रिश्तों का सूनापन: करोड़ों की कोठी में अकेलेपन से हार गईं दो जिंदगियां, बुजुर्ग ननद-भाभी की संदिग्ध मौत ने छोड़े गहरे सवाल

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National Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Friday, 29 May 2026, 11:02:15 AM IST

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नई दिल्ली: देश की राजधानी की गगनचुंबी अट्टालिकाओं, चकाचौंध और भागती जिंदगी के बीच मध्य दिल्ली के पॉश इलाके राजिंदर नगर से रिश्तों को झकझोर देने वाली एक बेहद मर्मांतक घटना सामने आई है। यहाँ के एक बेहद महंगे और आलीशान रिहायशी मकान के भीतर दो बुजुर्ग महिलाओं के शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से पूरे प्रशासनिक महकमेและ समाज में सनसनी फैल गई है। मृतकों की पहचान 80 वर्षीय अविवाहित बुजुर्ग सरोज बाला और उनकी सगी भाभी चंद्रकांता के रूप में हुई है। बंद कोठी के कमरों से जब भयंकर दुर्गंध उठनी शुरू हुई, तब जाकर पड़ोसियों और घरेलू सहायिका को हादसे की भनक लगी। सूचना पाकर मौके पर पहुँची राजिंदर नगर थाना पुलिस ने मुख्य द्वार का ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया, जहाँ दोनों बुजुर्ग महिलाओं के क्षत-विक्षत शव फर्श और बिस्तर पर पड़े मिले। मध्य जिला पुलिस ने प्रारंभिक तफ्तीश के बाद बताया कि कोठी में किसी भी तरह के जबरन प्रवेश, सामान की लूटपाट अथवा किसी बाहरी संघर्ष के साक्ष्य नहीं मिले हैं।

HIGHLIGHTS
  1. राजिंदर नगर कांड: पॉश इलाके में एक मंजिला बंद कोठी के भीतर दो बुजुर्ग महिलाओं के शव मिलने से सनसनी।
  2. मृतकों की पहचान: बिजली विभाग से सेवानिवृत्त 80 वर्षीय सरोज बाला और उनकी बीमार भाभी चंद्रकांता के रूप में हुई पुष्टि।
  3. अकेलेपन की त्रासदी: करीब 20 करोड़ की कोठी और सरकारी पेंशन होने के बाद भी अकेले रह रहे थे दोनों बुजुर्ग।
  4. पुलिसिया तफ्तीश: जबरन प्रवेश या लूटपाट के सबूत नहीं, फॉरेंसिक टीम और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का असल राज।

महानगरों की संवेदनहीन होती जा रही सामाजिक व्यवस्था पर यह घटना एक करारा तमाचा है। स्थानीय रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, जिस एक मंजिला कोठी में यह दोनों महिलाएं दम तोड़ गईं, बाजार में उसकी वर्तमान कीमत करीब 20 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। धन-दौलत और सरकारी पेंशन की कोई कमी न होने के बावजूद, इन दोनों महिलाओं की अंदरूनी दुनिया अकेलेपन की भीषण खामोशी से घिरी हुई थी। पड़ोस में रहने वाले एक बुजुर्ग नागरिक श्रीधर (74) ने अत्यंत दुखी मन से बताया कि मृतका सरोज बाला बिजली विभाग से उच्च पद से सेवानिवृत्त थीं और स्वभाव से बेहद कम बात करती थीं। उनके सगे भाई भारतीय सेना में वरिष्ठ अधिकारी थे, जिनकी वैश्विक महामारी कोरोना काल के दौरान असमय मृत्यु हो गई थी। भाई के चले जाने के बाद उनकी बीमार पत्नी चंद्रकांता पूरी तरह टूट गईं और गंभीर अस्वस्थता के चलते उन्होंने घर से बाहर निकलना बिल्कुल बंद कर दिया था। इस अभागे परिवार में आगे वंश चलाने वाला या सुख-दुख साझा करने वाला कोई संतान भी नहीं था।

