Agra Desk, tajnews.in | Saturday, April 25, 2026, 06:45:30 PM IST

आगरा: ताजनगरी आगरा के प्रशासनिक ढांचे में अब सुस्ती और लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं बची है। जिले की कमान संभालते ही तेज-तर्रार जिलाधिकारी मनीष बंसल ने एक्शन मोड (Action Mode) में आते हुए विकास कार्यों की जमीनी हकीकत परखना शुरू कर दिया है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, शनिवार को जिलाधिकारी मनीष बंसल ने शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले सरोजनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज का औचक भौतिक निरीक्षण किया। यह औचक निरीक्षण कोई सामान्य दौरा नहीं था, बल्कि यह निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली का एक बेहद कड़ा ‘रिएलिटी चेक’ (Reality Check) था। जिलाधिकारी ने एसएन मेडिकल कॉलेज परिसर में निर्माणाधीन लेडी लॉयल अस्पताल विस्तारीकरण फेज-1, मेडिकल ब्लॉक और यूजी/पीजी हॉस्टल के निर्माण कार्यों में भारी लापरवाही, अधोमानक सामग्री और घोर लेटलतीफी पकड़ी है। प्रोजेक्ट की यह दुर्दशा देखकर जिलाधिकारी का कड़ा प्रशासनिक तेवर सामने आया। उन्होंने निर्माणदायी संस्थाओं और प्रोजेक्ट मैनेजर को कड़ी फटकार लगाते हुए 15 दिन का सख्त अल्टीमेटम (Ultimatum) दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि 15 दिनों के भीतर निर्माण की गति और गुणवत्ता में सुधार परिलक्षित नहीं हुआ, तो सीधे शासन को रिपोर्ट भेजकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। आइए, इस पूरे निरीक्षण और प्रशासन के जीरो-टॉलरेंस (Zero Tolerance) एक्शन का विस्तृत विश्लेषण करते हैं।
इमरजेंसी वार्ड और मरीजों की सुविधाओं का लिया जायजा
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने अपने इस सघन निरीक्षण की शुरुआत सबसे पहले एसएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी (Emergency) वार्ड से की। उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं के आधुनिकीकरण के दावों को जमीनी स्तर पर परखने का निर्णय लिया। जिलाधिकारी सीधे सर्जरी विभाग, अस्थि रोग (ऑर्थो), बाल रोग अनुभाग, पैथोलॉजी और क्रिटिकल केयर वार्ड में पहुंचे। वहां उन्होंने भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से ब्लड लैबोरेटरी, सीटी स्कैन (CT Scan) और ऑपरेशन थियेटर (OT) के सुचारू संचालन के संबंध में कड़े सवाल पूछे।

मरीजों से यह भी पूछा गया कि क्या उनसे इलाज या जांच के नाम पर कोई अतिरिक्त शुल्क (चार्ज) तो नहीं वसूला जा रहा है। प्रतिदिन आने वाले मरीजों की भारी संख्या को देखते हुए जिलाधिकारी ने डॉक्टरों को पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच में इमरजेंसी की व्यवस्थाएं काफी हद तक संतोषजनक पाई गईं। तत्पश्चात, जिलाधिकारी ने सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक (Super Specialty Block) का भी रुख किया। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर प्रशांत गुप्ता ने डीएम को बताया कि इस ब्लॉक में रेडियोलॉजी, डायलिसिस और न्यूरोलॉजी जैसी उच्च स्तरीय सुविधाएं दी जा रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, यहां इलाज कराने आने वाले लगभग 40 प्रतिशत मरीज आगरा के बाहर के जनपदों से आते हैं, जो इस संस्थान की क्षेत्रीय महत्ता को स्पष्ट करता है।

लेडी लॉयल विस्तारीकरण: 800 की जगह मिले सिर्फ 350 श्रमिक
अस्पताल की व्यवस्थाएं देखने के बाद जिलाधिकारी मनीष बंसल ने निर्माणाधीन लेडी लॉयल अस्पताल विस्तारीकरण फेज-1 और मेडिकल ब्लॉक का भौतिक निरीक्षण किया। साइट पर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले ले-आउट (Lay-out) और साइट प्लान का बारीकी से अध्ययन किया। जब उन्होंने प्रोजेक्ट के प्रारंभ होने और उसे पूर्ण करने की समय सीमा (Deadline) के बारे में पूछा, तो अधिकारियों ने बताया कि कार्य मई 2025 में शुरू हुआ था और इसे मई 2027 तक हर हाल में पूर्ण होना है। इसके बाद जब जिलाधिकारी ने मौके पर हुए कार्य की वास्तविक प्रगति पूछी, तो बताया गया कि अभी तक केवल 35 प्रतिशत कार्य ही हो पाया है। यह आंकड़ा सुनते ही जिलाधिकारी का कड़ा प्रशासनिक रूप सामने आ गया।

