Uttar Pradesh Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Friday, 12 June 2026, 03:20:09 PM IST

मथुरा/आगरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के सौंख क्षेत्र से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला और मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला एक अत्यंत सनसनीखेज विधिक मामला प्रकाश में आया है। यहाँ तीन महीने पूर्व दफन की गई एक वर्षीय मासूम बच्ची के शव को पुलिस प्रशासन ने विधिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में जमीन से वापस निकाला है। यह विधिक और ऐतिहासिक कार्रवाई न्यायालय के कड़े आदेश पर अमल में लाई गई है ताकि यह विधिक रूप से साफ हो सके कि मृत बच्ची वास्तव में उसके पति की थी या फिर महिला के सगे पिता (नाना) की। दरअसल, विवाहिता ने अपने सगे पिता पर बंधक बनाकर नशीला पदार्थ देने और लगातार विधिक रूप से बलात्कार करने का अत्यंत गंभीर आरोप लगाया था। विवाहिता का दावा है कि इस दुष्कर्म के परिणामस्वरूप ही उसने इस बच्ची को जन्म दिया था। इस उलझे हुए और रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले का विधिक सत्य सामने लाने के लिए आगरा पुलिस की एक विशेष टीम मथुरा के सौंख क्षेत्र में पहुँची और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की देखरेख में शव को निकालकर विधिक डीएनए (DNA) जांच और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
इस विधिक मामले की पृष्ठभूमि और पुलिस सूत्रों से प्राप्त विधिक विवरण के अनुसार, आगरा के एक थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती का विवाह करीब तीन वर्ष पूर्व मथुरा जनपद के एक गांव के रहने वाले युवक के साथ विधिक रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था। विवाह के बाद सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन शादी के लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद विवाहिता ने अचानक अपने सगे पिता के खिलाफ आगरा के स्थानीय थाने में एक अत्यंत गंभीर विधिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। विवाहिता ने पुलिस को दी गई विधिक तहरीर में आरोप लगाया था कि उसका सगा पिता मायके में उसे जबरन नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ विधिक रूप से प्रतिबंधित शारीरिक संबंध स्थापित करता था। महिला ने चौंकाने वाला विधिक दावा किया कि इसी विधिक प्रताड़ना और दुष्कर्म के कारण वह गर्भवती हुई और उसने एक सुंदर बच्ची को जन्म दिया। इस विधिक शिकायत के बाद से ही आगरा पुलिस इस मामले में लगातार कानूनी तफ्तीश कर रही थी और यह संवेदनशील प्रकरण वर्तमान समय में विधिक न्यायालय के विचाराधीन चल रहा है।
इसी विधिक विवाद और अदालती कार्यवाही के बीच, इसी साल मार्च 2026 के महीने में एक अत्यंत दुखद दुर्घटना घटित हुई। अपने ननिहाल या पिता के घर पर रह रही यह एक वर्षीय मासूम बच्ची अचानक रसोई में रखे खौलते हुए गर्म दूध के बर्तन की चपेट में आ गई, जिससे वह विधिक रूप से गंभीर रूप से झुलस गई। बच्ची की हालत नाजुक होने के कारण स्थानीय डॉक्टरों ने उसे तत्काल उच्च स्तरीय चिकित्सा के लिए राजस्थान के जयपुर स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल के लिए विधिक रूप से रेफर कर दिया। जयपुर में कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ते हुए आखिरकार इस मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया। बच्ची की असमय मृत्यु के बाद, परिजनों ने विधिक नियमों और हिंदू धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए मासूम के पार्थिव शरीर को मथुरा के सौंख क्षेत्र के अंतर्गत विधिक रूप से जमीन में दफन कर उसकी अंत्येष्टि कर दी थी।
मासूम की मौत के बाद भी आगरा की विधिक अदालत में पिता के खिलाफ चल रहे इस संगीन मुकदमे की सुनवाई लगातार जारी रही। विधिक बहस और साक्ष्यों के अवलोकन के दौरान, मामले के विधिक निस्तारण और वैज्ञानिक सत्यता का पता लगाने के लिए विधिक न्यायालय ने एक कड़ा और ऐतिहासिक आदेश जारी किया। अदालत ने आदेश दिया कि मृत बच्ची के जैविक पिता का विधिक निर्धारण करने के लिए उसका डीएनए (DNA) टेस्ट कराया जाना अत्यंत आवश्यक है। इस विधिक आदेश के अनुपालन के तहत, बृहस्पतिवार को आगरा पुलिस की एक विशेष खोजी टीम मथुरा पहुँची। स्थानीय पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की विधिक मौजूदगी में, दफन किए जाने के ठीक तीन महीने बाद बच्ची के शव को पूरे विधिक सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ जमीन से बाहर निकाला गया।
इस संवेदनशील विधिक कार्रवाई के संबंध में जानकारी देते हुए क्षेत्रीय पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) अनिल कुमार सिंह ने बताया कि आगरा पुलिस विधिक न्यायालय के लिखित आदेश पत्र के साथ मथुरा आई थी। विधिक और प्रशासनिक प्रक्रिया को पूर्ण करने के बाद, मजिस्ट्रेट की देखरेख में सौंख क्षेत्र से बच्ची के शव को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। शव को तुरंत फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम विधिक लैब भेजा गया है, जहाँ से डीएनए सैंपल लेकर उसे लखनऊ या हैदराबाद की केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) भेजा जाएगा। इस डीएनए विधिक परीक्षण की रिपोर्ट आने के बाद ही वैज्ञानिक और विधिक रूप से यह पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि इस घिनौने अपराध का असली दोषी कौन है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक अत्यंत विधिक और तकनीकी मामला है, जिसमें डीएनए साक्ष्य ही अदालत में अंतिम और अकाट्य विधिक प्रमाण माना जाएगा, और उसी के आधार पर आरोपी पिता को विधिक रूप से कठोरतम सजा दिलाई जाएगी।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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