Agra Desk, tajnews.in | Wednesday, May 13, 2026, 03:22:15 PM IST

उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के ओंकोसर्जरी (कैंसर सर्जरी) विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अपनी अद्भुत कुशलता का शानदार प्रदर्शन किया। डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद जटिल और उच्च स्तरीय शल्य चिकित्सा को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने 53 वर्षीय मरीज विजय के पेट के पिछले हिस्से से एक विशालकाय ट्यूमर को बाहर निकाला। यह जानलेवा ट्यूमर मरीज की प्रमुख रक्त वाहिनियों, दाहिनी किडनी और लिवर तक बुरी तरह फैल चुका था। मरीज पिछले कई महीनों से असहनीय दर्द और भयानक कमजोरी से तड़प रहा था। आखिरकार, सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक के डॉक्टरों ने घंटों लंबे ऑपरेशन के बाद मरीज को इस जानलेवा बीमारी से छुटकारा दिला दिया।

53 वर्षीय विजय की दर्दभरी और संघर्षपूर्ण कहानी
आगरा निवासी 53 वर्षीय विजय पिछले काफी समय से एक बहुत ही कष्टदायक जीवन जी रहे थे। वे लगातार भयंकर पेट दर्द की समस्या से बुरी तरह जूझ रहे थे। समय के साथ-साथ उनका यह दर्द और भी ज्यादा भयानक होता चला गया। इसके अलावा, उनकी भूख भी पूरी तरह से खत्म हो गई थी। वे दिन-प्रतिदिन बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस करने लगे थे। बीमारी ने उन्हें अंदर से पूरी तरह खोखला कर दिया था। पिछले कुछ दिनों से उनकी हालत ने और भी ज्यादा गंभीर रूप ले लिया था। वे थोड़ा सा भी खाना खाते थे, तो उन्हें तुरंत भयंकर उल्टी हो जाती थी। मरीज का वजन भी बहुत तेजी से गिरता जा रहा था।
विजय ने अपनी इस लाइलाज बीमारी से छुटकारा पाने के लिए काफी लंबी दौड़-धूप की। उन्होंने शहर के कई अलग-अलग निजी अस्पतालों के चक्कर लगाए। उन्होंने कई नामी डॉक्टरों से अपनी इस बीमारी का परामर्श लिया। लेकिन, केस की भारी जटिलता को देखते हुए किसी ने भी इसका जोखिम नहीं उठाया। हर जगह से निराशा मिलने के बाद परिजनों ने उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाने का फैसला किया। डॉक्टरों ने उन्हें सीधे सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक के कैंसर सर्जरी विभाग में रेफर कर दिया। वहां उन्होंने ओपीडी में डॉ. गौरव सिंह से मुलाकात की और अपनी पूरी परेशानी बताई। परिजनों की आंखों में उस समय केवल एक ही उम्मीद बची थी।
जांच में सामने आई ट्यूमर की बेहद खौफनाक सच्चाई
डॉ. गौरव सिंह ने मरीज की हालत देखते ही तुरंत उनकी विस्तृत जांच शुरू कर दी। उन्होंने विजय के कई तरह के ब्लड टेस्ट और एडवांस स्कैन करवाए। इन स्कैन की रिपोर्ट्स ने डॉक्टरों को भी भारी हैरत में डाल दिया। रिपोर्ट्स से पता चला कि मरीज के पेट के बिल्कुल पीछे एक विशालकाय ट्यूमर मौजूद है। मेडिकल भाषा में इस जगह को रेट्रोपेरिटोनियल स्पेस (Retroperitoneal Space) कहा जाता है। यह ट्यूमर कोई साधारण गांठ नहीं था, बल्कि यह एक बहुत ही आक्रामक कैंसर का रूप ले चुका था। इस ट्यूमर ने अपने आकार से शरीर के कई अन्य अंगों को भी जकड़ लिया था। डॉक्टरों ने तुरंत एक मेडिकल बोर्ड बैठाकर इस रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया।
विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों ने इस बीमारी की एकदम सटीक पहचान कर ली। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, मरीज विजय ‘राइट रेट्रोपेरिटोनियल सार्कोमा विथ मल्टीऑर्गन इन्वॉल्वमेंट’ नामक अत्यंत गंभीर बीमारी से पूरी तरह ग्रसित थे। इस ट्यूमर ने पेट की प्रमुख रक्त वाहिनियों को बुरी तरह से दबा दिया था। इसके साथ ही, इसने दाहिनी किडनी और लिवर के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को भी प्रभावित कर रखा था। बीमारी की गंभीरता लगातार बढ़ती जा रही थी और मरीज की जान पर सीधा खतरा मंडरा रहा था। इसलिए, डॉक्टरों के पास इस ट्यूमर को निकालने के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। मरीज की गिरती पल्स ने डॉक्टरों को तुरंत फैसला लेने पर मजबूर कर दिया।
यह भी पढ़ें (स्वास्थ्य और शहर की खबरें)
घंटों चला ऑपरेशन, डॉक्टरों ने दिखाई अपनी कुशलता
ओंकोसर्जरी विभाग की टीम ने मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए तुरंत एक अहम बैठक की। उन्होंने बिना कोई समय गंवाए इस जटिल सर्जरी को करने का अंतिम निर्णय ले लिया। डॉ. वरुण अग्रवाल और डॉ. गौरव सिंह ने इस बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन का सफल नेतृत्व किया। ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों की टीम ने पूरी सावधानी के साथ मरीज का पेट खोला। यह ऑपरेशन डॉक्टरों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम बिल्कुल नहीं था। दरअसल, ट्यूमर शरीर की कई महत्वपूर्ण रक्त वाहिनियों और आसपास के नाजुक अंगों से पूरी तरह चिपका हुआ था। जरा सी भी चूक से मरीज की जान जा सकती थी। खून का रिसाव रोकने के लिए टीम ने बहुत ही सावधानी बरती।
डॉक्टरों ने अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया और अत्यंत कुशलता के साथ ट्यूमर को काटना शुरू किया। टीम ने एक-एक नस को बड़ी ही सावधानी से अलग किया। कई घंटों की इस भारी जद्दोजहद के बाद, डॉक्टरों ने पेट के पीछे गहराई में स्थित उस विशालकाय ट्यूमर को बाहर निकाल लिया। ट्यूमर के संक्रमण के कारण डॉक्टरों को मरीज की दाहिनी किडनी भी निकालनी पड़ी। हालांकि, उन्होंने मरीज की जान बचाने में पूरी तरह से सफलता हासिल कर ली। यह ऑपरेशन एसएन मेडिकल कॉलेज के इतिहास में एक बहुत बड़ा और स्वर्णिम पन्ना बन गया है। इस कठिन सर्जरी ने साबित कर दिया कि यहाँ के डॉक्टर किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं।
एनेस्थीसिया टीम और जूनियर डॉक्टरों का रहा अहम योगदान
किसी भी जटिल ऑपरेशन की सफलता केवल सर्जनों पर ही निर्भर नहीं करती है। इसमें पूरी मेडिकल टीम का एक बहुत बड़ा और संयुक्त योगदान होता है। इस मामले में भी एनेस्थीसिया (बेहोशी) विभाग ने अपना काम बहुत ही जिम्मेदारी के साथ निभाया। डॉ. अर्पिता सक्सेना और डॉ. योगिता ने सुरक्षित एनेस्थीसिया प्रबंधन सुनिश्चित किया। उन्होंने ऑपरेशन के दौरान मरीज की सांसों और धड़कनों पर लगातार अपनी बारीक नजर बनाए रखी। उनके इस सटीक प्रबंधन के कारण ही सर्जन बिना किसी तनाव के अपना काम आसानी से कर पाए। जरा सी भी लापरवाही मरीज को कोमा में भेज सकती थी।
एनेस्थीसिया टीम के साथ रेजिडेंट डॉ. काजल, डॉ. विकास और डॉ. जसलीन ने भी अपना शानदार सहयोग दिया। इसके अलावा, सर्जरी टीम में कंसल्टेंट डॉक्टरों का साथ देने के लिए जूनियर रेजिडेंट भी पूरी तरह मुस्तैद रहे। डॉ. सुभजीत, डॉ. ज़फर, डॉ. अर्पित शर्मा, डॉ. अश्वनी और डॉ. विवेक ने ऑपरेशन में हर संभव मदद की। इन सभी डॉक्टरों के अद्भुत तालमेल और मेहनत ने एक मरते हुए इंसान को नया जीवन दे दिया। ऑपरेशन के बाद अब मरीज विजय की स्थिति पूरी तरह से स्थिर है। फिलहाल डॉक्टरों ने उन्हें अपनी विशेष और सघन निगरानी में रखा है। वे मरीज के हर मूवमेंट को रिकॉर्ड कर रहे हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज में लगातार बढ़ रहीं आधुनिक सुविधाएं
