अग्रवाल महासभा आगरा के चुनाव पर गहराया कानूनी संकट: चुनाव समिति की मनमानी के खिलाफ उप निबंधक कार्यालय पहुंचे 45 सदस्य

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Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Saturday, 30 May 2026, 12:32:15 PM IST

आगरा: ताजनगरी की अत्यंत प्रतिष्ठित और संभ्रांत वैश्य संस्था अग्रवाल महासभा आगरा के भीतर पिछले कुछ समय से चल रहा अंदरूनी गतिरोध अब पूरी तरह से खुलकर सड़क पर आ गया है। महासभा की विगत दिनों संपन्न हुई चुनावी प्रक्रिया और गत सप्ताह आयोजित किए गए भव्य शपथ ग्रहण कार्यक्रम की वैधानिकता पर अब सीधे तौर पर गंभीर विधिक सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव समिति द्वारा शुरू से ही अपनाई गई कथित गैर-संवैधानिक कार्यप्रणाली, भारी अनियमितताओं और मनमानी से नाराज होकर संस्था के पैंतालीस (45) से अधिक प्रतिष्ठित सदस्यों और विभिन्न पदों के प्रत्याशियों ने एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। इस आंतरिक विवाद ने उस समय अत्यंत गंभीर रूप धारण कर लिया, जब महासभा के नाराज सदस्यों ने सामूहिक रूप से हस्ताक्षरित एक विस्तृत एवं वृहद शिकायती पत्र सीधे उप निबंधक (फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स फंड) कार्यालय को सौंपकर पूरी चुनाव प्रक्रिया को असंवैधानिक घोषित करने और उसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग रख दी। इस कदम के बाद से ही समाज के प्रबुद्ध वर्गों और राजनीतिक हलकों में खलबली मची हुई है।

HIGHLIGHTS
  1. आंतरिक गतिरोध: अग्रवाल महासभा आगरा की चुनावी वैधानिकता पर उठे सवाल, नाराज धड़े ने उप निबंधक कार्यालय का खटखटाया दरवाजा।
  2. सामूहिक मोर्चा: चुनावी अनियमितताओं के विरुद्ध पैंतालीस (45) से अधिक समाजसेवियों के सामूहिक हस्ताक्षर युक्त शिकायती पत्र से मचा हड़कंप।
  3. जवाबदेही से इंकार: पूर्व में दिए गए कानूनी नोटिस और शिकायतों का चुनाव समिति द्वारा कोई संतोषजनक उत्तर न देने का गंभीर आरोप।
  4. गहन विधिक जांच: पूर्व में भी चार से पांच अग्र बंधुओं ने व्यक्तिगत रूप से दर्ज कराई है लिखित शिकायत, कार्यकारिणी पर मंडराया विधिक संकट।

पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि पर दृष्टि डालें तो अग्रवाल महासभा आगरा की नई कार्यकारिणी के गठन के लिए जब से चुनावी बिगुल फूंका गया था, तभी से मुख्य चुनाव समिति के फैसलों को लेकर सामान्य सदस्यों और दावेदारों के बीच गहरे मतभेद उत्पन्न होने लगे थे। आरोप है कि चुनाव समिति ने संस्था के मूल विधान, नियमावली और लोकतांत्रिक परंपराओं को पूरी तरह दरकिनार करके चुनिंदा लोगों को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से एकतरफा नीतियां तैयार कीं। मतदाता सूची के प्रकाशन से लेकर नामांकन पत्रों की जांच, आपत्तियों के निस्तारण और अंतिम मतदान के दिन तक हर स्तर पर भारी गड़बड़ियों और विसंगतियों के आरोप सामने आए हैं। इन कथित गैर-संवैधानिक हरकतों की वजह से महासभा के जागरूक सदस्यों और मैदान में उतरे कई वरिष्ठ प्रत्याशियों के भीतर लंबे समय से भयंकर आक्रोश पनप रहा था, जो अब एक कानूनी जंग में तब्दील होता दिख रहा है।

इस पूरे चुनावी विवाद में असंतोष की ज्वाला अचानक नहीं भड़की है। जब चुनाव प्रक्रिया के दौरान समिति द्वारा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं, तब सजग समाजसेवियों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव समिति को विधिक नोटिस भेजे थे। इसके अतिरिक्त, लिखित रूप से कई गंभीर शिकायतें भी दर्ज कराई गई थीं, जिनमें चुनावी विसंगतियों पर तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की गई थी। परंतु आरोप है कि अपने पद और अधिकारों के मद में चूर मुख्य चुनाव समिति ने इन विधिक नोटिसों और शिकायतों का कोई संज्ञान नहीं लिया। न तो कोई लिखित जवाब दिया गया और न ही पीड़ित प्रत्याशियों को अपना पक्ष रखने का कोई लोकतांत्रिक अवसर प्रदान किया गया। इस घोर प्रशासनिक और नैतिक विफलता के बाद, जब नाराज पक्ष ने देखा कि गत सप्ताह भारी विरोध के बावजूद आनन-फानन में नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण कार्यक्रम भी आयोजित कर दिया गया, तो उनका धैर्य पूरी तरह टूट गया।

