गोरखपुर: महिला हॉस्टल में घुसे पुरुष प्रोफेसर, भड़कीं सैकड़ों छात्राएं, 4 घंटे तक गेट पर चला भारी बवाल

Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Thursday, April 16, 2026, 01:45:30 AM IST

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गोरखपुर: किसी भी शैक्षणिक संस्थान में महिला छात्रावास (Girls Hostel) को छात्राओं के लिए सबसे सुरक्षित और निजी स्थान माना जाता है। वहां किसी भी पुरुष का प्रवेश सख्त नियमों के तहत वर्जित होता है। लेकिन, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित प्रतिष्ठित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) में बुधवार को एक ऐसी घटना घटी, जिसने छात्राओं की निजता और सुरक्षा पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास में एक पुरुष प्रोफेसर के अचानक घुस जाने से सैकड़ों छात्राएं बुरी तरह से भड़क उठीं। आक्रोशित छात्राओं ने दोपहर बाद विश्वविद्यालय के मुख्य गेट (Main Gate) पर भारी संख्या में इकट्ठा होकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्राओं का सीधा और गंभीर आरोप था कि प्रशासनिक पद पर बैठे उक्त प्रोफेसर ने बिना किसी पूर्व सूचना के हॉस्टल के अंदर प्रवेश किया और छात्राओं के कमरों के दरवाजे खटखटाए। यह हंगामा करीब चार घंटे तक लगातार चलता रहा। स्थिति को बेकाबू होता देख विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस महकमे में भारी हड़कंप मच गया। अंततः, कुलपति के कड़े आश्वासन और एक उच्च स्तरीय जांच समिति के गठन के बाद ही छात्राओं का यह भारी आक्रोश शांत हो सका।

HIGHLIGHTS
  1. एमएमएमयूटी में भारी बवाल: गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पुरुष प्रोफेसर के महिला हॉस्टल में घुसने पर छात्राओं ने किया जोरदार प्रदर्शन।
  2. निजता के हनन का गंभीर आरोप: छात्राओं का आरोप है कि प्रोफेसर ने उनके कमरों के दरवाजे नॉक किए, जबकि वे अपने निजी घरेलू कपड़ों में मौजूद थीं।
  3. कार्यक्रम में जाने का था दबाव: यह पूरी घटना शहर के एक शैक्षणिक कार्यक्रम में छात्राओं को जबरन भेजने के दबाव के चलते घटित हुई।
  4. कुलपति ने बिठाई उच्च स्तरीय जांच: 4 घंटे चले हंगामे के बाद वीसी प्रो. जेपी सैनी ने जांच समिति गठित कर एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है।

शैक्षणिक कार्यक्रम का दबाव और महिला हॉस्टल में अनुचित प्रवेश

इस पूरे विवाद की जड़ शहर में आयोजित हो रहा एक शैक्षणिक कार्यक्रम था। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एमएमएमयूटी (MMMUT) के सभी छात्र-छात्राओं को उस विशेष कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए थे। हालांकि, कई छात्राएं व्यक्तिगत कारणों या पढ़ाई की व्यस्तता के चलते उस कार्यक्रम में जाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थीं। जब प्रशासन को यह भनक लगी कि छात्राएं कार्यक्रम में नहीं जा रही हैं, तो अधिकारियों ने दबाव बनाने की रणनीति अपनाई।

बुधवार दोपहर करीब पौने दो बजे (1:45 PM), विश्वविद्यालय में एक अहम प्रशासनिक पद पर तैनात एक पुरुष प्रोफेसर कुछ महिला वार्डन और गार्ड्स को अपने साथ लेकर सीधे महिला छात्रावास के अंदर पहुंच गए। आमतौर पर, किसी आपातकालीन स्थिति के अलावा पुरुष स्टाफ का महिला हॉस्टल के अंदर जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित होता है। लेकिन, नियमों को ताक पर रखते हुए प्रोफेसर हॉस्टल के गलियारों (Corridors) में पहुंच गए। छात्राओं का आरोप है कि प्रोफेसर ने खुद उनके कमरों के दरवाजे जोर-जोर से खटखटाए और उन्हें तुरंत बाहर आकर कार्यक्रम में जाने का कड़ा फरमान सुनाया।

