Uttar Pradesh Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Tuesday, 09 June 2026, 07:35:12 PM IST

अयोध्या: भगवान श्रीराम की पावन जन्मभूमि अयोध्या में राम मंदिर की दान राशि और चढ़ावे को लेकर उपजा विधिक व प्रशासनिक विवाद अब अपने चरम पर पहुँच गया है। मंदिर प्रशासन और चढ़ावे की विसंगतियों को लेकर उठी गूंज अब सीधे देश के सर्वोच्च प्रशासनिक गलियारे यानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुँच चुकी है, जिससे उत्तर प्रदेश की राजनीति और शासन तंत्र में भारी हलचल मच गई है। भारतीय जनता पार्टी के ही वरिष्ठ नेता रजनीश सिंह द्वारा सीधे प्रधानमंत्री को शिकायती पत्र भेजे जाने के बाद इस पूरे प्रकरण ने एक नया विधिक मोड़ ले लिया है। इस गंभीर विसंगति की पृष्ठभूमि में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र सोमवार को अचानक आपातकालीन दौरे पर रामनगरी अयोध्या पहुँचे। उन्होंने बंद कमरे में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक अत्यंत गोपनीय बैठक की, जिससे प्रशासनिक गलियारों में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मोर्चा खोल दिया है और सीधे डबल इंजन सरकार पर हमला बोलते हुए सनातनी आस्था से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है।
विधिक और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि की कथित हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुँचने के तुरंत बाद शीर्ष स्तर से इस पर संज्ञान लिया गया है। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का अचानक दिल्ली से अयोध्या पहुँचना और आनन-फानन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों व मंदिर की सुरक्षा व व्यवस्था से जुड़े प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक करना इस बात का विधिक संकेत है कि केंद्र सरकार इस मामले को लेकर अत्यंत गंभीर है। इस बेहद गोपनीय बैठक के एजेंडे को पूरी तरह गुप्त रखा गया और कोई भी आधिकारिक प्रेस नोट या वक्तव्य जारी नहीं किया गया। मंगलवार सुबह बैठक संपन्न कर नृपेंद्र मिश्र वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस गोपनीय दौरे के आधार पर एक गोपनीय और विधिक रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती है, जिसके बाद ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद को पीएमओ के पटल पर लाने वाले भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने अपने शिकायती पत्र में साफ लिखा है कि अयोध्या का भव्य श्रीराम मंदिर पूरे विश्व के करोड़ों सनातनी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और निष्ठा का परम केंद्र है। ऐसे पावन स्थल पर दान, चढ़ावे और मंदिर के आंतरिक प्रशासन से जुड़े किसी भी प्रकार के आरोप श्रद्धालुओं के विश्वास को ठेस पहुँचाते हैं, इसलिए इस पूरे मामले की एक निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच होना नितांत आवश्यक है। डॉ. सिंह ने अपने विधिक तर्क में कहा कि यदि ये आरोप पूरी तरह निराधार और गलत हैं, तो विधिक जांच के माध्यम से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाना चाहिए ताकि अफवाहों पर विराम लग सके। परंतु, यदि कहीं भी तनिक भी अनियमितता या हेराफेरी हुई है, तो दोषियों के खिलाफ बिना किसी विधिक रियायत के कठोरतम दंडात्मक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए क्योंकि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी स्तर पर समझौता सर्वोपरि रूप से अनुचित है।
इस बीच, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस मुद्दे को लेकर लगातार तीसरी बार अत्यंत आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को विधिक रूप से “चढ़ावा चोरी कांड” का नाम देते हुए भारतीय जनता पार्टी की सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सम्मुख एक के बाद एक 11 तीखे और विधिक सवाल दागे हैं। अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि मीडिया चैनलों और राष्ट्रीय समाचार पत्रों में लगातार खबरें प्रसारित की जा रही हैं कि दान राशि की हेराफेरी में संलिप्त कुछ मुख्य संदिग्धों को पुलिस ने हिरासत में लिया है, परंतु आश्चर्य की बात यह है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन पहले इस पर पूरी तरह मौन साधे रहता है और बाद में दबाव में आकर इसका विधिक खंडन जारी कर देता है। उन्होंने पूछा कि इस विरोधाभासी रवैये के पीछे आखिर क्या विधिक रहस्य छिपा हुआ है?
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने अपने तीखे सवालों की झड़ी लगाते हुए आगे पूछा कि आखिर वह कौन सी बड़ी ताकत है जो देश के करोड़ों हिंदुओं और सनातनी धर्मावलंबियों की पवित्र आस्था के साथ ऐसा घिनौना और आपराधिक खिलवाड़ करने का दुस्साहस कर रही है? चढ़ावे में चोरी का महापाप करने वाले अपराधियों को सत्ता के किस गलियारे से विधिक संरक्षण प्राप्त हो रहा है? इस गंभीर वित्तीय अपराध के तार शासन और प्रशासन में बैठे किन-किन प्रभावशाली लोगों से जुड़े हुए हैं? अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि यदि ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन पूरी तरह से पाक-साफ है, तो मंदिर के गर्भगृह और दान काउंटर के विधिक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के साक्ष्यों को देश की जनता के सम्मुख सार्वजनिक करने में क्या विधिक परेशानी आ रही है? उन्होंने केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि आज इस महापाप पर उनकी विधिक जवाबदेही और नैतिक जिम्मेदारी कहां लुप्त हो गई है? ऐसे में यह साफ है कि राम मंदिर दान का यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जवाबदेही और पारदर्शिता का एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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