uttar pradesh desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 06 July, 2026, 08:44:10 AM IST.

tajnews.in | अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि परिसर में श्रद्धालुओं के आस्था रूपी चढ़ावे की चोरी से जुड़े देश के सबसे बड़े वित्तीय महाघोटाले में बंदियों से हुई पूछताछ के बाद एक अत्यंत विस्फोटक और सनसनीखेज सच सामने आया है। जिला कारागार में बंद मुख्य आरोपियों ने पुलिसिया तफ्तीश के सामने घुटने टेकते हुए यह स्वीकार किया है कि राम मंदिर परिसर में दान राशि उड़ाने का यह खूनी खेल कई महीनों से अनवरत चल रहा था। आरोपियों ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि कुछ महीने पहले ही उनके इस कुकृत्य पर मंदिर प्रबंधन को गहरा शक हो गया था और दान की राशि लगातार कम होने की लिखित शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। उस वक्त सभी आरोपियों को अपनी विधिक गिरफ्तारी का पूरा भय सताने लगा था, परंतु तभी ट्रस्ट के बेहद कद्दावर और बड़े पदाधिकारियों ने अभयदान देते हुए उनका सीधा बचाव कर लिया। इसी उच्च स्तरीय संरक्षण के कारण वे विधिक शिकंजे से बच निकले और दोगुनी रफ्तार से प्रभु के खजाने को पार करने की साजिशों में जुटे रहे।
पूरे घटनाक्रम की विधिक कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस प्रशासन ने शनिवार को स्थानीय अदालत के समक्ष जेल में निरुद्ध पांच मुख्य आरोपियों के बयान दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। न्यायालय से वैधानिक हरी झंडी मिलने के तुरंत बाद रविवार को केस के मुख्य विवेचक और सर्विलांस टीम के आला पुलिसकर्मी जिला कारागार पहुंचे। पुलिस टीम ने वहां बंद मुख्य आरोपी टिन्नू यादव उर्फ रामशंकर यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश, मनीष और रमाशंकर को आमने-सामने बिठाकर कई घंटों तक कड़ी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने उस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया जो मंदिर के भीतर सक्रिय था। उन्होंने बताया कि कुछ समय पूर्व किसी सजग व्यक्ति ने लिखित शिकायत भेजी थी कि दानपात्रों से नगदी निकालते और उसकी गिनती (कैश काउंटिंग) करते समय लाखों रुपये की हेराफेरी की जा रही है।
आरोपियों ने बताया कि इस चोरी की पुख्ता जानकारी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा तक पूरी तरह पहुँच चुकी थी। उस दौरान मंदिर के कुछ अन्य ईमानदार कर्मचारियों ने उनसे कड़ाई से पूछताछ भी की थी और तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए इन सभी संदेहास्पद लोगों को गणना के कार्य से तत्काल प्रभाव से हटाने की पुरजोर सिफारिश की गई थी। परंतु, ट्रस्ट के शीर्ष प्रशासनिक तंत्र यानी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने इस पूरे मामले पर पर्दा डालते हुए आरोपियों का खुला बचाव किया। चूँकि ये सभी मुलाजिम ट्रस्ट के इन आला पदाधिकारियों के अत्यंत करीबी और भरोसेमंद माने जाते थे, इसलिए सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी कभी भी इनकी तलाशी लेने का दुस्साहस नहीं करते थे और न ही कभी इनके कमरों की चेकिंग होती थी। इसी असीमित छूट का फायदा उठाकर वे प्रतिदिन भारी भरकम नगदी को कपड़ों में छिपाकर मुख्य परिसर से बाहर ले जाते थे और बाद में उसका आपस में बंटवारा करते थे।
पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी टिन्नू यादव ने कानूनी शिकंजे से बचने के लिए एक नया पैंतरा चलते हुए सारा दोष अनिल मिश्रा के सिर मढ़ने का प्रयास किया। टिन्नू ने स्वयं को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए कहा कि उसके पास केवल भौतिक देखरेख और कमरों की चाबी रखने की सीमित जिम्मेदारी थी, जबकि दान राशि की वास्तविक गणना कराने से लेकर उसे अधिकृत बैंक खातों में जमा कराने की मुख्य प्रशासनिक और विधिक भूमिका अनिल मिश्रा की ही हुआ करती थी। इस दौरान आरोपी चतुराई से चंपत राय के बचाव में लगा रहा और अनिल मिश्रा पर ही सारे गंभीर आरोप थोपता रहा। इस बीच, मंदिर की पारदर्शिता पर उठ रहे चौतरफा सवालों के मध्य ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने एक विस्तृत सफाई जारी कर इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है। गोविंद देव गिरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे मंदिर के दैनिक वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग प्रबंधन और कैश काउंटिंग की प्रक्रिया से पूरी तरह दूर रहते हैं और अमूमन पुणे में ही निवास करते हैं, जबकि गणना का यह कार्य अयोध्या में रोजाना संपादित होता है।
गोविंद देव गिरी ने अपनी इस लिखित सफाई में बिना नाम लिए सीधे तौर पर चंपत राय और अनिल मिश्रा की संपूर्ण कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर से होने वाले किसी भी बड़े वित्तीय खर्च या बैंक खातों के संचालन हेतु वे हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत ही नहीं हैं और न ही उनके पास ट्रस्ट की कोई चेकबुक रहती है। उन्होंने कहा कि दैनिक गणना के लिए एक निश्चित एसओपी (SOP) निर्धारित है, जिसकी देखरेख और क्रियान्वयन की सीधी जिम्मेदारी बैंक के अधिकारियों तथा स्थानीय स्तर पर मौजूद ट्रस्टियों की होती है। कोषाध्यक्ष के इस बयान और इससे पूर्व ट्रस्ट के सम्मानित सदस्य महंत नृत्यगोपाल दास द्वारा उठाए गए तीखे सवालों से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि इस महाघोटाले की गूंज और आपसी खींचतान अब ट्रस्ट के भीतर भी चरम पर पहुँच चुकी है, जिससे मंदिर के कुप्रबंधन की पोल खुल गई है।
इस बड़े विवाद के समांतर चल रहे एक अन्य संवेदनशील मामले में ट्रस्ट ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव व सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लक्ष्मीनारायण द्वारा सोशल मीडिया पर अपनी श्रद्धा रूपी ५ करोड़ की लागत से निर्मित एक किलोग्राम सोने से युक्त पवित्र श्रीरामचरितमानस (रामायण) के गायब होने की आशंका जताए जाने के बाद रविवार को राम मंदिर निर्माण सहायक गोपाल राव ने आधिकारिक वक्तव्य जारी किया। गोपाल राव ने स्पष्ट किया कि पूर्व आईएएस अधिकारी द्वारा भेंट की गई यह अमूल्य और स्वर्णयुक्त रामायण पूर्णतः सुरक्षित है और उसे मंदिर की अति सुरक्षित आभूषण कोठरी में राजकीय संरक्षण में रखा गया है। उन्होंने बताया कि दानदाता की अंतिम इच्छा के अनुरूप इस दिव्य ग्रंथ को सर्वप्रथम प्रभु श्रीरामलला के मुख्य गर्भगृह के सम्मुख संपूर्ण धार्मिक सम्मान के साथ प्रदर्शित किया गया था, जिसके बाद इसे सुरक्षित अभिरक्षा में भेज दिया गया। यद्यपि ट्रस्ट ने इस मूल्यवान धरोहर को सुरक्षित बताया है, परंतु एसबीआई बैंक की अयोध्या धाम शाखा द्वारा इतनी बड़ी नगदी को रखने में बरती गई भारी लापरवाही और आरोपियों व स्थानीय नेताओं के संदिग्ध कनेक्शनों को लेकर पुलिस की जांच का पहिया अब और तेज हो गया है।
यह भी पढ़ें

Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
7579990777




