Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Saturday, 30 May 2026, 09:41:12 AM IST

आगरा: ताजनगरी में यमुना नदी के अस्तित्व को बचाने और उसकी अविरल-निर्मल धारा को पुनर्जीवित करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख का चौतरफा स्वागत शुरू हो गया है। देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा यमुना की दुर्दशा पर की गई तल्ख टिप्पणी और गृह सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति के गठन के ऐतिहासिक फैसले का आगरा के नदी प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने जोरदार अभिनंदन किया है। शहर के प्रसिद्ध यमुना आरती स्थल पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में रिवर कनेक्ट अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं, विचारकों और स्थानीय नागरिकों ने एक सुर में उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट की इस बेहद गंभीर और प्रभावी पहल के बाद अब सोई हुई राज्य सरकारें, केंद्रीय एजेंसियां और लापरवाह प्रशासनिक तंत्र गहरी नींद से जागेंगे और यमुना के घटते जल प्रवाह व भयावह प्रदूषण को रोकने के लिए ठोस धरातलीय कदम उठाएंगे।
यमुना आरती स्थल पर आयोजित इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता देश के प्रख्यात पर्यावरणविद डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने की। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, अपने विचार साझा करते हुए डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने अत्यंत भावुक और गंभीर लहजे में कहा कि यमुना सिर्फ पानी की एक साधारण जलधारा मात्र नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन सनातन सांस्कृतिक स्मृति, समृद्ध जैव विविधता और उत्तर भारत के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है। उन्होंने प्रशासनिक उदासीनता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सचेत किया कि यदि देश की सर्वोच्च अदालत के इस ऐतिहासिक हस्तक्षेप के बाद भी सरकारी विभागों ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और प्रभावी धरातलीय कदम नहीं उठाए गए, तो हमारी आने वाली पीढ़ियां केवल एक सूखी और मृतप्राय नदी की दुखद विरासत पाने को मजबूर होंगी।
कार्यक्रम के दौरान रिवर कनेक्ट अभियान के मुख्य संयोजक बृज खंडेलवाल ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश के गृह सचिव की अगुवाई में एक शक्तिशाली और उच्च स्तरीय समिति का गठन करना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मील का पत्थर साबित होने वाला निर्णय है। बृज खंडेलवाल ने रेखांकित किया कि अदालत ने जिस स्पष्टता और कड़े शब्दों के साथ यमुना को आज के समय में पूरी तरह एक “सीवेज नाले में बदल चुकी नदी” के रूप में परिभाषित किया है, वह देश के पर्यावरणीय कुप्रबंधन, नगर निकायों की घोर लापरवाही और लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक विफलताओं के मुंह पर एक बहुत बड़ा और कठोर तमाचा है।

नदी तट पर जुटे विभिन्न वक्ताओं ने सरकारी महकमों की आपसी खींचतान और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पिछले कई दशकों से स्थानीय नगर निकाय, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल संस्थान, सिंचाई विभाग और विकास प्राधिकरण अपनी-अपनी नाकामियों का ठीकरा एक-दूसरे के सिर पर फोड़कर जिम्मेदारी से बचते रहे हैं। अधिकारियों की इसी दिशाहीनता और सुस्ती का खामियाजा कान्हा की प्रिय कालिंदी को भुगतना पड़ा है, जो आज जहरीले सफेद झाग, अनट्रीटेड सीवर, खतरनाक औद्योगिक केमिकल और जगह-जगह हुए अवैध अतिक्रमणों के भारी बोझ तले घुट-घुटकर अपनी अंतिम सांसें गिन रही है। नदी प्रेमियों ने विश्वास जताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट की यह ताजा पहल इस पूरे निकम्मे, सुस्त और संवेदनहीन तंत्र को पूरी तरह से झकझोरने का काम करेगी।
रिवर कनेक्ट अभियान से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकारों के समक्ष एक महत्वपूर्ण मांग पत्र भी रखा। उन्होंने पुरजोर शब्दों में मांग की कि नए सिरे से तैयार किए जाने वाले प्रस्तावित यमुना एक्शन प्लान का दायरा केवल दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों तक ही सीमित न रखा जाए, बल्कि इसमें उद्गम स्थल हिमालय से लेकर संगम नगरी प्रयागराज तक के पूरे यमुना बेसिन को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष तौर पर जोर देकर कहा कि आगरा और मथुरा क्षेत्र में यमुना की पूरी तरह से सूखती जा रही मुख्य धारा, तेजी से रसातल में जा रहा भूजल स्तर, धड़ल्ले से हो रहा अवैध रेत खनन और पानी में बढ़ते जहर की समस्या को इस राष्ट्रीय कार्ययोजना में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

यमुना आरती स्थल पर सामूहिक संकल्प लेते हुए वक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सरकारी वादों, कागजी योजनाओं, बजट आवंटन और बंद कमरों में होने वाली उच्च स्तरीय बैठकों से यमुना जैसी पावन नदी को कभी पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता। इसके लिए हमारे समाज, पूज्य संत समुदाय, पर्यावरण वैज्ञानिकों, प्रबुद्ध किसानों, ऊर्जावान युवाओं और स्थानीय आम नागरिकों की हर स्तर पर सक्रिय व निरंतर भागीदारी बेहद आवश्यक है। बिना जनसहभागिता और जनचेतना के दुनिया का कोई भी नदी संरक्षण अभियान कभी सफल नहीं हो सकता। कार्यक्रम के अंत में रिवर कनेक्ट अभियान ने भारी उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में तैयार होने वाली यह विशेष कार्ययोजना यमुना मैया को उनका खोया हुआ स्वरूप वापस दिलाने में निर्णायक साबित होगी, जिससे भावी पीढ़ियों को एक निर्मल, अविरल और जीवंत यमुना मिल सकेगी।
इस महत्वपूर्ण और चेतना जगाने वाले कार्यक्रम में मुख्य रूप से चतुर्भुज तिवारी, निधि पाठक, पद्मिनी अय्यर, दीपक राजपूत, मुकेश चौधरी, जुगल किशोर, गोस्वामी नंदन श्रोतरीय, अभिनव लाला सहित शहर के कई गणमान्य नागरिक, समाज सेवी और भारी संख्या में यमुना भक्त उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में यमुना मुक्ति के इस महाअभियान में गिलहरी योगदान देने का सामूहिक संकल्प दोहराया।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Vaj News
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