आस्था या अराजकता?: हरदोई में बुद्ध प्रतिमा स्थापना को लेकर कोहराम, पथराव में दो सिपाही घायल, 10 गिरफ्तार

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Hardoi Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Friday, 29 May 2026, 08:30:15 AM IST

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हरदोई: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के महुआ कोला गांव में बिना प्रशासनिक अनुमति के महात्मा बुद्ध की प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर भारी बवाल खड़ा हो गया। बुधवार को खाली पड़े एक निजी मंदिर में जबरन मूर्ति रखने की जानकारी मिलने पर जब पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो ग्रामीणों और बाहरी तत्वों ने हंगामा शुरू कर दिया। देर रात जब प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए प्रतिमा को हटाने की कार्रवाई शुरू की, तो उग्र भीड़ ने लाठी-डंडों, लोहे की रॉड और सरियों से लैस होकर पुलिस बल पर अचानक हिंसक हमला और पथराव कर दिया। इस हमले में दो सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गए और कई सरकारी वाहनों के शीशे टूट गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और मौके से 10 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है।

पूरे मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, महुआ कोला गांव के निवासी पुत्तीलाल मौर्य ने अपनी निजी भूमि पर करीब तीन साल पहले एक मंदिर का निर्माण कराया था, जिसमें पहले कोई प्रतिमा या मूर्ति स्थापित नहीं थी। बुधवार सुबह लगभग 11 बजे लखनऊ के टेढ़ी पुलिया निवासी शिवम मौर्या, ओम प्रकाश, रंजीत मौर्या और वृंदावन कॉलोनी निवासी मुकेश मौर्या कुछ अन्य बाहरी सहयोगियों के साथ गांव पहुंचे। इन लोगों ने पुत्तीलाल और उनके परिजनों के साथ मिलकर बिना किसी पूर्व प्रशासनिक अनुमति के मंदिर के भीतर महात्मा बुद्ध की प्रतिमा स्थापित कर दी। गांव के एक खाली मंदिर में अचानक बिना अनुमति प्रतिमा रखे जाने की भनक लगते ही ग्रामीण अंचल में असंतोष फैल गया और दो पक्षों के बीच तनाव की स्थिति निर्मित हो गई।

Hardoi Police Personnel and Administrative Officers Investigating the Violence Scene at MahuaKola Village

गांव की महिला चौकीदार ने इस अवैध मूर्ति स्थापना की सूचना तत्काल कोतवाल सतीश कुमार को दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोतवाल ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट संडीला नारायणी भाटिया और सीओ हरियावां अजीत चौहान को पूरे प्रकरण से अवगत कराया। दोनों आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ महुआ कोला गांव पहुंचे और प्रतिमा स्थापित कर रहे लोगों से अनुमति संबंधी आधिकारिक अभिलेख मांगे। पुत्तीलाल मौर्य और उनके सहयोगियों द्वारा कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत न करने पर अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने की कवायद शुरू की। प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार कई घंटों तक वार्ता की, लेकिन बुधवार रात 11 बजे तक भी जब आयोजक और उनके समर्थक प्रतिमा हटाने को राजी नहीं हुए, तो पुलिस ने सख्त रुख अपनाने की चेतावनी दी।

Joint Magistrate Narayani Bhatia and CO Ajit Chauhan Discussing Permit Documents with Village Residents

पुलिस द्वारा सख्ती दिखाए जाने का संकेत मिलते ही भीड़ में शामिल उपद्रवियों ने अधिकारियों को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और पुलिस बल पर चारों तरफ से पथराव शुरू कर दिया। हमलावरों ने हाथों में लाठियां, लोहे की सरिया और रॉड लेकर मौके पर खड़े सरकारी वाहनों को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इस अचानक हुए हमले से घटना स्थल पर अफरातफरी मच गई। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने आत्मरक्षार्थ हल्का बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद हिंसक भीड़ तितर-बितर हुई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना स्थल से 10 आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने बताया कि बेनीगंज कोतवाल की तहरीर पर 38 नामजद और कई अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। इस पथराव में सिपाही भावना और अतुल घायल हुए हैं, जिनका स्थानीय अस्पताल में उपचार चल रहा है।

