एसएन मेडिकल कॉलेज ने रचा इतिहास: पहली बार हुई सफल ‘बीटिंग हार्ट बायपास सर्जरी’, 72 घंटे में मरीज को मिली छुट्टी

Agra Desk, tajnews.in | Friday, April 17, 2026, 10:45:30 PM IST

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आगरा: ताजनगरी आगरा के स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र से एक बेहद ही शानदार, गौरवशाली और राहत देने वाली खबर सामने आई है। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC) ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में एक नया तथा ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। आगरा के इस सबसे बड़े सरकारी और प्रतिष्ठित अस्पताल में पहली बार ‘बीटिंग हार्ट बायपास सर्जरी’ (OPCABG – Off-Pump Coronary Artery Bypass Grafting) को पूरी तरह से सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है। सीटीवीएस (CTVS) विभाग के वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल और उनकी अत्यंत कुशल मेडिकल टीम ने इस बेहद जटिल और उच्च जोखिम वाले ऑपरेशन को मुमकिन कर दिखाया है। इस आधुनिक और जीवनरक्षक सर्जरी के जरिए एक 66 वर्षीय गंभीर हृदय रोगी को मौत के जबड़े से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। सबसे बड़ी और हैरान करने वाली बात यह है कि इतने बड़े और जटिल ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी इतनी तेज रही कि उसे मात्र 72 घंटे (तीसरे दिन) के भीतर ही अस्पताल से पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके अलावा, एक गरीब परिवार के लिए यह 4 लाख रुपये का महंगा इलाज ‘असाध्य रोग योजना’ के तहत बिल्कुल मुफ्त किया गया, जिसने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आम जनता के भरोसे को एक नई और मजबूत उड़ान दी है।

एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में बीटिंग हार्ट बायपास सर्जरी करते डॉ सुशील सिंघल और उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम
HIGHLIGHTS
  1. एसएन मेडिकल कॉलेज का ऐतिहासिक कदम: आगरा में पहली बार दिल को बिना रोके सफल ‘बीटिंग हार्ट बायपास सर्जरी’ (OPCABG) को दिया गया अंजाम।
  2. 66 वर्षीय बुजुर्ग को मिला नया जीवनदान: मरीज के दिल की दो मुख्य धमनियां 100% ब्लॉक थीं और कार्यक्षमता केवल 35% ही बची थी।
  3. बिना आयुष्मान कार्ड के मुफ्त हुआ इलाज: ‘असाध्य रोग योजना’ के तहत मरीज का 4 लाख रुपये का भारी-भरकम ऑपरेशन बिल्कुल निशुल्क किया गया।
  4. महज 72 घंटे में मिली रिकॉर्ड छुट्टी: उत्कृष्ट केयर और धड़कते दिल की सर्जरी के कारण मरीज की रिकवरी इतनी तेज रही कि तीसरे दिन ही उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।

मौत के मुहाने पर खड़े थे 66 वर्षीय रतन लाल, जोखिम था बेहद ज्यादा

आगरा के बोडला इलाके के रहने वाले 66 वर्षीय रतन लाल शर्मा पिछले छह महीनों से गंभीर हृदय रोग (Severe Heart Disease) से बुरी तरह जूझ रहे थे। उनकी हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी और उन्हें जरा सा चलने या कोई भी शारीरिक काम करने पर सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा था। उनका जीवन पूरी तरह से चारपाई तक सिमट कर रह गया था। जब परिजन उन्हें बेहद नाजुक हालत में एसएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में लेकर पहुंचे, तो जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सभी को डरा दिया।

विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट्स और एंजियोग्राफी के अनुसार, उनके हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली दो मुख्य धमनियां (Coronary Arteries) पूरी तरह से 100% ब्लॉक हो चुकी थीं। इसके साथ ही, उनके दिल की पंपिंग क्षमता यानी इजेक्शन फ्रैक्शन (EF) घटकर केवल 35% ही रह गई थी। इतनी कम कार्यक्षमता और 100% ब्लॉकेज के साथ किसी भी उम्रदराज मरीज की बायपास सर्जरी करना अपने आप में एक बहुत बड़ा और जानलेवा जोखिम (High Risk Category) होता है। ऐसी स्थिति में अक्सर ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज की जान जाने का भारी खतरा बना रहता है। लेकिन, एसएनएमसी के सीटीवीएस विभाग के प्रमुख डॉ. सुशील सिंघल ने इस चुनौती को स्वीकार किया और हार नहीं मानी। उन्होंने मरीज की जान बचाने के लिए पारंपरिक बायपास सर्जरी के बजाय ‘बीटिंग हार्ट’ (Beating Heart) तकनीक का इस्तेमाल करने का एक बेहद साहसिक, चुनौतीपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया, जिसने इस पूरे ऑपरेशन की दिशा और परिणाम को ही बदल कर रख दिया।