संस्था के भीतर लोकतंत्र की हत्या और तानाशाही रवैये से आहत होकर आज कुलवंत मित्तल के नेतृत्व में दर्जनों अग्र बंधु और सम्मानित सदस्य लामबंद होकर सीधे सरकारी चौखट पर न्याय मांगने पहुंचे। उप निबंधक (चिट्स एंड फंड) को दिए गए व्यापक शिकायती पत्र में कुल 45 से अधिक सक्रिय और आजीवन सदस्यों के नाम व हस्ताक्षर शामिल हैं। इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई भी संस्था अपने पंजीकृत उपनियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करके फर्जी तरीके से चुनावों को अंजाम देती है, तो ऐसी कार्यकारिणी पूरी तरह अवैध है। सदस्यों ने उप निबंधक से आग्रह किया है कि चुनाव समिति के समस्त रिकॉर्ड, रसीदें, बैलेट पेपर और नामावली को तत्काल ज़ब्त कर एक स्वतंत्र जांच अधिकारी नियुक्त किया जाए ताकि पूरी सच्चाई समाज के सामने आ सके। इसके अतिरिक्त, इस बड़े शिकायती पत्र से ठीक पूर्व भी चार से पांच प्रतिष्ठित अग्र बंधुओं द्वारा व्यक्तिगत रूप से अपने स्तर पर साक्ष्यों के साथ लिखित शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि समाज का एक बड़ा वर्ग इस पूरी प्रक्रिया को खारिज कर चुका है।

अग्रवाल महासभा जैसी गौरवशाली और करोड़ों की चल-अचल संपत्तियों का प्रबंधन करने वाली बड़ी सामाजिक संस्था के इस तरह विवादों के घेरे में आने से पूरा अग्र समाज बेहद चिंतित है। समाज के वरिष्ठ बुजुर्गों का कहना है कि जो संस्था पूरे शहर के वैश्य समाज को एक सूत्र में पिरोने और समाज सुधार का कार्य करती है, उसी के शीर्ष पदों पर बैठने की लालसा में इस तरह असंवैधानिक और अपारदर्शी तरीके अपनाना अत्यंत निंदनीय है। उप निबंधक कार्यालय में दी गई इस शिकायत के बाद अब इस बात की पूरी संभावना प्रबल हो गई है कि वर्तमान में गठित की गई नई कार्यकारिणी को कारण बताओ नोटिस जारी हो सकता है, या फिर पूरी चुनाव प्रक्रिया को निरस्त कर नए सिरे से एडहॉक कमेटी (तदर्थ समिति) के माध्यम से चुनाव कराने के आदेश पारित हो सकते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर गहराई से जांच करने, असंतुष्ट सदस्यों के दावों को समझने और चुनाव समिति द्वारा की गई कथित विसंगतियों के पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने के लिए हमारे विशेष संवाददाता पूरी मुस्तैदी से जुटे हुए हैं। चूंकि मामला आगरा के सबसे प्रतिष्ठित समाज की सर्वोच्च संस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए पूरी निष्पक्षता बनाई रखने के लिए दोनों पक्षों के बयानों और साक्ष्यों को संकलित किया जा रहा है। इस संबंध में विस्तृत जांच और पूर्ण खोजी रिपोर्ट तैयार करने के लिए शिकायतकर्ता धड़े के मुख्य रणनीतिकार और वरिष्ठ समाजसेवी कुलवंत मित्तल से उनके आधिकारिक मोबाइल नंबर 9837135925 पर सीधे संपर्क किया जा सकता है। हमारे खोजी पत्रकार आगामी दो से तीन दिनों के भीतर समस्त कानूनी पहलुओं और उप निबंधक कार्यालय की प्राथमिक कार्रवाई का अध्ययन कर एक अत्यंत वृहद, तथ्यपरक और विस्फोटक खोजी रिपोर्ट (Investigative Report) पाठकों के समक्ष प्रकाशित करेंगे, जिससे इस पूरे चुनावी खेल के पीछे छिपे चेहरों का पर्दाफाश हो सकेगा।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Chief Editor, Taj News


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