Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Friday, 10 July, 2026, 12:15:10 PM IST.

tajnews.in | आगरा: शहर के ऐतिहासिक कोठी मीना बाजार मैदान के स्वामित्व विवाद में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित कानूनी मोड़ सामने आया है। प्रयागराज हाई कोर्ट ने विवादित भूमि पर यथास्थिति के आदेश के बावजूद धड़ल्ले से चल रहे निर्माण कार्यों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने आदेश की खुली अवहेलना करने के गंभीर आरोप में जिलाधिकारी मनीष बंसल और गजानन सहकारी आवास समिति के सचिव दीपक गुप्ता के खिलाफ कारण बताओ अवमानना नोटिस जारी कर दिया है। न्यायमूर्ति विकास की एकल पीठ ने मामले की प्राथमिक सुनवाई के दौरान इसे प्रथम दृष्टया न्यायालय की गरिमा और आदेशों की खुली अवहेलना माना है। इस बड़े न्यायिक हड़कंप के बीच उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है, जिससे जिला प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है।
न्यायालय से प्राप्त आधिकारिक विधिक विवरण के अनुसार, यह पूरा मामला अवमानना याचिका सिविल संख्या 4111/2026 पर सुनवाई के दौरान सामने आया। इस याचिका को राजेंद्र सिंह और एक अन्य पक्षकार द्वारा पटल पर लाया गया है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता पीपी चौधरी ने अदालत के सम्मुख दलील पेश करते हुए बताया कि प्रथम अपील संख्या 309/2025 (उत्तर प्रदेश राज्य बनाम श्रीराम सिंह व अन्य) में प्रयागराज हाई कोर्ट ने पूर्व में ही 23 अप्रैल 2025 को संपत्ति की प्रकृति और उस पर भौतिक कब्जे को लेकर ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखने का स्पष्ट और कड़ा आदेश पारित किया था। इसके बावजूद, विपक्षी पक्षकारों और स्थानीय प्रशासन की साठगांठ से इस ऐतिहासिक मैदान की विवादित भूमि पर वर्तमान में एक विशाल पांच मंजिला अवैध निर्माण कार्य धड़ल्ले से कराया जा रहा है, जो सीधे तौर पर देश की सर्वोच्च न्यायिक व्यवस्था को चुनौती देना है। हालांकि, कोर्ट ने विपक्षी पक्षकारों को फिलहाल व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट प्रदान की है।
इस बहुचर्चित भूमि विवाद की जड़ें दशकों पुरानी हैं। याचिककर्ताओं का दावा है कि उन्होंने यह बेशकीमती भूमि निष्क्रांत संपत्ति (Evacuee Property) के रूप में भारत सरकार के पुनर्वास मंत्रालय द्वारा आयोजित एक आधिकारिक नीलामी के माध्यम से विधिक रूप से खरीदी थी, जिसका सेल सर्टिफिकेट भी उनके पक्ष में जारी किया गया था। इसके बाद मूल वाद संख्या 668/1987 में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 6 फरवरी 2025 को याचिकाकर्ताओं के पक्ष में एक मजबूत डिक्री पारित कर दी थी। इस निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में प्रथम अपील दायर की थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने संपत्ति की सुरक्षा के लिए यथास्थिति का अंतरिम आदेश दिया था। याचियों का आरोप है कि इस आदेश की आड़ में कलेक्ट्रेट प्रशासन ने जानबूझकर विवादित भूमि को व्यापारिक मेलों और प्रदर्शनियों के लिए आवंटित कर दिया, जिसके कारण वहां बड़े पैमाने पर अतिक्रमण फैल गया और अब पक्का अवैध निर्माण किया जा रहा है।
इस संवेदनशील न्यायिक मामले पर जब कलेक्ट्रेट और जिला प्रशासन का रुख जानने का प्रयास किया गया, तो जिलाधिकारी मनीष बंसल ने रक्षात्मक रुख अपनाते हुए स्थिति स्पष्ट की। जिलाधिकारी ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी करते हुए कहा कि कोठी मीना बाजार मैदान से जुड़े इस पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित समयसीमा के भीतर माननीय हाई कोर्ट के सम्मुख एक विस्तृत और तथ्यपरक जवाब (Counter Affidavit) दाखिल किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन और प्रशासन हमेशा न्यायपालिका के फैसलों का सर्वोच्च सम्मान करता है और माननीय न्यायालय द्वारा जो भी विधिक आदेश जारी किए जाएंगे, उनका अक्षरशः और कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। अब सभी की निगाहें 19 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां जिला प्रशासन को यह साबित करना होगा कि यथास्थिति के आदेश के बावजूद वहां निर्माण कार्य कैसे शुरू हुआ।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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