Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Wednesday, 27 May 2026, 11:13:16 PM IST

Agra River Connect Yamuna Supreme Court: ताजनगरी में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निरंतर सक्रिय संस्था ‘रिवर कनेक्ट अभियान’ ने देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा यमुना नदी की सफाई और पुनर्जीवन के लिए उठाए गए ऐतिहासिक कदम का जोरदार स्वागत किया है। अभियान से जुड़े पर्यावरण कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और नदी प्रेमियों ने बुधवार को एक सुर में कहा कि यह पहल वर्षों से सुस्त, संवेदनहीन और दिशाहीन नौकरशाही तंत्र को पूरी तरह से झकझोरने वाली साबित होगी, जो दशकों से यमुना को बचाने के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति करता रहा है। रिवर कनेक्ट अभियान के संयोजक बृज खंडेलवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार के गृह सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन एक बेहद महत्वपूर्ण और समयोचित निर्णय है। अदालत ने जिस स्पष्टता और कठोरता से यमुना को “सीवेज नाले में बदल चुकी नदी” बताया है, वह देश की पर्यावरणीय विफलताओं और सुस्त प्रशासनिक रवैये पर एक कड़ा तमाचा है।
संस्था द्वारा जारी विस्तृत विज्ञप्ति के अनुसार, यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि उत्तर भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और आर्थिक जीवनरेखा है। ब्रज क्षेत्र, आगरा, मथुरा, दिल्ली और अनगिनत प्राचीन शहरों की सभ्यता इसी पावन नदी के किनारे विकसित हुई है। लेकिन विडंबना यह है कि आज औद्योगिक कचरे के कारण यमुना जहरीले झाग, सीवर, खतरनाक रासायनिक तत्वों और अवैध अतिक्रमणों के भारी बोझ तले कराह रही है। पर्यावरणविदों का कहना है कि दशकों से करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी धरातल पर कोई बदलाव नहीं दिखा है।
Brief Highlights
- • Mathura Mass Suicide: मथुरा के खप्पर पुर गांव में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत.
- • मृतकों में पति-पत्नी और तीन बच्चे शामिल, जहरीला पदार्थ खाने से गई जान.
- • दीवार पर मिला सुसाइड नोट: ‘अपनी इच्छा से आत्महत्या कर रहा हूं’.
- • मृतका के पिता ने भाई से विवाद की आशंका जताई, पुलिस जांच में जुटी.
- • Mathura Mass Suicide केस में फॉरेंसिक टीम ने जुटाए अहम सबूत.
अभियान ने कहा कि अब समय केवल कागजी योजनाओं, बैठकों और बड़ी घोषणाओं का नहीं है, बल्कि धरातल पर कठोर और साहसिक फैसले लेने का है। नदी तटों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों (फ्लड ज़ोन) से पक्के अवैध अतिक्रमण हटाना, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को तत्काल प्रभाव से बंद करना, बिना शोधन के नदी में गिर रहे गंदे नालों को रोकना और नदी की मुख्य धारा में न्यूनतम प्राकृतिक जल प्रवाह सुनिश्चित करना अब टाला नहीं जा सकता। यदि विधिक रूप से इन कड़े कदमों को तुरंत नहीं उठाया गया, तो ताजनगरी की ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर भी संकट गहरा सकता है।
यमुना कनेक्ट अभियान ने सुप्रीम कोर्ट की उस कड़ी टिप्पणी का भी स्वागत किया, जिसमें विभिन्न सरकारी एजेंसियों को “अलग-अलग खेमों में बंद होकर काम करने वाला” बताया गया है। अभियान के कार्यकर्ताओं के अनुसार, स्थानीय नगर निकाय, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल संस्थान, सिंचाई विभाग और विकास प्राधिकरण वर्षों से एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे हैं। जब भी प्रदूषण को लेकर सवाल उठता है, ये विभाग एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल देते हैं, जबकि इनके इसी गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण नदी लगातार दम तोड़ती रही।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पुरजोर मांग की है कि प्रस्तावित यमुना एक्शन प्लान का दायरा केवल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक ही सीमित न रखा जाए, बल्कि इसमें |हिमालय से प्रयागराज तक के पूरे यमुना बेसिन को शामिल किया जाए। विशेष रूप से ब्रज मंडल के आगरा और मथुरा क्षेत्र में सूखती जा रही जलधारा, अवैध रेत खनन, तेजी से गिरते भूजल स्तर और औद्योगिक रासायनिक प्रदूषण की गंभीर समस्या को इस कार्ययोजना में शीर्ष प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अभियान के पदाधिकारियों ने अंत में स्पष्ट किया कि अदालत की यह ऐतिहासिक पहल तभी पूरी तरह सफल होगी जब इसमें जनभागीदारी को केंद्र में रखा जाएगा। केवल वातानुकूलित कमरों में होने वाली सरकारी फाइलों और उच्च स्तरीय बैठकों से यमुना दोबारा जीवित नहीं होगी। इसके लिए व्यापक समाज, संत समुदाय, पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों को साथ लेकर एक मजबूत जनआंदोलन खड़ा करना होगा। रिवर कनेक्ट अभियान ने आशा व्यक्त की है कि सुप्रीम कोर्ट की निरंतर निगरानी में तैयार होने वाली यह वृहद कार्ययोजना यमुना को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित होगी, जिससे आने वाली पीढ़ियों को एक जीवित, निर्मल और अविरल यमुना का प्राकृतिक उपहार मिल सकेगा।

Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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