Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Wednesday, 08 July, 2026, 09:35:10 PM IST.

tajnews.in | आगरा: मानसून की पहली प्रभावी बरसात ने ही नगर निगम और स्थानीय कार्यदायी संस्थाओं के उन तमाम दावों की कलई खोलकर रख दी है, जो पिछले कई महीनों से नाला सफाई और जलभराव से मुक्ति के नाम पर किए जा रहे थे। मंगलवार शाम से शुरू होकर बुधवार सुबह तक रुक-रुक कर हुई आक्रामक बारिश ने मौसम तो सुहावना बना दिया, लेकिन प्रशासनिक तैयारियों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया। महज कुछ घंटों की इस बौछार में ही नगर निगम का पूरा ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह चोक हो गया, जिसके चलते शहर के 30 से अधिक प्रमुख रिहायशी इलाके और मुख्य मार्ग जलमग्न हो गए। सबसे बदतर स्थिति वीआईपी रूटों की रही, जहां दो-दो फीट तक पानी जमा होने से यातायात पूरी तरह रेंगता नजर आया। इसी बीच, मौसम विभाग ने आगामी 48 घंटों के भीतर मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट जारी कर दिया है, जिससे प्रशासनिक अमले की चुनौतियां और अधिक गहरा गई हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बारिश के बाद क्षेत्रीय तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को अधिकतम तापमान में 5.4 डिग्री सेल्सियस की भारी कमी आई, जिससे स्थानीय निवासियों को भीषण उमस और तपती गर्मी से फौरी राहत तो मिली, लेकिन न्यूनतम तापमान में 3.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई। जैसे ही बादलों ने बरसना शुरू किया, नगर निगम के केंद्रीय आपदा नियंत्रण कक्ष में जलभराव की शिकायतों का अंबार लग गया। नगर निगम के तमाम दावे उस वक्त पूरी तरह खोखले साबित हुए जब सैन्य क्षेत्र को जोड़ने वाले वीआईपी मार्ग यानी खेरिया मोड़ से अजीत नगर गेट रोड ने किसी बड़ी झील का रूप अख्तियार कर लिया। इस मार्ग पर करीब दो फीट तक पानी भर जाने के कारण दोपहिया वाहन चालकों को निकलने में भारी मशक्कत करनी पड़ी और दर्जनों गाड़ियां पानी के भीतर ही बंद हो गईं।
महानगर के अन्य हिस्सों की बात करें तो अलबतिया रोड, पृथ्वीनाथ फाटक 100 फीट रोड, मानस नगर, महात्मा गांधी रोड (एमजी रोड), रामबाग और आवास विकास जैसी सघन आबादी वाली कॉलोनियों की गलियां और मुख्य सड़कें पूरी तरह टापू में तब्दील हो गईं। विडंबना यह रही कि मेघों के शांत होने के चार घंटे बीत जाने के बाद भी इन जलमग्न सड़कों से पानी की निकासी नहीं हो सकी, जिससे स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को आवागमन में भारी दुश्वारियां झेलनी पड़ीं। नगर निगम प्रशासन ने पूर्व में बड़े-बड़े दावे करते हुए घोषणा की थी कि 15 जून की निर्धारित समयसीमा तक शहर के सभी 410 नालों की सफाई का कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है, जिसमें 18 बड़े, 151 मझोले और 241 छोटे नाले शामिल हैं। लेकिन पहली ही प्रभावी बारिश ने यह साफ कर दिया कि नालों की तली झाड़ सफाई केवल फाइलों में कागजी घोड़े दौड़ाने तक ही सीमित रही।
इस चौतरफा जलभराव के बीच मुख्यमंत्री शहरी ग्रिड योजना के अंतर्गत चल रहे कछुआ गति और अधूरे निर्माण कार्यों ने आम जनता की मुसीबत को दोगुना कर दिया है। दिल्ली गेट, कालिंदी विहार, इंद्रापुरम और कोठी मीना बाजार से मारुति एस्टेट रोड पर कार्यदायी संस्थाओं द्वारा बड़े पैमाने पर की गई अंधाधुंध खुदाई के कारण सड़कें पहले ही बेहद संकरी और जानलेवा हो चुकी थीं। बुधवार सुबह हुई बरसात के बाद इन खोदे गए डंपिंग पॉइंट्स पर भयानक कीचड़, गहरे दलदल और कई स्थानों पर मुख्य पक्की सड़क के धंसने जैसी गंभीर घटनाएं सामने आईं। हाल ही में कलेक्ट्रेट में आयोजित विकास कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान इन परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार पर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने संबंधित विभागीय अभियंताओं और ठेकेदारों को कड़ी फटकार लगाते हुए ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी थी, लेकिन धरातल पर कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी और ढुलमुल रवैये में रत्ती भर भी सुधार नहीं देखा गया, जिसका खामियाजा अब निर्दोष जनता को भुगतना पड़ रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस चालू मानसून सत्र में अब तक सामान्य से लगभग 45 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी, जिसके कारण ग्रामीण अंचलों में खरीफ की मुख्य फसलों, विशेषकर बाजरे की बुवाई और बढ़वार पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इस लिहाज से 8 और 9 जुलाई को होने वाली यह व्यापक बारिश देहात क्षेत्र की खेती-किसानी के लिए एक बड़ा वरदान साबित हो सकती है, जिससे सूखे के संकट से जूझ रहे अन्नदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 10 जुलाई को भी दिनभर आसमान में घने काले बादलों का डेरा रहेगा और एक-दो दौर की तेज बौछारें पड़ सकती हैं। बहरहाल, अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि यदि महज कुछ घंटों की रुक-रुक कर हुई बूंदाबांदी में ही पूरा महानगर पानी-पानी हो गया, तो मौसम विभाग के रेड अलर्ट के अनुसार अगले 48 घंटों में संभावित मूसलाधार बारिश के दौरान शहर का क्या हाल होगा। नगर निगम को अब कागजी दावों से आगे बढ़कर धरातल पर युद्धस्तर पर आपातकालीन जल निकासी सुनिश्चित करनी होगी।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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