Crime Desk, 🌐 tajnews.in | Tuesday, 21 July, 2026, 08:50:00 AM IST.

tajnews.in | मेरठ: पराये प्यार की अंधी चाहत और अवैध संबंधों में जब कोई अपनों ही के खिलाफ खौफनाक साजिश रचता है, तो उसके परिणाम अत्यंत भयावह और रूह कंपाने वाले होते हैं। मेरठ के चर्चित अतुल पंवार हत्याकांड ने एक बार फिर समाज के सामने उन आपराधिक कहानियों को उजागर किया है, जहां रिश्तों की मर्यादा तार-तार हो गई। चौधरी चरण सिंह जिला कारागार मेरठ की बैरक नंबर 12ए में इस समय छह ऐसी महिला बंदी कैद हैं, जिन्होंने अवैध संबंधों के रोड़े को हटाने के लिए अपने ही परिवार को मौत के घाट उतरवा दिया। इनमें से पांच महिलाएं अपने ही पति की हत्या की कसूरवार हैं, जबकि छठी महिला ने अपनी कोख से जन्मे सगे बेटे की हत्या का षड्यंत्र रचा था। भोर होते ही जहां सुंदरकांड के पाठ और भजनों से बैरक गूंज उठती है, वहीं ये महिलाएं अपने किए के अपराधबोध से लगातार जूझती नजर आती हैं।

सुबह भक्ति का सहारा, दिन भर सिलाई-कढ़ाई और आत्मग्लानि
मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार की बैरक नंबर 12ए का दृश्य हर सुबह बाकी बैरकों से कुछ अलग और गमगीन होता है। भोर की पहली किरण फूटते ही यहां सुंदरकांड के पाठ के साथ भजन-कीर्तन की गूंज सुनाई देने लगती है। हर सुबह भक्ति के सहारे ये महिलाएं अपने भीतर गहरे बसे अपराधबोध और पश्चाताप से जूझती नजर आती हैं। मेरठ जेल में कुल 67 महिला बंदी हैं, जो बैरक 12ए और 12बी में रखी गई हैं। बैरक 12ए में बंद इन महिलाओं में अपने ही स्कूल संचालक पति को सपेरे के जरिए सांप से डसवाकर मरवाने वाली प्रिंसिपल दामिनी, नीले ड्रम में शव छिपाने के बहुचर्चित मामले की आरोपी मुस्कान रस्तोगी, और अपने परिजनों के कत्ल के आरोप में घिरीं अंजलि, रविता, कोमल व गुरप्रीत कौर शामिल हैं।
जेल प्रशासन के अनुसार, प्रिंसिपल दामिनी किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करती और लगातार गुमसुम रहती है, जिसके लिए उसकी विशेष काउंसलिंग की तैयारी की जा रही है। वहीं, नीले ड्रम कांड वाली मुस्कान रस्तोगी अपनी मासूम बेटी के साथ दिन गुजारती है और सुंदरकांड के पाठ के बाद बेटी की देखभाल में व्यस्त हो जाती है। अन्य बंदी महिलाएं अंजलि, गुरप्रीत कौर, रविता और कोमल जेल में चलाई जा रही सिलाई-कढ़ाई गतिविधियों में खुद को व्यस्त रखकर मन को भटकाने की कोशिश करती हैं। जब कभी इनके परिवार वाले जेल में मुलाकात करने आते हैं, तो इनका भावनात्मक संतुलन पूरी तरह टूट जाता है और ये फफक-फफक कर रो पड़ती हैं।
जेल प्रशासन का मानवीय दृष्टिकोण और काउंसलिंग
आपसी बातचीत में ये महिलाएं अक्सर एक-दूसरे के सामने अपना दर्द बयां करती हैं कि “मति मारी गई थी, जो खुद ही अपनी हंसती-खेलती गृहस्थी अपने हाथों उजाड़ ली।” इस संबंध में जानकारी देते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि इन सभी महिलाओं को एक ही बैरक में एक साथ रखने के पीछे मुख्य उद्देश्य यही है कि वे मानसिक तनाव और भारी अवसाद के क्षणों में एक-दूसरे को संभाल सकें और एक-दूसरे का सहारा बन सकें। उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकांश महिलाओं को अपने किए गए अपराधों पर भारी पछतावा है।
जेल प्रशासन की ओर से इन महिला बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नियमित रूप से धार्मिक पाठ, सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की व्यवस्था की जा रही है। पराये संबंधों के क्षणिक मोह में अपने ही सुहाग और परिवार का सौदा करने वाली इन महिलाओं की कहानी आज पूरे समाज के लिए एक खौफनाक और विचारणीय चेतावनी बन चुकी है, जहां एक गलत कदम ने कई जिंदगियों को सलाखों के पीछे हमेशा-हमेशा के लिए अंधकार में धकेल दिया।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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