Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Thursday, April 16, 2026, 01:21:16 AM IST

आगरा: धरती पर डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है, लेकिन जब वही रक्षक किसी की जान के दुश्मन बन जाएं, तो आम आदमी का विश्वास पूरी तरह से टूट जाता है। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से चिकित्सा जगत को शर्मसार कर देने वाला एक बेहद गंभीर और रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। यहां के लोहामंडी स्थित जयपुर हाउस क्षेत्र में एक 20 महीने के मासूम बच्चे की कथित तौर पर ‘इंजेक्शन की ओवरडोज’ (Injection Overdose) के कारण तड़पकर मौत हो गई। पीड़ित माता-पिता पिछले 6 महीनों से अपने जिगर के टुकड़े को न्याय दिलाने के लिए पुलिस और प्रशासन के चक्कर काट रहे थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः, न्यायालय के सख्त आदेश के बाद अब जाकर सूरी मैटेरनिटी सेंटर के संचालक डॉक्टर दंपती, उनके बेटे और कंपाउंडर के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही और एससी-एसटी एक्ट (SC-ST Act) जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। इस घटना ने पूरे आगरा शहर में भारी आक्रोश और सनसनी फैला दी है। मासूम की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन पर पिस्तौल तानने और जातिसूचक गालियां देने जैसे बेहद संगीन आरोप भी लगे हैं, जो इस पूरे मामले को और भी ज्यादा खौफनाक बनाते हैं।
इलाज या लापरवाही? इंजेक्शन लगाते ही तड़पने लगा 20 माह का यश
किसी भी माता-पिता के लिए अपनी आंखों के सामने अपने हंसते-खेलते बच्चे को दम तोड़ते हुए देखना दुनिया का सबसे बड़ा दुख होता है। आगरा के बुद्ध विहार गली, खतैना निवासी योगेश कुमार और उनकी पत्नी सुमन की जिंदगी भी 30 सितंबर 2025 की उस काली रात को हमेशा के लिए उजड़ गई। न्यायालय में दिए गए अपने प्रार्थनापत्र में पीड़ित पिता योगेश कुमार ने बताया कि उनका 20 माह का इकलौता पुत्र योगेंद्र नाथ उर्फ यश 27 सितंबर 2025 को अचानक बीमार हो गया था। बच्चे की बिगड़ती तबीयत को देखकर घबराए हुए माता-पिता उसे तुरंत जयपुर हाउस स्थित ‘सूरी मैटेरनिटी सेंटर’ लेकर पहुंचे।
अस्पताल में मौजूद डॉ. एसएस सूरी और नीलम सूरी ने बच्चे को अपनी देखरेख में भर्ती कर लिया और उसका इलाज शुरू किया। अगले दिन बच्चे की हालत में सुधार देखकर उसे अस्पताल से छुट्टी (Discharge) दे दी गई। लेकिन, डॉक्टरों ने परिजनों को यह सख्त सलाह दी थी कि बच्चे को लगातार तीन दिन तक अस्पताल लाकर एक विशेष इंजेक्शन लगवाना होगा। इसी सलाह को मानते हुए 30 सितंबर 2025 की रात करीब 8 बजे योगेश अपनी पत्नी के साथ बच्चे को लेकर फिर से अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद कंपाउंडर ने जैसे ही बच्चे को इंजेक्शन लगाया, यश की हालत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई। वह बुरी तरह से तड़पने लगा और उसके मुंह से झाग निकलने लगा। आनन-फानन में डॉक्टर बच्चे को ऑपरेशन थिएटर (OT) में ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कुछ ही देर में उस मासूम ने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं।
मौत के बाद अस्पताल में भारी हंगामा और पिस्तौल की धमकी
