सूफी परंपरा के महान स्तंभ का अवसान: हजरत शेख सलीम चिश्ती की 16वीं पीढ़ी के वंशज पीरजादा रईस मियां चिश्ती का निधन, दरगाह परिसर में होंगे सुपुर्द-ए-खाक

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Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Thursday, 09 July, 2026, 04:30:15 PM IST

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tajnews.in | फतेहपुर सीकरी: भारत की साझा विलग सांस्कृतिक विरासत, गंगा-जमुनी तहजीब और विश्व प्रसिद्ध सूफी सिलसिले को एक बहुत बड़ा आघात लगा है। महान सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती की पावन दरगाह के सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती का बुधवार देर रात लंबी अस्वस्थता के बाद दुखद निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर फैलते ही संपूर्ण सूफी समुदाय, देश-विदेश में फैले उनके लाखों अनुयायियों और स्थानीय जनता में गहरा शोक व्याप्त हो गया है। रईस मियां चिश्ती को केवल एक धार्मिक मार्गदर्शक नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द, हिंदू-मुस्लिम एकता और मानवता का एक बहुत बड़ा संदेशवाहक माना जाता था। उनके जाने से सूफी परंपरा के एक देदीप्यमान युग का अंत हो गया है। गुरुवार शाम को असर की नमाज के बाद उन्हें पूरे सम्मान के साथ ऐतिहासिक दरगाह परिसर में ही सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

HIGHLIGHTS
  1. अपूरणीय क्षति: शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती का 88 वर्ष की आयु में लखनऊ के अस्पताल में निधन।
  2. 81 वर्षों का लंबा सफर: मात्र सात वर्ष की अल्पायु में संभाला था सज्जादानशीन का दायित्व, जीवनभर भाईचारे और शांति का दिया महान संदेश।
  3. ऐतिहासिक वंशावली: हजरत शेख सलीम चिश्ती के खानदान की 16वीं पीढ़ी के प्रत्यक्ष वंशज थे रईस मियां, देश-दुनिया में था अटूट सम्मान।
  4. वैश्विक मेहमाननवाजी: गमाल अब्देल नासिर से लेकर निकोलस सरकोजी तक, करीब 20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों और भारत के प्रधानमंत्रियों को कराई थी जियारत।

पारिवारिक सूत्रों और कलेक्ट्रेट से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, पीरजादा रईस मियां चिश्ती पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से अस्वस्थ चल रहे थे, जिसके चलते उन्हें उच्च स्तरीय चिकित्सा के लिए लखनऊ के प्रसिद्ध एरा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। बुधवार, 8 जुलाई 2026 की रात करीब 11:30 बजे उन्होंने अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। उनके सुपुत्र अरशद फरीदी ने इस दुखद समाचार की आधिकारिक पुष्टि की है। अरशद फरीदी ने बताया कि पूजनीय वालिद साहब का पार्थिव शरीर गुरुवार को फतेहपुर सीकरी लाया जा रहा है। उनका जनाजा 9 जुलाई 2026 गुरुवार को असर की नमाज के बाद शाम करीब 5:15 बजे ऐतिहासिक फतेहपुर सीकरी स्थित दरगाह परिसर के भीतर सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए ले जाया जाएगा। इस ऐतिहासिक जनाजे में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में जायरीन, उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक हस्तियां सीकरी पहुंचना शुरू हो गई हैं।

पीरजादा रईस मियां चिश्ती का सूफी इतिहास में एक अत्यंत विशिष्ट और विलग स्थान था। वह महान सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती के पवित्र खानदान की 16वीं पीढ़ी के प्रत्यक्ष चश्म-ओ-चिराग थे। नियति का एक अनूठा संयोग देखिए कि जब वे महज सात वर्ष के थे, तभी उन्हें इस विलग सूफी गद्दी के सज्जादानशीन का महान उत्तरदायित्व सौंप दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन के लगातार 81 वर्षों तक इस पावन दरगाह की परंपराओं, मर्यादाओं और सूफी सिलसिले की रूहानी शिक्षाओं का अत्यंत निष्ठा और सादगी के साथ निर्वहन किया। इतनी लंबी अवधि तक एक सूफी गद्दी को संभालना और दुनिया भर के इंसानों को आपसी प्रेम, शांति, सहिष्णुता और इंसानियत का पाठ पढ़ाना अपने आप में एक वैश्विक कीर्तिमान है। उनका हमेशा से कड़ा मानना था कि मजहब का असली पैगाम नफरत फैलाना नहीं, बल्कि पीड़ित और शोषित मानवता की बिना किसी भेदभाव के निस्वार्थ सेवा करना है।

कड़ा अनुशासन और अंतरधार्मिक संवाद के प्रबल पैरोकार रईस मियां चिश्ती ने हमेशा हिंदू-मुस्लिम कौमी एकता की जड़ों को सींचने का काम किया। उनकी सादगी, रूहानी चेहरे की चमक और आत्मीय व्यवहार के सामने बड़े से बड़े राजनेता और शासक नतमस्तक हो जाते थे। अपने इस ऐतिहासिक और लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने दरगाह पर आने वाले विश्व के अनेक प्रभावशाली नेताओं और मेहमानों की ऐतिहासिक मेजबानी की। उनके कार्यकाल में दुनिया के लगभग 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस महान सूफी केंद्र पर मन्नत का धागा बांधने और हाजिरी देने पहुंचे थे। इनमें मिस्र के महान नेता गमाल अब्देल नासिर, भूटान के तत्कालीन राजा, ब्रिटेन के प्रिंस ऑफ वेल्स, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी सहित कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के दिग्गज नेता शामिल रहे, जिन्हें रईस मियां ने सूफी परंपरा के अनुसार जियारत कराई थी।

वैश्विक नेताओं के साथ-साथ भारत के राजनीतिक इतिहास के कई महानायकों ने भी रईस मियां चिश्ती के सान्निध्य में आकर आत्मिक शांति की प्राप्ति की थी। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, लौह महिला इंदिरा गांधी, प्रखर वक्ता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, वी.पी. सिंह सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं, मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों को उन्होंने स्वयं दरगाह की जियारत कराई थी और देश की खुशहाली व अखंडता के लिए दुआएं मांगी थीं। दरगाह पर आने वाले आम से लेकर खास श्रद्धालुओं की सुख-सुविधा और सुरक्षा को लेकर वे हमेशा बेहद कड़ा रुख अपनाते थे। उनके अनुयायियों का कहना है कि पीरजादा का जाना न केवल आगरा और फतेहपुर सीकरी के लिए, बल्कि समूचे देश की साझी विरासत के लिए एक ऐसा खालीपन है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। जिला प्रशासन ने जनाजे में उमड़ने वाली असीम भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सीकरी और दरगाह क्षेत्र में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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