Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Monday, 25 May 2026, 05:02:48 PM IST

SN Medical College Neurosurgery Success के तहत ताजनगरी के ऐतिहासिक सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी विंग ने चिकित्सा जगत में एक अभूतपूर्व और चमत्कारी सफलता अर्जित की है। न्यूरोसर्जरी विभाग और क्रिटिकल केयर आईसीयू (ICU) टीम के संयुक्त और भगीरथ प्रयासों के चलते एक भीषण सड़क दुर्घटना में मरणसन्न स्थिति में पहुंचे 23 वर्षीय युवक को 35 दिनों की कड़े चिकित्सकीय संघर्ष के बाद नया जीवन मिला है। प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, दयालबाग क्षेत्र के नगला पति का निवासी चंद्रप्रकाश राठौर एक दर्दनाक हादसे में सिर की गंभीर चोट का शिकार हो गया था, जिसके बाद उसे कोमा और गंभीर दौरों के चलते वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉक्टरों की टीम ने अत्यधिक आधुनिक जीवनरक्षक प्रणालियों और सटीक चिकित्सकीय योजना के बल पर मरीज को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के उपरांत सोमवार को जब युवक को अस्पताल से आधिकारिक रूप से छुट्टी दी गई, तो डॉक्टरों और परिजनों की आंखें खुशी से छलक उठीं।
4 अप्रैल की रात आपातकालीन वार्ड में आया था गंभीर केस, मस्तिष्कीय नसों में था भयंकर खिंचाव
विस्तृत घटनाक्रम के अनुसार, दयालबाग के नगला पति निवासी चंद्रप्रकाश राठौर विगत 4 अप्रैल 2026 की देर रात एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। राहगीरों और स्थानीय पुलिस की मदद से उन्हें अत्यंत गंभीर और अचेत अवस्था में एस.एन. मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन (इमरजेंसी) वार्ड में भर्ती कराया गया था। मरीज के सिर पर आई गंभीर बाहरी चोटों और आंतरिक रक्तस्राव को देखते हुए न्यूरोसर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों को तत्काल ड्यूटी पर बुलाया गया।
रेडियोलॉजी विभाग में जब त्वरित रूप से मरीज का एडवांस नॉन-कॉन्ट्रास्ट कंप्यूटेड टोमोग्राफी (NCCT Head) स्कैन किया गया, तो उसकी रिपोर्ट देखकर डॉक्टर भी चिंता में पड़ गए। चंद्रप्रकाश के मस्तिष्क के भीतर ‘डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी’ (DAI) नामक एक अत्यंत घातक और कड़वी चिकित्सीय स्थिति उत्पन्न हो चुकी थी। इस स्थिति में तेज झटके या दुर्घटना के कारण मस्तिष्क की मुख्य तंत्रिकाएं (एक्सॉन्स) बुरी तरह खिंच जाती हैं या टूट जाती हैं। इस जानलेवा मस्तिष्कीय विकार के कारण मरीज के पूरे शरीर में अनियंत्रित और अत्यधिक तीव्र मिर्गी के दौरे (Intractable Seizures) पड़ रहे थे, जिससे उसकी हृदय गति और रक्तचाप लगातार अनियंत्रित हो रहा था।
सुपर स्पेशलिटी आईसीयू में 24 घंटे कड़ा पहरा, तीन न्यूरोसर्जनों की निगरानी में चला इलाज
मरीज की जीवन रेखा को टूटते देख न्यूरोसर्जरी विभाग ने विधिक तत्परता बरतते हुए उसे तुरंत नवनिर्मित सुपर स्पेशलिटी आईसीयू (SS-ICU) के कड़े आइसोलेशन वार्ड में स्थानांतरित कर दिया। मस्तिष्कीय सूजन और मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टरों ने दवाओं का एक अत्यंत सटीक प्रोटोकॉल तैयार किया। चंद्रप्रकाश की हालत इतनी अधिक नाजुक थी कि वह हादसे के बाद से लगातार 25 दिनों तक गहरी कोमा की अवस्था में रहा। इस दौरान उसके फेफड़ों ने भी काम करना बंद कर दिया था, जिसके चलते क्रिटिकल केयर टीम को उसे पूरे 30 दिनों तक लाइफ सपोर्ट वेंटिलेटर प्रणाली पर रखना पड़ा।
इस अत्यंत चुनौतीपूर्ण और जटिल केस के सफल संचालन में न्यूरोसर्जरी विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टर गौरव धाकरे, डॉक्टर मयंक अग्रवाल और डॉक्टर तरुणेश शर्मा के त्रिस्तरीय रणनीतिक मार्गदर्शन ने मुख्य भूमिका निभाई। डॉक्टरों की इस विशेष विंग ने प्रतिदिन मरीज के मस्तिष्कीय दबाव (इंट्राक्रैनियल प्रेशर) की जांच की और दवाओं की खुराक को पल-पल की रिपोर्ट के अनुसार बदला। वहीं, दूसरी ओर आईसीयू प्रबंधन की कमान क्रिटिकल केयर विभाग के हेड डॉक्टर अतिहर्ष मोहन संभाल रहे थे। उनके कुशल नेतृत्व में पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सिंग डॉक्टरों ने चौबीसों घंटे चंद्रप्रकाश के जैविक मापदंडों (वाइटल्स) पर अपनी पैनी नजर बनाए रखी, ताकि इन्फेक्शन या मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर जैसी किसी भी कड़वी स्थिति को उत्पन्न होने से पहले ही रोका जा सके।
35 दिनों के संघर्ष के बाद सामान्य वार्ड में शिफ्ट, प्रिंसिपल डॉक्टर प्रशांत गुप्ता ने थपथपाई डॉक्टरों की पीठ
डॉक्टरों के अथक और निरंतर प्रयासों का परिणाम 35 दिनों के बाद एक बड़े चमत्कार के रूप में सामने आया। चंद्रप्रकाश की उंगलियों में हरकत शुरू हुई और उसने धीरे-धीरे अपनी आंखें खोल दीं। दवाओं के सटीक प्रभाव के कारण मिर्गी के अनियंत्रित दौरों पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया। न्यू