जब डॉक्टरों ने माता-पिता को यह मनहूस खबर दी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्चे की मौत को संदिग्ध मानते हुए बदहवास परिजन उसे तुरंत जांच के लिए पुष्पांजलि अस्पताल लेकर भागे। लेकिन वहां के डॉक्टरों ने भी जांच के बाद उस 20 महीने के मासूम को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद योगेश कुमार अपने मरे हुए बच्चे को लेकर वापस सूरी मैटेरनिटी सेंटर पहुंचे और डॉक्टरों की इस घोर लापरवाही का कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा, तो वहां का स्टाफ अपनी गलती मानने के बजाय पूरी तरह से गुंडागर्दी पर उतर आया। अस्पताल संचालक और वहां मौजूद कर्मचारियों ने पीड़ित परिवार के साथ न केवल भारी अभद्रता की, बल्कि उन्हें सरेआम जातिसूचक गालियां भी दीं। क्रूरता की हद तो तब पार हो गई जब मेडिकल स्टोर चलाने वाले आरोपी डॉक्टर के बेटे अंकित सूरी ने कथित तौर पर अपनी पिस्तौल निकाल ली। उसने छाती पर पिस्तौल तानकर बच्चे के माता-पिता को जान से मारने की भयंकर धमकी दी और उन्हें धक्के मारकर अस्पताल से बाहर निकाल दिया। इस पूरी घटना ने चिकित्सा के पेशे को एक काले धब्बे से रंग दिया है।
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6 महीने तक दर-दर भटके लाचार माता-पिता, अब कोर्ट ने दिया सहारा
एक गरीब और बेबस पिता के लिए पुलिस थानों के चक्कर काटना कितना मुश्किल होता है, यह योगेश कुमार के 6 महीने के संघर्ष से समझा जा सकता है। घटना वाले दिन सूचना मिलने पर लोहामंडी थाना पुलिस मौके पर पहुंची जरूर थी। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए भेज दिया था, जहां मौत का सही कारण जानने के लिए विसरा (Viscera) सुरक्षित रख लिया गया। लेकिन, इसके बाद पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चली गई। रसूखदार डॉक्टर के खिलाफ पुलिस ने कोई भी कड़ा कदम उठाने की जहमत नहीं उठाई।
न्याय पाने की आस में पीड़ित पिता ने 6 अक्टूबर 2025 को मुख्यमंत्री पोर्टल (CM Portal) से लेकर जिले के तमाम बड़े पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के चौखट पर अपनी शिकायत दर्ज कराई। लेकिन हर जगह से उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले। जब पुलिस ने 6 महीने तक कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की, तो थक-हारकर योगेश कुमार ने सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता और पुलिस की घोर निष्क्रियता को देखते हुए तत्काल लोहामंडी पुलिस को केस दर्ज करने का कड़ा आदेश जारी किया। कोर्ट की फटकार के बाद अब जाकर इस मामले में डॉक्टर दंपती और स्टाफ के खिलाफ मुकदमा लिखा गया है।
डॉक्टरों की सफाई और मेडिकल माफियाओं पर उठते सवाल
इस पूरे मामले पर जब अस्पताल के संचालक डॉ. एसएस सूरी से बात की गई, तो उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा, “वह बच्चा हमारे अस्पताल में भर्ती नहीं था। परिजन उसे केवल बाहर से इंजेक्शन लगवाने के लिए लाए थे। कंपाउंडर से इंजेक्शन लगवाने के तुरंत बाद वे लोग वहां से चले गए थे। करीब चार घंटे बाद वे वापस लौटे और अस्पताल में जानबूझकर हंगामा खड़ा कर दिया।” डॉ. सूरी ने आगे कहा कि आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने भी इस मामले की अपनी जांच की है। न्यायालय जो भी आदेश देगा, वे जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
लोहामंडी थाना प्रभारी ने मीडिया को पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और अब पुलिस सभी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और विसरा रिपोर्ट के आधार पर मामले की बहुत गहराई से जांच कर रही है। यह मामला सिर्फ एक बच्चे की मौत का नहीं है, बल्कि यह उन तमाम प्राइवेट नर्सिंग होम्स (Private Nursing Homes) की कार्यप्रणाली पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है, जो बिना उचित योग्य स्टाफ के मरीजों की जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। अब देखना यह है कि पुलिस की यह जांच कितनी निष्पक्ष होती है और उस 20 महीने के मासूम यश को न्याय मिल पाता है या यह फाइल भी रसूख के आगे दबकर रह जाती है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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