राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक आज: चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला, चढ़ावा चोरी समेत एजेंडे में और क्या?

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uttar pradesh desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 06 July, 2026, 08:04:15 AM IST.

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tajnews.in | अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि परिसर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे की हेराफेरी और महाघोटाले की चल रही उच्च स्तरीय जांच के बीच आज अयोध्या नगरी में एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ आने वाला है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सोमवार यानी आज एक बेहद आपातकालीन और ऐतिहासिक बैठक करने जा रहा है। यह बैठक ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के पावन मठ ‘मणि राम छावनी’ में आयोजित की जाएगी। प्रशासनिक और धार्मिक हलकों से आ रही खबरों के मुताबिक, इस महाबैठक का मुख्य एजेंडा मंदिर के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ ट्रस्टी अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफों पर अंतिम और निर्णायक फैसला लेना है। रामधन चोरी के इस बड़े विवाद से नाम जुड़ने के बाद दोनों शीर्ष पदाधिकारियों ने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया था। आज की बैठक में यदि इनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो राम मंदिर के संपूर्ण प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह से बदलने और नए कलेवर में ढालने पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

HIGHLIGHTS
  1. निर्णायक महाबैठक: चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर आज ‘मणि राम छावनी’ में ट्रस्ट की बैठक में होगा अंतिम फैसला।
  2. शीर्ष नौकरशाह शामिल: बैठक में गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रशांत लोखंडे, नृपेंद्र मिश्रा और अयोध्या के डीएम शशांक त्रिपाठी मौजूद रहेंगे।
  3. SIT की रिपोर्ट: करोड़ों के गबन की जांच कर रही विशेष जांच दल की शुरुआती रिपोर्ट और नए सीईओ की नियुक्ति पर होगी अहम चर्चा।
  4. वित्तीय लेखा-जोखा: वित्तीय वर्ष 2025-26 के बिना ऑडिट वाले आय-व्यय के विवरण तथा बैलेंस शीट को मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

अयोध्या के इस सबसे बड़े वित्तीय संकट के समय बुलाई गई इस बैठक का संचालन ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी कर रहे हैं, जिन्होंने सभी नियमित, पदेन और विशेष आमंत्रित सदस्यों को विचार-विमर्श के लिए आमंत्रित किया है। इस बैठक की संवेदनशीलता को देखते हुए देश के कई शीर्ष नौकरशाह और पदेन सदस्य भी शारीरिक व डिजिटल माध्यम से सम्मिलित हो रहे हैं। पदेन सदस्यों में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रशांत लोखंडे, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय प्रसाद, अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा प्रमुखता से शामिल हैं। इसके साथ ही, अस्वस्थ चल रहे अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के भी बैठक में उपस्थित रहने की संभावना है, जबकि वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राष्ट्रीय राजधानी से सीधे संवाद करेंगे। बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव की भविष्य की भूमिका को लेकर भी तीखी बहस होने के आसार हैं।

प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ इस बैठक में कानूनी और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। चढ़ावा चोरी के इस संगीन मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट के मुख्य अंशों को भी आज ट्रस्ट के सदस्यों के सम्मुख रखा जा सकता है, जिससे यह साफ होगा कि गबन की जड़ें कहाँ तक फैली हैं। इसके अतिरिक्त, राम मंदिर के भविष्य के दैनिक प्रबंधन को पूरी तरह से व्यावसायिक बनाने के उद्देश्य से एक नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति पर भी सहमति बन सकती है। बैठक के वित्तीय एजेंडे में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बिना ऑडिट वाला आय और खर्च का संपूर्ण आधिकारिक विवरण पेश किया जाएगा, जिसके साथ ही बैलेंस शीट और अन्य गुप्त वित्तीय जानकारियों को विधिक मंजूरी के लिए पटल पर रखा जाएगा।

वर्तमान में ट्रस्ट की आंतरिक संरचना काफी कमजोर दिखाई दे रही है। ट्रस्ट में कुल 11 नियमित सदस्य हैं, जिनमें अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की भूमिका सबसे मुख्य है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे तथा बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के असामयिक निधन के बाद वर्तमान में ट्रस्ट में उपाध्यक्ष का पद भी रिक्त चल रहा है। ज्ञात हो कि कथित गबन के मामलों की दो समानांतर उच्च स्तरीय जांचें गतिमान हैं। एसआईटी और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव के विस्तृत बयान दर्ज कर लिए हैं, हालांकि विधिक रूप से अभी तक उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं हुई है।

इस पूरे संकट की पटकठा बीते जून महीने में लिखी गई थी। गत 26 जून को चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा सौंप दिया था, जिसकी आधिकारिक पुष्टि 27 जून को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने की थी। ६ जून को चढ़ावा चोरी का यह वीभत्स मामला पहली बार सार्वजनिक रूप से उजागर हुआ था, जिसके बाद देश भर में मचे आक्रोश को देखते हुए ट्रस्ट की लिखित मांग पर 13 जून को सूबे की सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। इसके पश्चात, 25 जून को एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आठ मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया था। चूंकि संपूर्ण राम मंदिर परिसर में चढ़ावे की गणना (कैश काउंटिंग) और मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधन की सीधी जिम्मेदारी चंपत राय और अनिल मिश्रा के पास ही थी, इसलिए वे शुरू से ही सुरक्षा एजेंसियों और श्रद्धालुओं के तीखे सवालों के घेरे में रहे। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, आज की इस महाबैठक में निर्णय लेने से पूर्व इन दोनों शीर्ष पदाधिकारियों को अपना पक्ष और बेगुनाही के साक्ष्य रखने का अंतिम विधिक अवसर दिया जाएगा, जिसके बाद सामूहिक सहमति से ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित होगा।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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