HIGHLIGHTS
  1. यमुना बैराज: ताज के डाउनस्ट्रीम में ₹500 करोड़ से अधिक की लागत वाले प्रोजेक्ट की मांग।
  2. सिर्सी ज्ञापन: मुख्यमंत्री और पीएम को भेजा गया 5-सूत्रीय मांग पत्र; नदियों को ‘लीगल पर्सन’ मानने पर जोर।
  3. बैराज के फायदे: जल स्तर में 10-12 फीट की वृद्धि, ताज की नींव को मजबूती और आगरा में WATER टूरिज्म।
  4. नदी अदालत: सिर्सी रैली ने ‘नदी संरक्षण न्यायाधिकरण’ (River Protection Tribunal) के गठन की उठाई मांग।

इस संवेदनशील मामले में पुलिसिया कार्रवाई के समानांतर गांव के ही निवासी अरविंद मौर्या की शिकायत पर एक और प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें 15 लोगों को नामजद करते हुए 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। अरविंद ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया कि 27 मई की शाम जब वह मंदिर के पास अपनी निजी भूमि पर मवेशी बांध रहे थे, तभी गांव के राजाराम, जगन्नाथ आदि मंदिर में बुद्ध प्रतिमा रखने की तैयारी करने लगे। मना करने पर आरोपियों ने उनके साथ विवाद किया और इसी बीच जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो आरोपियों ने पुलिस कर्मियों के साथ भी बेहद अभद्रता और गाली-गलौज करते हुए हिंसक हमला कर दिया, जिसमें वे स्वयं भी घायल हुए हैं।

Vandalized Government Vehicles with Broken Windows and Windshields After the Hardoi Stone Pelting Incident

सच्चाई यह भी है कि इस पूरे विवाद को भड़काने में सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों ने आग में घी का काम किया। अलग-अलग समुदायों से जुड़े कुछ अराजक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भ्रामक पोस्ट डालकर लोगों को भारी संख्या में महुआ कोला गांव पहुंचने का खुला आह्वान किया जा रहा था। इन अफवाहों के चलते बाहरी लोग वहां एकत्रित होने लगे और सीधे प्रशासनिक अधिकारियों से उलझ गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते भारी पुलिस बल बुलाकर कड़ा रुख न अख्तियार किया जाता, तो उग्र भीड़ पुलिस कर्मियों के साथ कोई बड़ी अप्रिय घटना कारित कर सकती थी।

Broken Glass Scattered Around Damaged Cars Following the Clash in Beniganj Kotwali Area

गौरतलब है कि महुआ कोला गांव में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर पुराना विवाद रहा है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, इससे पूर्व 5 जून 2023 को भी पुत्तीलाल ने अपने परिजनों के साथ मिलकर इसी मंदिर में अवैध रूप से प्रतिमा स्थापित करने का प्रयास किया था, जिसे तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने हटाकर बेनीगंज कोतवाली में सुरक्षित रखवा दिया था और मुकदमा दर्ज किया था। इसके भी पूर्व वर्ष 2011 में जब यह मंदिर निर्मित नहीं था, तब गांव के एक बुद्ध विहार में प्रतिमा रखने की कोशिश के दौरान दो पक्षों में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें गोलियां तक चल गई थीं।

Heavy Police Force Deployed to Maintain Law and Order Making MahuaKola Village a Closed Camp Site

बुधवार आधी रात के बाद ही पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया। टड़ियावां, अतरौली, संडीला और हरियावां समेत कई थानों का पुलिस फोर्स गांव में मुस्तैद है। मध्य रात्रि के बाद ही जिलाधिकारी अनुनय झा, पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा, अपर जिलाधिकारी प्रफुल्ल त्रिपाठी और अपर पुलिस अधीक्षक एमपी सिंह व सुबोध गौतम ने भारी बल के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। जिलाधिकारी अनुनय झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ शरारती तत्वों द्वारा भ्रामक और शांति विरोधी प्रचार किया जा रहा है, जिस पर प्रशासन की कड़ी नजर है। उन्होंने साफ किया कि बिना सक्षम प्रशासनिक अनुमति के किसी भी सार्वजनिक या विवादित स्थल पर प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वाले और माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले तत्वों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य कठोरतम कानूनी धाराओं के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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