Agra Desk, 🌐 [tajnews.in] | Saturday, 18 July, 2026, 02:45:00 PM IST.

tajnews.in | आगरा: ताजनगरी के थाना खेरागढ़ पुलिस ने तकरीबन 27 वर्षों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे 50 हजार रुपये के एक खूंखार और इनामी भगोड़े बदमाश को दबोचने में विधिक सफलता हासिल की है। दो जांबाज पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या कर खुद को कागजों में मृत घोषित करवा चुके इस शातिर अपराधी का राज एक बकरीद की दावत और उसके बाद हुई शराब पार्टी से खुला। नाम और मजहब बदलकर मध्य प्रदेश में ट्रक ड्राइवर की जिंदगी बसर कर रहे इस अपराधी को पुलिस ने कड़े विन्यास के तहत बुने जाल में फंसाकर रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इस बड़ी कामयाबी के बाद आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने राहत की सांस ली है।
31 दिसंबर 1999 की वो खौफनाक रात, अलाव तापने के बहाने रची थी खूनी साजिश
आगरा पुलिस मुख्यालय से प्राप्त आधिकारिक और विधिक विवरण के अनुसार, पकड़ा गया शातिर आरोपी भूरा उस दौर के बेहद कुख्यात रमेश कुशवाह गैंग का एक बेहद सक्रिय और खतरनाक सदस्य था। यह गिरोह समूचे चंबल और सीमावर्ती इलाकों में डकैती, जबरन रंगदारी, अपहरण और हत्या जैसी जघन्य वारदातों को अंजाम देने के लिए विख्यात था। साल 1999 के दिसंबर माह में पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस गैंग के अवैध हथियारों का एक बड़ा जखीरा जब्त कर लिया था। इसी जब्ती का बदला लेने और दोबारा आधुनिक हथियार हासिल करने के विन्यास के तहत गिरोह ने पुलिस गश्ती दल पर ही हमले की योजना तैयार की। 31 दिसंबर 1999 की बर्फीली रात को भूरा एक जीप में गैंग लीडर रमेश और अपने आठ अन्य खूंखार साथियों के साथ सवार होकर खेरागढ़ इलाके में निकला।
खेरागढ़ चौराहे पर मुस्तैदी से गश्त कर रहे तीन पुलिसकर्मी भीषण ठंड से बचने के लिए एक स्थान पर अलाव ताप रहे थे। शातिर भूरा और उसके साथी भी बेहद सामान्य बनकर अलाव तापने के बहाने उन पुलिसकर्मियों के पास जाकर बैठ गए। जैसे ही जवानों का ध्यान भटका, अपराधियों ने अपने पास छिपे अवैध तमंचों से तीनों पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। इस बर्बर हमले में कांस्टेबल कमल सिंह की मौके पर ही तड़पकर मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल कांस्टेबल चरन सिंह ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद समूचे उत्तर प्रदेश में हड़कंप मच गया था। पुलिस ने बाद में कड़ी कार्रवाई करते हुए भिंड में हुई एक मुठभेड़ में गैंग लीडर रमेश कुशवाह को और जालौन में नरेंद्र को मार गिराया था, जबकि पांच अन्य बदमाशों को गिरफ्तार कर कोर्ट से आजीवन कारावास की विधिक सजा दिलवाई थी, लेकिन भूरा तब से लगातार फरार चल रहा था।
पहचान बदलकर बना जमील, शराब के नशे में जीजा ने उगला कड़वा सच
विधिक कस्टडी से बचने के लिए भूरा लगातार अपने छिपने के ठिकाने बदलता रहा। वह शुरुआत में जंगलों के रास्ते भागा और दो महीने तक इटारसी रेलवे स्टेशन के पास मजदूरी की। इसके बाद उसने भोपाल में रहकर भवन निर्माण के कार्यों में हाथ आजमाया और धीरे-धीरे भारी वाहनों का ट्रक ड्राइवर बन गया। कानूनी विन्यास को पूरी तरह चकमा देने के उद्देश्य से जैतपुर निवासी भूरा पुत्र साबू ने बहुत ही शातिर तरीके से खुद को पैतृक रिकॉर्ड में मृत घोषित करवा दिया। उसने मध्य प्रदेश की नागरिकता के फर्जी कागजात बनवाकर अपना नया नाम जमील पुत्र फारुख रख लिया और लगातार लंबी दूरी के ट्रक चलाने लगा ताकि कभी स्थानीय पुलिस की नजरों में न आ सके।
इस अभेद्य रहस्य का पर्दाफाश तब हुआ, जब हाल ही में इस केस में उम्रकैद की सजा काटकर जेल से रिहा हुए भूरा के एक पुराने साथी की मुलाकात बकरीद की एक सामाजिक दावत में भूरा के सगे जीजा से हुई। दावत के बाद सजी एक गोपनीय शराब पार्टी के दौरान अत्यधिक नशे में जीजा ने अनजाने में यह राज उगल दिया कि भूरा मरा नहीं है, बल्कि दो वर्ष पूर्व ही उसकी भूरा से लंबी बातचीत हुई थी और वह पूरी तरह सुरक्षित है। यह खुफिया इनपुट जैसे ही खेरागढ़ थाना प्रभारी हरीश कुमार के कानों तक पहुंचा, उन्होंने बिना कोई वक्त गंवाए एक विशेष सर्विलांस टीम का विन्यास तैयार कर जाल बिछा दिया।
पुलिस ने विधिक दबिश देकर जब आरोपी को पकड़ा, तो वह शुरुआत में खुद को जमील बताते हुए पुलिस टीम को लगातार गुमराह करता रहा। परंतु, जब साइबर सेल और जांच अधिकारियों ने विधिक कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने टूटकर अपना 27 साल पुराना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस उपायुक्त पश्चिम (DCP West) आदित्य कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि हत्यारे भूरा को विधिक रूप से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है। पुलिस अब उसे कड़े रिमांड विन्यास पर लेकर उसके द्वारा छिपाई गई अन्य संपत्तियों और फर्जी दस्तावेजों के विधिक नेटवर्क की गहन तफ्तीश करेगी।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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