Uttar Pradesh Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Friday, 12 June 2026, 05:30:15 PM IST

लखनऊ/अयोध्या: अयोध्या स्थित ऐतिहासिक और भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे और दानपात्रों की संपत्ति में हुए कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब बेहद गंभीर रूप धारण कर चुका है। करोड़ों हिंदुओं की गहरी आस्था और श्रद्धा से जुड़े इस संवेदनशील प्रकरण में शुक्रवार को एक बड़ा मोड़ आया, जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका (PIL) आधिकारिक तौर पर दाखिल कर दी गई। स्थानीय अधिवक्ता मोहित अशोक द्वारा व्यक्तिगत रूप से दायर की गई इस याचिका में इस पूरे कथित घोटाले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की गुहार लगाई गई है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने मंदिर के दानपात्रों से प्राप्त होने वाली भारी नकदी, सोने-चांदी के बहुमूल्य आभूषणों तथा अन्य कीमती उपहारों का पूर्ण आंतरिक और बाह्य वित्तीय मूल्यांकन देश की सर्वोच्च संस्था नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से कराने का आदेश देने का भी न्यायालय से आग्रह किया है। इस याचिका के दाखिल होते ही देश के राजनीतिक और धार्मिक हलकों में भारी हड़कंप मच गया है और इस पर अगले सप्ताह उच्च न्यायालय में सुनवाई होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
न्यायालय में दाखिल जनहित याचिका के अनुसार, भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों रामभक्त अपनी गाढ़ी कमाई का अंश दान स्वरूप अर्पित करते हैं। पिछले कुछ दिनों से मीडिया और विभिन्न समाचार पत्रों में मंदिर के भीतर दान की संपत्ति के गबन और नोटों की गड्डियों में हेराफेरी की खबरें लगातार प्रकाशित हो रही थीं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस प्रकार के गंभीर और सनसनीखेज आरोपों से दुनिया भर में फैले सनातनी भक्तों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है। मंदिर प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता और वित्तीय शुचिता स्थापित करने के लिए इस पूरे प्रकरण की दूध का दूध और पानी का पानी होना आवश्यक है। इसी आधार पर याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश राज्य सरकार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के साथ-साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया गया है, ताकि सभी जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय की जा सके।
दूसरी ओर, राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन का आरोप सामने आने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर वैचारिक और प्रशासनिक मंथन का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से लिया है। संघ के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरे मामले की एक आंतरिक और विस्तृत रिपोर्ट मंदिर प्रबंधन से तलब कर ली है। संघ के सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर मंदिर की संपूर्ण वित्तीय व्यवस्था, दान की गिनती की प्रक्रिया और प्रशासनिक ढांचे की गहन समीक्षा की जाएगी। आंतरिक जांच के घेरे में आए कई संदेहास्पद कर्मचारियों की भूमिका पर तीखे सवाल उठने लगे हैं, जिसके चलते मंदिर प्रशासन कई गैर-जिम्मेदार कर्मियों की सेवाएं तत्काल समाप्त करने अथवा उन्हें महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों से हटाकर दूर करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। परिसर में जवाबदेही बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर फेरबदल की तैयारी की जा रही है।
इसी कड़ी में अयोध्या के स्थानीय बैंकिंग और प्रशासनिक गलियारों में एक और सनसनीखेज चर्चा जोरों पर है। सूत्रों के अनुसार, गबन की गई राशि में से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की नकद राशि संदिग्धों के पास से बरामद कर ली गई है। सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस की टीमें संदिग्ध कर्मचारियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं, और उनके निजी बैंक खातों के विवरण (बैंक डिटेल्स) की बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है। हालांकि, जब इस पूरे मामले और पैसों की गिनती की प्रक्रिया में शामिल सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के स्थानीय शाखा प्रबंधक से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस संवेदनशील विषय पर कुछ भी बोलने या किसी भी प्रकार की आधिकारिक टिप्पणी करने से पूरी तरह इनकार कर दिया। माना जा रहा है कि बैंक के उन कर्मचारियों की भूमिका की भी अंदरूनी तौर पर जांच की जा रही है जो दैनिक आधार पर दानपात्रों से निकलने वाले नोटों की गिनती के काम में तैनात रहते थे। इस भारी उठापटक और बाहरी दबाव के बावजूद, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने फिलहाल इस पूरे विवाद पर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है।
इस पूरे विवाद को हवा देने और इसे जन-जन तक पहुँचाने में राम मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह के बयानों ने सबसे बड़ी और विस्फोटक भूमिका निभाई है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर उनके कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें वे कैमरे के सामने आकर बेहद चौंकाने वाले दावे कर रहे हैं। महिपाल सिंह का खुला आरोप है कि राम मंदिर की दान राशि और चढ़ावे में चोरी का यह खेल कोई नया नहीं है, बल्कि यह बेहद संगठित तरीके से लंबे समय से बदस्तूर जारी था। नोटों की गिनती के समय गड्डियों में से चालाकी से नोट निकालकर हेराफेरी की जाती थी। उन्होंने व्यवस्था और ट्रस्ट से जुड़े कुछ बेहद रसूखदार और वरिष्ठ अधिकारियों के नामों का खुलासा भी अपने वीडियो में किया है। महिपाल सिंह का सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब उन्होंने इस वित्तीय भ्रष्टाचार और चोरी के खिलाफ आवाज उठाई और वरिष्ठों से लिखित शिकायत की, तो भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही उनके पद से जबरन हटाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अब यह मामला कोर्ट के दरवाजे पर पहुँचने से आने वाले दिन अयोध्या की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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