एसएन मेडिकल कॉलेज के ऑपरेशन थियेटर में बीटिंग हार्ट तकनीक से दिल की धमनियों का ब्लॉकेज खोलते डॉक्टर्स

क्या है ‘बीटिंग हार्ट’ तकनीक और कैसे 3 घंटे में हुआ चमत्कार?

आम जनता और चिकित्सा विज्ञान के छात्रों के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि ‘बीटिंग हार्ट बायपास सर्जरी’ आखिर होती क्या है और यह सामान्य ओपन हार्ट सर्जरी से इतनी अलग और खास क्यों है। दरअसल, पारंपरिक बायपास सर्जरी में मरीज के दिल को कुछ समय के लिए पूरी तरह से धड़कना बंद कर दिया जाता है (Cardiac Arrest Inducement) और उस दौरान शरीर में खून का संचार एक बाहरी ‘हार्ट-लंग मशीन’ (Heart-Lung Machine) के जरिए किया जाता है। यह कृत्रिम प्रक्रिया मरीज के शरीर, मस्तिष्क और गुर्दों के लिए काफी तनावपूर्ण होती है और इसमें रिकवरी का समय भी बहुत ज्यादा लगता है।

लेकिन, ‘बीटिंग हार्ट’ या ओपीसीएबीजी (Off-Pump Coronary Artery Bypass Grafting) तकनीक में दिल को बिना रोके, यानी धड़कती हुई अवस्था में ही बायपास सर्जरी को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ अंजाम दिया जाता है। 13 अप्रैल 2026 की रात को यह ऐतिहासिक सर्जरी एसएन मेडिकल कॉलेज के अत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर में शुरू हुई। डॉ. सुशील सिंघल और उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने धड़कते हुए दिल के उसी विशिष्ट हिस्से को ‘ऑक्टोपस’ (Octopus Tissue Stabilizer) नामक एक विशेष उपकरण की मदद से स्थिर किया, जहां ब्लॉकेज था। इसके बाद शरीर के दूसरे हिस्से (पैरों या छाती) से ली गई स्वस्थ नसों (Grafts) को वहां बेहद सावधानी से जोड़ दिया गया, ताकि दिल की मांसपेशियों तक खून का प्रवाह सुचारू रूप से दोबारा शुरू हो सके। यह बेहद जटिल, एकाग्रता वाली और बारीक सर्जरी करीब 3 घंटे तक लगातार चली। इस तकनीक का सबसे बड़ा और चमत्कारी फायदा यह रहा कि इसमें हार्ट-लंग मशीन का इस्तेमाल नहीं हुआ, जिससे रतन लाल के शरीर पर कोई अतिरिक्त दुष्प्रभाव नहीं पड़ा।

सर्जरी के बाद आईसीयू में अपनी टीम के साथ मरीज की मॉनिटरिंग करते डॉ सुशील सिंघल

72 घंटे में रिकॉर्ड डिस्चार्ज और ‘असाध्य रोग योजना’ का वरदान

इस आधुनिक और जटिल सर्जरी की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल ऑपरेशन की सफलता तक सीमित नहीं थी, बल्कि ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी का समय भी एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड बन गया। डॉ. सुशील सिंघल ने इस सफलता पर मीडिया से बातचीत करते हुए विशेष टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि ‘बीटिंग हार्ट’ तकनीक के इस्तेमाल के कारण मरीज के शरीर को कृत्रिम मशीनों का सदमा नहीं झेलना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उसकी तीव्र रिकवरी (Rapid Recovery) हुई है। रतन लाल शर्मा को सर्जरी के तीसरे ही दिन (POD-2 और कुछ घंटे) पूरी तरह से स्वस्थ, सचेत और दर्दमुक्त घोषित कर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। आमतौर पर पूरी दुनिया के बड़े से बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों में भी बायपास सर्जरी के बाद किसी भी मरीज को कम से कम 5 से 7 दिन तक सघन निगरानी (ICU) और वार्ड में रखा जाता है। एसएन मेडिकल कॉलेज में सर्जरी की यह अभूतपूर्व सटीकता साबित करती है कि सरकारी अस्पतालों में भी विश्व स्तरीय इलाज संभव है।