घरेलू कपड़ों में थीं छात्राएं, निजता के हनन पर फूटा गुस्सा

हॉस्टल का कमरा किसी भी छात्रा के लिए उसका सबसे निजी स्थान (Personal Space) होता है। दोपहर के समय अधिकतर छात्राएं अपनी क्लास खत्म करके हॉस्टल लौट चुकी थीं और वे अपने आरामदायक घरेलू कपड़ों में थीं। ऐसे में अचानक किसी पुरुष प्रोफेसर के दरवाजे पर आ जाने और नॉक करने से लड़कियां पूरी तरह से असहज और स्तब्ध रह गईं। छात्राओं के लिए यह केवल नियम तोड़ने का मामला नहीं था, बल्कि यह उनके सम्मान और निजता (Privacy) का घोर उल्लंघन था।

इस अप्रत्याशित और अनुचित व्यवहार से छात्राओं के अंदर सुलग रहा गुस्सा अचानक ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा। दोपहर करीब तीन बजे, देखते ही देखते हॉस्टल की सैकड़ों छात्राएं अपने कमरों से बाहर निकल आईं। उन्होंने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट की तरफ कूच कर दिया। वहां पहुंचकर उन्होंने प्रशासन और उस आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। छात्राओं की स्पष्ट मांग थी कि इस तरह महिला हॉस्टल में घुसने वाले प्रोफेसर के खिलाफ तुरंत और बेहद कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

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4 घंटे चला हंगामा, पुलिस और वीसी को करना पड़ा मान-मनौव्वल

सैकड़ों छात्राओं के उग्र प्रदर्शन की खबर मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए स्थानीय पुलिस बल को भी तुरंत मौके पर बुला लिया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice-Chancellor) प्रो. जेपी सैनी खुद हालात का जायजा लेने और छात्राओं को शांत करने के लिए मुख्य गेट पर पहुंच गए। कुलपति ने आक्रोशित छात्राओं का मान-मनौव्वल करने की काफी कोशिश की, लेकिन छात्राएं अपनी मांग पर पूरी तरह से अड़ी रहीं। वे किसी भी कीमत पर उस प्रोफेसर के खिलाफ लिखित कार्रवाई से कम पर मानने को तैयार नहीं थीं।

गेट पर लगातार चार घंटे तक चले इस भारी बवाल के बाद, प्रशासन ने समझदारी दिखाते हुए छात्राओं के एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया। कुलपति प्रो. जेपी सैनी और विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने छात्राओं के साथ एक लंबी मीटिंग की। इस मीटिंग में छात्राओं ने अपनी सुरक्षा और निजता से जुड़ी चिंताओं को बहुत ही मजबूती के साथ प्रशासन के सामने रखा। उन्होंने उस आरोपी प्रोफेसर के अनुचित व्यवहार की एक विस्तृत लिखित शिकायत (Written Complaint) भी कुलपति को सौंपी।

जांच समिति गठित, एक सप्ताह में मांगी गई रिपोर्ट

छात्राओं की लिखित शिकायत और मामले की अत्यधिक संवेदनशीलता को देखते हुए कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने तुरंत एक उच्च स्तरीय जांच समिति (Inquiry Committee) का गठन कर दिया है। इस समिति को पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करके ठीक एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। कुलपति ने सभी छात्राओं को यह पक्का आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी के खिलाफ पूरी तरह से न्यायोचित और कठोर कार्रवाई की जाएगी। हॉस्टल के नियमों का उल्लंघन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कुलपति के इस लिखित और स्पष्ट आश्वासन के बाद ही छात्राओं का गुस्सा कुछ शांत हुआ। शाम करीब सात बजे (7:00 PM) छात्राएं अपना प्रदर्शन खत्म करके वापस अपने हॉस्टल लौट गईं। हालांकि, इस पूरे मामले पर मीडिया द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति का आधिकारिक पक्ष जानने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन फिलहाल उनकी तरफ से कैमरे पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया है। यह घटना सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक बड़ा सबक है कि छात्र-छात्राओं पर किसी भी कार्यक्रम का अनुचित दबाव बनाना और उनकी निजता का हनन करना कभी भी एक बहुत बड़े और हिंसक विवाद को जन्म दे सकता है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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