Agra Desk, 🌐 [tajnews.in] | Sunday, 19 July, 2026, 01:41:00 PM IST.

tajnews.in | आगरा: ताजनगरी में पानी को सहेजने के तमाम दावों और जल संरक्षण की बड़ी योजनाओं के बावजूद भूजल स्तर का संकट गहराता जा रहा है. भूगर्भ जल विभाग की प्री-मानसून जांच रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शहर से लेकर देहात तक पानी के बेतहाशा दोहन के कारण भूजल स्तर में बीते साल के मुकाबले दो मीटर तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है. यह भयावह स्थिति तब है जब शहरी क्षेत्र के हजारों घरों को गंगाजल योजना से जोड़ने का दावा किया जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में अमृत सरोवरों व स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं. जल स्तर में आ रही यह लगातार गिरावट आगामी दिनों में आगरा के लिए बड़े पेयजल संकट का अलार्म बजा रही है.
शहर से देहात तक नीचे गया पानी का ग्राफ, देखें प्रमुख स्थलों के तुलनात्मक आंकड़े
भूगर्भ जल विभाग के सीनियर जियोफिजिस्ट शशांक सिंह के अनुसार, प्री-मानसून के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं. शहर के पुराने और घने इलाकों जैसे नुनिहाई, आगरा कॉलेज और आरबीएस कॉलेज में पानी का दोहन सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है. हालांकि, कमला नगर, फतेहाबाद रोड, ग्वालियर रोड और बिचपुरी रोड की ओर उन चुनिंदा जगहों पर जलस्तर में कुछ आंशिक सुधार देखा गया है जहां विभाग ने खुद सक्रिय रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए हैं, लेकिन अधिकांश शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है.
प्री-मानसून रिपोर्ट (2025 बनाम 2026) के तहत भूजल स्तर की वास्तविक स्थिति (मीटर में):
| शहरी क्षेत्र (जगह) | वर्ष 2025 | वर्ष 2026 | ग्रामीण क्षेत्र (ब्लॉक) | वर्ष 2025 | वर्ष 2026 |
|---|---|---|---|---|---|
| आगरा कॉलेज | 17.37 | 19.35 | बाह | 34.81 | 34.92 |
| अंबेडकर विवि | 29.94 | 30.55 | सीकरी | 12.75 | 13.10 |
| बेसिक साइंस खंदारी | 29.55 | 31.05 | पिनाहट | 35.48 | 35.53 |
| प्रा. वि. ककरैठा | 24.93 | 25.40 | सैयां | 34.06 | 34.32 |
| पीडब्ल्यूडी कॉलोनी | 22.00 | 23.20 | बिचपुरी | 28.04 | 28.05 |
करोड़ों फूंकने के बाद भी ढाक के तीन पात, स्कूलों में बिना पाइप और गड्ढों के लगीं मशीनें
इस जल संकट को लेकर सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष शिरोमणि सिंह ने नगर प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने बताया कि दो साल पहले शहर के प्राथमिक विद्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उनमें से एक भी सिस्टम आज कारगर साबित नहीं हो रहा है. जिन 2700 से ज्यादा स्कूलों में कागजों पर हार्वेस्टिंग चालू दिखाई गई है, वहां हकीकत में छत से नीचे तक पानी उतारने के लिए पाइप ही नहीं लगे हैं और न ही जमीन के भीतर कोई सोख्ता गड्ढा खोदा गया है.
नियमों के अनुसार, आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) द्वारा हर नई व्यावसायिक इमारत का नक्शा पास करते समय रेन वाटर हार्वेस्टिंग की कड़ा शर्त रखी जाती है. परंतु व्यावहारिक स्तर पर बिल्डरों द्वारा यह केवल नक्शा पास कराने की औपचारिकता मात्र बनकर रह गई है. इमारतों में लगे ये सिस्टम रखरखाव के अभाव में पहले ही साल चोक होकर पूरी तरह बंद हो जाते हैं, जिससे बारिश का अमूल्य पानी पाताल तक पहुंचने के बजाय बहकर नालियों में बर्बाद हो जाता है. यदि इस लापरवाही को तुरंत नहीं रोका गया, तो गहरे बोरिंग फेल होने लगेंगे, जिससे न केवल पीने के पानी की किल्लत होगी बल्कि सबमर्सिबल चलाने के लिए डीजल व बिजली की खपत बढ़ेगी और देहात में सिंचाई न होने से फसलें पूरी तरह तबाह हो जाएंगी.
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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