रतन लाल शर्मा और उनके पूरे परिवार के लिए यह दिन एक दोहरी खुशी और बहुत बड़े चमत्कार का मौका लेकर आया। एक तरफ जहां मौत के मुंह से वापस आकर उन्हें नया जीवन मिला, वहीं दूसरी तरफ उनके परिवार का इस महंगे इलाज पर एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ। रतन लाल के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और विडंबना यह थी कि उनके पास भारत सरकार का ‘आयुष्मान कार्ड’ (Ayushman Card) भी मौजूद नहीं था। आमतौर पर किसी भी निजी या बड़े कॉर्पोरेट अस्पताल में इस ‘बीटिंग हार्ट बायपास सर्जरी’ का कुल खर्च कम से कम 3 से 4 लाख रुपये तक आता है। इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करना एक गरीब परिवार के लिए असंभव था और यह उन्हें हमेशा के लिए भारी कर्ज में डुबो सकता था। लेकिन, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही “असाध्य रोग योजना” (Asadhya Rog Yojana) इस बेबस परिवार के लिए एक बहुत बड़ा और जीवनरक्षक वरदान साबित हुई। इसी कल्याणकारी सरकारी योजना के तहत, बिना किसी कार्ड के उनका पूरा इलाज, दवाइयां और यह बेहद महंगी सर्जरी बिल्कुल निशुल्क (Free of Cost) की गई। इस कदम ने गरीबों के मन में सरकारी तंत्र के प्रति एक नया और अटूट विश्वास पैदा किया है।

एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ प्रशांत गुप्ता अपनी टीम के साथ इस ऐतिहासिक सफलता पर चर्चा करते हुए

दिल्ली जाने की मजबूरी खत्म, एसएनएमसी की सामूहिक जीत

इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अवसर पर एसएन मेडिकल कॉलेज के ऊर्जावान प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने सीटीवीएस विभाग और पूरी एनेस्थीसिया टीम को इस बड़ी उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने अपना कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “यह महान उपलब्धि न केवल हमारे मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्रीय सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में आम जनता के बढ़ते अटूट विश्वास का सबसे बड़ा प्रमाण भी है। एस.एन. मेडिकल कॉलेज में हृदय की पहली बीटिंग हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक होना पूरे संस्थान की एक सामूहिक मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति का नतीजा है।” डॉ. प्रशांत गुप्ता ने जोर देकर कहा कि अब उनका मुख्य विजन (Vision) और लक्ष्य यही है कि आगरा और आस-पास के जनपदों के मरीजों को गंभीर हृदय रोगों के इलाज के लिए दिल्ली, गुड़गांव या अन्य बड़े महानगरों के महंगे अस्पतालों में धक्के खाने की बिल्कुल भी आवश्यकता न पड़े। आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज अब हर तरह की विश्व स्तरीय सर्जरी के लिए पूरी तरह से तैयार और सक्षम है।

डॉ. सुशील सिंघल ने इस भारी सफलता का पूरा श्रेय अपनी पूरी टीम की दिन-रात की कड़ी मेहनत और प्राचार्य के निरंतर सहयोग को दिया। इस तीन घंटे लंबे और जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली सीटीवीएस (CTVS) सर्जन टीम में डॉ. सुशील सिंघल के साथ डॉ. शिव, डॉ. सुलभ गर्ग और डॉ. आरती शामिल रहीं। वहीं, धड़कते दिल की सर्जरी में सबसे अहम भूमिका निभाने वाली एनेस्थीसिया (Anesthesia) एवं क्रिटिकल केयर जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी डॉ. अपूर्वा मित्तल, डॉ. योगिता, डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. अमिता, डॉ. रोहन, डॉ. अखिल और डॉ. विकास यादव ने बहुत ही शानदार तरीके से निभाई। इस दौरान ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू में सहयोगी स्टाफ के रूप में सिस्टर प्रमिला, श्वेता, सुमन, प्रिया और सहायक सचिन व मोनू का भी विशेष एवं सराहनीय योगदान रहा। मीडिया प्रभारी अधिकारी डॉ. प्रीति भारद्वाज ने इस पूरी जानकारी को मीडिया के साथ साझा करते हुए बताया कि यह गौरवशाली कदम आगरा के चिकित्सा इतिहास में हमेशा के लिए स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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