Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Wednesday, 27 May 2026, 01:29:41 PM IST

आगरा: एक विदेशी पर्यटक की शिकायत ने आगरा शहर की उस सच्चाई को सामने ला दिया है, जिसे यहां का आम नागरिक रोज महसूस करता है लेकिन शायद अब उसकी आदत पड़ चुकी है। सवाल केवल इतना नहीं कि एक विदेशी पर्यटक पैदल चलते हुए असुरक्षित महसूस कर रहा था। असली सवाल यह है कि क्या आगरा जैसे बड़े पर्यटन शहर में पैदल चलना अब एक जोखिम भरा काम बन चुका है?
देशभर में लगातार ईंधन बचाने, प्रदूषण कम करने और निजी वाहनों का कम उपयोग करने की अपील की जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार ऊर्जा संरक्षण और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की बात कह चुके हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब कोई नागरिक सच में पैदल चलना चाहता है, तो हमारे शहर उसे सुरक्षित रास्ता तक नहीं दे पाते।
आगरा जैसे शहर में, जहां हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं, फुटपाथ या तो टूटे हुए मिलते हैं, या फिर उन पर अतिक्रमण और पार्किंग का कब्जा दिखाई देता है। कई इलाकों में फुटपाथ नाम की चीज बची ही नहीं है। कहीं दुकानदारों का सामान फैला है, कहीं अवैध ठेले खड़े हैं, तो कहीं बाइक और कारें पार्क कर दी जाती हैं। ऐसे में पैदल यात्री मजबूरी में सड़क पर चलते हैं, जहां तेज रफ्तार ट्रैफिक उनके लिए लगातार खतरा बना रहता है।
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के अधिकांश शहरों की सड़क डिजाइन “वाहन केंद्रित” हो चुकी है। सड़क बनाते समय सबसे पहले गाड़ियों के लिए जगह तय होती है, फिर पार्किंग, फिर ट्रैफिक और सबसे अंत में पैदल यात्री को याद किया जाता है। यही वजह है कि बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और दिव्यांग लोग शहर में सुरक्षित आवाजाही को लेकर सबसे ज्यादा परेशान रहते हैं।
आगरा में ताजमहल, फतेहपुर सीकरी और अन्य पर्यटन स्थलों के आसपास भी पैदल चलने वालों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित व्यवस्था नहीं दिखाई देती। कई विदेशी पर्यटक सोशल मीडिया और ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर यह शिकायत कर चुके हैं कि शहर की सड़कें पैदल यात्रियों के लिए अनुकूल नहीं हैं। इससे पर्यटन शहर की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी असर पड़ता है।
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- • ताजमहल मार्ग पर टूटी पाइपलाइन और जलभराव से बढ़ीं पर्यटकों की मुश्किलें।
- • आगरा में ट्रैफिक अव्यवस्था और अवैध पार्किंग पर लगातार उठ रहे सवाल।
- • प्रदूषण कम करने के लिए पैदल और साइकिल फ्रेंडली शहरों की बढ़ी मांग।
विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि सरकारें वास्तव में तेल बचाना और प्रदूषण घटाना चाहती हैं, तो सबसे पहले शहरों को “वॉकिंग फ्रेंडली” बनाना होगा। सुरक्षित फुटपाथ, पैदल क्रॉसिंग, ट्रैफिक नियंत्रण और अतिक्रमण मुक्त रास्ते केवल सुविधा नहीं, बल्कि शहरी जीवन की बुनियादी जरूरत हैं।
आगरा की यह घटना केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि उस सोच का आईना है जिसमें गाड़ियों को प्राथमिकता और पैदल यात्रियों को बोझ समझा जाता है। जब तक शहरों की योजना में इंसान को केंद्र में रखकर विकास नहीं होगा, तब तक “ईंधन बचाइए” जैसे संदेश अधूरे ही रहेंगे।
सवाल सीधा है — अगर सड़क पर पैदल चलना ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो आखिर लोग गाड़ियों का इस्तेमाल कम कैसे करेंगे?

Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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