पारिवारिक पृष्ठभूमि की पड़ताल में यह भी तथ्य सामने आया है कि सरोज बाला की एक छोटी बहन भी थी, जो सामाजिक सरोकारों से जुड़ी थीं और असहाय, विधवा व तलाकशुदा महिलाओं के पुनर्वास के लिए एक गैर-सरकारी संस्था का संचालन करती थीं। परंतु कुछ समय पूर्व गंभीर बीमारी की चपेट में आने से उनका भी देहावसान हो गया। इसके बाद से इस 20 करोड़ की विशाल कोठी में सिर्फ यह दो वृद्ध ननद-भाभी ही एकाकी जीवन व्यतीत कर रही थीं, जिसमें एक खुद बिस्तर पर गंभीर बीमार थी और दूसरी वृद्ध महिला उसकी तीमारदारी में व्यस्त रहती थी। पास ही स्थित मदर डेयरी बूथ के संचालक को याद है कि महीने में बमुश्किल एक या दो बार ही सरोज को दूध का पैकेट लेते देखा जाता था। इतने बड़े और संभ्रांत रिहायशी इलाके में रहने के बावजूद समाज में कोई भी उन्हें हकीकत में नहीं जानता था। पुलिस को आशंका है कि राष्ट्रीय राजधानी में पड़ रही रिकॉर्डतोड़ भीषण गर्मी, अचानक बढ़ी शारीरिक कमजोरी, भूख अथवा लंबे समय से घर में पसरे जानलेवा अकेलेपन के अवсад ने इन दो मासूम जिंदगियों को लील लिया।

मध्य जिला पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि कोठी में आने वाली घरेलू सहायिका (कामवाली) जब बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े दस बजे काम पर पहुँची, तो उसे मुख्य द्वार के पास से असहनीय दुर्गंध महसूस हुई। सहायिका एक दिन के अवकाश के बाद वापस लौटी थी। जब भीतर से बार-बार आवाज देने और कुंडी खटखटाने पर भी कोई हलचल नहीं हुई, तो उसने तुरंत स्थानीय राजिंदर नगर थाना पुलिस को सूचित किया। पुलिस दल जब दरवाजों को कटर की मदद से काटकर कोठी के मुख्य शयनकक्ष में दाखिल हुआ, तो कमरे का दृश्य वीभत्स था। 80 वर्षीय सरोज बाला का शव फर्श पर पड़ा हुआ था, जबकि उनकी भाभी चंद्रकांता का शव बिस्तर पर क्षत-विक्षत अवस्था में था। कमरे की स्थिति और शवों के गलने की प्रक्रिया को देखकर डॉक्टरों का अनुमान है कि दोनों वृद्ध महिलाओं की मृत्यु कम से कम दो से तीन दिन पूर्व ही हो चुकी थी।

जांच टीम के अनुसार, एक मंजिला आलीशान कोठी में प्रवेश और निकास के चार अलग-अलग रास्ते हैं और सभी मुख्य दरवाजे भीतर से पूरी तरह लॉक थे। प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच में कोठी की अलमारियां सुरक्षित पाई गई हैं और संघर्ष का कोई भी चिन्ह दिखाई नहीं दिया है, जिससे डकैती या जबरन हत्या की आशंका कम नजर आती है। हालांकि, दिल्ली पुलिस इस मामले को आत्महत्या अथवा किसी जहरीले पदार्थ के सेवन के नजरिए से भी गहराई से खंगाल रही है, लेकिन घटना स्थल से अभी तक कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट और विसरा जांच के बाद ही मौत के सटीक और वैज्ञानिक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पुलिस घरेलू सहायिका, दूध विक्रेता और मृतका के ननिहाल व दूर के रिश्तेदारों की तलाश कर उनसे पूछताछ के प्रयास में जुटी हुई है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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