Article Desk | tajnews.in | Friday, May 29, 2026, 01:17:58 PM IST


एवं राजनैतिक व्यंग्यकार
1. गाय-गोबर है चॉकलेटी
— विष्णु नागर
तुमसे न लड़ा जाएगा देश पर आए इस आर्थिक तूफान से। मोदी जी और उनके भाइयो-बहनों, तुम अब रहने दो। तुम्हें तूफान के समय घर में छिपना और ईश्वर से प्रार्थना करना आता है, लड़ना नहीं। लड़ोगे भी तो काली टोपी पहनकर डंडे से, इसलिए कृपया रहने दो। आजादी की लड़ाई के समय जब यह कृपा तुमने नहीं की थी, तो अब शरीर को क्यों कष्ट देते हो, रहने दो! देश मरता है तो मरने दो। तुम अपनी-अपनी मेलोनियों को मेलोडी चाकलेट खिलाना, मत भूलो!
हां तुम इतना अवश्य कर सकते हो कि इस आर्थिक तूफान से भारत को निकालने के लिए यज्ञ-हवन करो, जैसे कि तुमने ट्रंप और नेतन्याहू के लिए किया था। अब फिर करो। बार-बार करो। 7, लोक कल्याण मार्ग पर तो अवश्य ही करो। खूब शुद्ध घी और चंदन की लकड़ी की बलि देकर पूरे वातावरण को धुंआ-धुंआ कर दो, शायद इससे आर्थिक तूफान भी धुआं-धुआं हो जाए! इससे भी न रुके, तो तुम 11 हजार लीटर दूध, ढाई सौ साड़ियां और काजू-बादाम नर्मदा में बहा दो। हो सकता है, नर्मदा मैया इससे खुश हो जाएं और इस तूफान से देश को बाहर निकाल लें! मोदी जी से कहो कि कल से वे फिर मंदिरों के चक्कर लगाना शुरू कर दें। इस बार अपने लिए नहीं, देश की आर्थिक बहबूदी के लिए प्रार्थना करें। शायद इससे रास्ता निकल आए! और हां ताली-थाली बजाने का ट्राइड और टेस्टेड रास्ता तो है ही, उस पर चलें। भारत ने कोरोना संकट का ‘सफलतापूर्वक’ सामना तो इसी तरह किया था न! क्यों न आज रात नौ बजे से ही ताली-थाली अभियान शुरू कर दिया जाए! और हां, पश्चिम बंगाल में मदरसों में वंदे मातरम् के सभी छंद गाने का आदेश दिया गया है, उसके सकारात्मक प्रभाव से भी यह संकट दूर हो सकता है। मुसलमानों को बक़रीद चैन से मनाने न देने से भी आर्थिक तूफान, बांग्लादेश या पाकिस्तान की तरफ मुड़ जा सकता है। तुम कुछ और करोगे, मतलब आर्थिक उपाय करोगे, तो देश को और संकट में फंसा दोगे। वह तुम्हारा मार्ग नहीं है। वह तुम्हारा धर्म और कर्म नहीं है।
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ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, तूफान सामने है और तुम्हारा लीडर आज भी ‘विकसित भारत’ के नारे की कीचड़ में लिथड़ा पड़ा है। उसे अच्छी तरह मालूम है कि विकसित-टिकसित भारत न कुछ था, न कुछ है और न कुछ होने वाला है। अगली दस सदियों का भी उसे समय मिले तो वह ‘विकसित भारत’ नहीं बना सकता। बिलाशक वह इस देश को नफ़रत में विकासशील से ‘विकसित भारत’ की मंजिल तक पहुंचा सकता है। इसकी गरीबी का और ‘विकास’ कर सकता है। डालर अरबपतियों में देश को अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर सकता है। सरकारी स्कूल बंद करने की दिशा में उत्तरोत्तर विकास करते-करते वह एक दिन ऐसा ला सकता है, जब पूरे देश में एक भी सरकारी स्कूल न हो, एक भी सरकारी अस्पताल न हो, उनकी जगह आरएसएस की शाखाएं हों या ‘प्राचीन मंदिर’ हों! वह बचे-खुचे जंगल, जमीन और कारखानों को अडानी को भेंट करने की दिशा में सौ कदम और आगे बढ़ते हुए भारत को और अधिक ‘विकसित’ बना सकता है!
‘विकसित भारत’ यहां अवश्य बनेगा, क्योंकि विदेशी निवेशक यहां से भाग चुके हैं। जो अभी तक नहीं भागे हैं, वे सामान बांध चुके हैं। हजारों करोड़ रुपए, डालर का रूप धारण करके अमेरिका- चीन आदि मुल्कों में पधार चुके हैं। जिन्होंने इस देश के नागरिक के रूप में अनाप-शनाप धन बटोरा है, वे ‘विकसित भारत’ का संकल्प पूरा करने के लिए विदेशों की नागरिकता हर साल ग्रहण कर रहे हैं। बेशक इनमें से ज्यादातर भगवा हैं, ‘मोदी-मोदी’ हैं, मगर उन्हें पता है कि इस भगवा में, इस ‘मोदी-मोदी’ में उनका और उनकी संततियों का भविष्य सुरक्षित नहीं है। जब मोदी जी उनके ‘पितृ देश’ में आएंगे, तो ये भी ‘भारत की मां की जय’ बोलने आ जाएंगे। जरूरत पड़ी तो ‘मदर लैंड’ के लिए दो आंसू भी बहा देंगे। ‘मोदी-मोदी’ का नारा लगा जाएंगे। फिर वहां बस कर ये मोदी का ‘विकसित भारत’ बनाने की साधना करेंगे। और तो और, जो बड़े-बड़े अरबपति यहां अभी भी डटे and फंसे हुए हैं, वे भी अपना माल धीरे-धीरे विदेशों में खिसका रहे हैं, ताकि मोदी जी का ‘विकसित भारत’ का स्वप्न साकार हो सके।
तुम्हारे ‘विकसित भारत’ में इस आर्थिक तूफान से निकलने का रास्ता नहीं है, क्योंकि तुम्हारा फोकस हमेशा से छोटे-छोटे, घटिया-घटिया कामों पर रहता है। इसे-उसे परेशान करने का ‘संकल्प’ पूरा करने पर रहता है। देश संकट में है और तुम्हारी राज्य सरकारें इस बात पर आमादा हैं कि किसी भी तरह इस देश का मुसलमान बकरीद खुशी से मना न सके। पश्चिम बंगाल में चुनाव हो चुके हैं, भाजपा सरकार बन चुकी है, फिर भी चैन नहीं है। अभी भी एसआईआर के फंदे में लोगों का गला फंसाने का अभियान जारी है। वंदे मातरम् के छहों छंद मदरसों के छात्रों से गवाने पर फोकस है। संकट कितना ही बड़ा हो, मगर उमर खालिद को छह साल बाद भी लंबी अवधि की जमानत न मिले, इस पर फोकस है। फोकस अडानी को जालसाजी के जंजाल से निकालने पर है। कई कंपनियों के दिवालिया होने के कगार पर हैं, मगर फोकस राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर है। इनका फोकस विपक्ष को नीचा दिखाने से हटता ही नहीं। दुनिया छूट जाए, मगर गाय और गोबर इनसे छूटना नहीं। मगर जब इनकी राजनीति की हवा निकालने के लिए पश्चिम बंगाल के मुसलमान गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग करते हैं, तो इनकी जीभ तालू से चिपक जाती है! एं-एं भी इनके मुंह से निकलता नहीं!

Pawan Singh
7579990777