उन्होंने तुरंत निर्माणदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर (Project Manager) को तलब किया और इतनी धीमी प्रगति पर कड़ी फटकार लगाई। मैनेजर ने बचाव में बरसात का मौसम, एनजीटी (NGT) द्वारा 280 पेड़ों को हटाने में आया अवरोध और होली के त्योहार के बाद लेबर की कमी का बहाना बनाया। इस पर जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में पूछा कि होली का त्योहार बीते लगभग दो महीने हो चुके हैं, फिर भी श्रमिकों की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई गई? जांच में सामने आया कि जहां 800 श्रमिकों को कार्य करना चाहिए था, वहां मौके पर केवल 350 श्रमिक ही काम कर रहे थे। एसएन मेडिकल ब्लॉक में भी केवल 21 प्रतिशत प्रगति पाई गई। इस भारी लेटलतीफी पर जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा, “आज से दिन काउंट कर लीजिए, मैं दोबारा निरीक्षण करूंगा। 15 दिन में प्रगति परिलक्षित नहीं हुई तो शासन में आपके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही हेतु लिख कर भेज दिया जाएगा।”

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हॉस्टल निर्माण में मिला घटिया सामान, पिलर की खुली पोल
लेडी लॉयल के बाद जिलाधिकारी मनीष बंसल ने एसएन मेडिकल कॉलेज के निर्माणाधीन 7 मंजिला यूजी/पीजी हॉस्टल (UG/PG Hostel) का रुख किया। यहां की स्थिति देखकर जिलाधिकारी दंग रह गए। दो वर्षों में केवल 50 प्रतिशत कार्य ही हो पाया था। साइट इंचार्ज ने आगरा मेट्रो (Agra Metro) प्रोजेक्ट के कारण जमीन मिलने में 6 माह की देरी का बहाना बनाया। लेकिन जिलाधिकारी का ध्यान सिर्फ देरी पर नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता पर भी था। उन्होंने स्वयं निर्माण स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और हॉस्टल ब्लॉक की 6 मंजिलों तक पैदल चढ़कर एक-एक चीज की जमीनी हकीकत परखी।

मौके पर पिलर और बीम की डिजाइन में भारी तकनीकी खामियां पाई गईं। शटरिंग की लाइन और लेवल की उचित जांच किए बिना ही ठेकेदार ने कंक्रीट का कार्य करा दिया था। इसके कारण कंक्रीट सरफेस की गुणवत्ता बिल्कुल ही अधोमानक (Sub-standard) मिली। जिलाधिकारी ने जब गुणवत्ता को लेकर पिछली जांच रिपोर्ट मांगी, तो बताया गया कि इस मामले में आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) की रिपोर्ट अभी लंबित है। बिना जांच रिपोर्ट के इस तरह का घटिया निर्माण कार्य भविष्य में एक बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। जिलाधिकारी ने इस घोर लापरवाही पर कड़ा एतराज जताया है।

सीडीओ को निर्देश: बनेगी मॉनिटरिंग कमेटी, धूल पर जताई नाराजगी
एसएन मेडिकल कॉलेज के इस पूरे प्रोजेक्ट की महत्ता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मौके पर ही कड़े प्रशासनिक फैसले लिए। उन्होंने निरीक्षण के दौरान मौजूद मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) प्रतिभा सिंह को कड़े निर्देश जारी किए। जिलाधिकारी ने आदेश दिया कि निर्माण कार्यों की सर्वोच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने और तय समय सीमा के भीतर काम पूरा कराने के लिए तत्काल एक जिलास्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी (Monitoring Committee) का गठन किया जाए। यह कमेटी हर महीने निर्माण कार्य की बारीकी से निगरानी करेगी और अपनी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट सीधे जिलाधिकारी कार्यालय को सौंपेगी। घटिया निर्माण के लिए संबंधित इंजीनियरों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी ने कार्य स्थल पर उड़ती धूल (Air Pollution) और बेतरतीब ढंग से पड़ी निर्माण सामग्री पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने साइट इंचार्ज को स्पष्ट निर्देश दिए कि वायु प्रदूषण को रोकने के लिए पानी का छिड़काव किया जाए और ट्रांसपोर्टेशन प्लान (Transportation Plan) का सख्ती से पालन हो। बिखरी हुई सामग्री को तुरंत सुव्यवस्थित किया जाए ताकि किसी भी दुर्घटना को टाला जा सके। इस बेहद कड़े और औचक निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉक्टर अरुण कुमार श्रीवास्तव और निर्माणदायी संस्थाओं के सभी बड़े अभियंता मौजूद रहे। जिलाधिकारी मनीष बंसल के इस जीरो-टॉलरेंस रवैये ने जिले के सभी सरकारी ठेकेदारों और इंजीनियरों को यह कड़ा संदेश दे दिया है कि आगरा में अब विकास कार्यों में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या हीलाहवाली बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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