ के नाम से खुद का नया अस्पताल स्थापित करने में झोंकी थी बड़ी पूंजी।
  4. प्रशासनिक रुख: डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने की घटना की पुष्टि, सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने दिए विधिक फाइल खंगालने के निर्देश।

प्राप्त आधिकारिक विवरण और पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, मूल रूप से जनपद फिरोजाबाद के थाना पचोखरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नगला ढाक निवासी लटूरी सिंह यादव (52) ताजनगरी के आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर सात में अपने पूरे परिवार सहित विधिक रूप से निवास कर रहे थे। उनका बेटा मयंक भी मेडिकल की उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहा है। लटूरी सिंह यादव काफी समय से कमला नगर क्षेत्र में एक किराये के भवन में सफलतापूर्वक चिकित्सालय का संचालन कर रहे थे, परंतु वे कमला नगर में ही स्थायी रूप से ‘साईं कृपा’ के नाम से एक सर्वसुविधायुक्त नया निजी चिकित्सालय स्थापित करने की तैयारियों में जुटे थे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर पिछले छह महीनों से धरातल पर काम चल रहा था, जिसमें उन्होंने अपनी जीवनभर की गाढ़ी और कड़ी कमाई की एक बहुत बड़ी रकम निवेश कर दी थी।

नए अस्पताल को विधिक रूप से शुरू करने के लिए उन्होंने मुख्य स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण प्रमाण पत्र हासिल करने हेतु बकायदा ऑनलाइन आवेदन कर रखा था। परिवार के ही डॉ. बृजेश यादव ने रोते हुए बताया कि पंजीकरण के लिए सभी विधिक मानक पूरे करने और निरंतर मुख्य कार्यालय के चक्कर काटने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा उन्हें पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा था। तीन दिन पूर्व जब लटूरी सिंह यादव बेहद उम्मीद के साथ मुख्य सीएमओ कार्यालय गए, तो वहां के विधिक पटल पर उन्हें सूचित किया गया कि तकनीकी कमियों का हवाला देकर उनका मुख्य आवेदन पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया है और इस क्षेत्र में नया पंजीकरण किया जाना संभव नहीं है। अस्पताल के निर्माण में अपनी बड़ी आर्थिक पूंजी खर्च कर चुकने के कारण वे इस अचानक लगे झटके को बर्दाश्त नहीं कर पाए और गहरे मानसिक तनाव के गर्त में डूब गए। शनिवार की सुबह करीब 11:00 बजे वे साइट पर जाने की बात कहकर घर से निकले थे, और शाम को करीब 7:30 बजे परिजनों से फोन पर आखिरी बार घर आने की बात कही थी।

पूरे मामले की विधिक और तकनीकी मॉनिटरिंग कर रहे डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि शनिवार की रात लगभग 9:00 बजे स्थानीय पुलिस को रेलवे लोको पायलट के माध्यम से कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि गुरुद्वारा गुरु का ताल के ठीक सामने अप रेलवे ट्रैक पर एक व्यक्ति का क्षत-विक्षत शव पड़ा हुआ है, जिसकी मौत मालगाड़ी की चपेट में आने से हुई है। जब पुलिस टीम शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम गृह भेजने की विधिक तैयारी कर रही थी, तभी तलाश करते हुए पीड़ित परिजन भी वहां पहुँच गए और उन्होंने मृतक के कपड़ों व सर्विस रोड पर लावारिस खड़ी मिली कार के आधार पर उनकी पहचान लटूरी सिंह यादव के रूप में की। पुलिस की जांच में यह दुखद तथ्य भी सामने आया कि चिकित्सक ने कार को लॉक कर चाबी भीतर ही छोड़ दी थी और सीधे ट्रैक की ओर चले गए थे। मृतक चिकित्सक के भाई नरेंद्र ने बताया कि उन्होंने विभाग के कड़े नियमों और अड़चनों के कारण अत्यधिक परेशान होकर यह आत्मघाती कदम उठाया है। रविवार दोपहर को पोस्टमार्टम की विधिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद रोते-बिलखते परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए पैतृक गांव नगला ढाक ले गए।

इस सनसनीखेज और दुखद घटनाक्रम के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने अपना विधिक वर्जन जारी करते हुए बेहद संवेदनशील बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश शासन के वर्तमान कड़े नीतिगत निर्देशों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में नए निजी अस्पतालों के लाइसेंस और पंजीकरण जारी करने पर आंशिक रोक लगी हुई है। फिर भी, इस जघन्य और दुखद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग से संबंधित पटल की मुख्य फाइल को तत्काल तलब किया जाएगा। प्रशासन इस बात की गहन और विधिक पड़ताल कराएगा कि आखिरकार किस तकनीकी आधार पर चिकित्सक का आवेदन पत्र निरस्त किया गया था और क्या इसमें किसी स्तर पर विभागीय कोताही या लापरवाही की गई थी।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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