इस शानदार और सफल सर्जरी के बाद पूरे अस्पताल प्रशासन में खुशी की लहर दौड़ गई है। एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस मौके पर टीम की खूब तारीफ की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के सहयोग से कॉलेज में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। अस्पताल में अब नई और अत्याधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन नई सुविधाओं से आगरा और आस-पास के सभी जिलों के मरीजों को भारी लाभ मिल रहा है। अब गरीब मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे महंगे शहरों में नहीं जाना पड़ता है। इससे मरीजों का बहुत सारा पैसा और समय बच रहा है।
विभागाध्यक्ष (सर्जरी) प्रोफेसर राजेश गुप्ता ने भी अपनी टीम के डॉक्टरों का खूब उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि मरीजों को हमेशा सुरक्षित और अत्याधुनिक शल्य चिकित्सा उपलब्ध कराना उनके विभाग की सबसे पहली प्राथमिकता है। उनका मुख्य उद्देश्य यही रहता है कि मरीज जल्दी से जल्दी स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन में लौट सकें। उन्होंने बताया कि अस्पताल के डॉक्टर अपनी स्किल्स को लगातार अपडेट कर रहे हैं। वे जटिल से जटिल बीमारियों का इलाज खोजने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। यह सफल ऑपरेशन उनके इसी समर्पण का एक बहुत ही शानदार और जीता-जागता उदाहरण है। अस्पताल प्रशासन डॉक्टरों को बेहतर ट्रेनिंग देने की योजना बना रहा है।
ओपीडी में हर हफ्ते मिल रहा है सुपरस्पेशलिटी इलाज
एसएन मेडिकल कॉलेज ने कैंसर के मरीजों के लिए एक बहुत ही अच्छी व्यवस्था लागू की है। अब मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भड़कना नहीं पड़ता है। मेडिकल कॉलेज की नवनिर्मित सुपरस्पेशलिटी बिल्डिंग में कैंसर सर्जरी की विशेष ओपीडी नियमित रूप से संचालित होती है। यह ओपीडी हर सप्ताह सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को मरीजों के लिए खोली जाती है। यहाँ दूर-दराज से आने वाले मरीज आसानी से अपना पर्चा बनवाकर डॉक्टरों को दिखा सकते हैं। ओपीडी में एकदम साफ-सफाई और मरीजों के बैठने की पूरी उचित व्यवस्था मौजूद है। सरकार ने भी इन सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए भारी फंड पास किया है।
इस ओपीडी में कैंसर और सर्जरी से संबंधित विभिन्न गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है। यहाँ अनुभवी और विशेषज्ञ चिकित्सक मरीजों को अपना सही परामर्श देते हैं। मरीजों के टेस्ट और स्कैन भी इसी बिल्डिंग में आसानी से हो जाते हैं। विजय जैसे कई मरीजों ने इस सुविधा का लाभ उठाकर अपनी जान बचाई है। डॉक्टरों ने शहर के लोगों से अपील की है कि वे बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल आएं। वे झाड़-फूंक या झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में अपना कीमती समय बिल्कुल न बर्बाद करें। सही समय पर मिला इलाज ही इंसान की जान आसानी से बचा सकता है। मरीज विजय के परिवार ने डॉक्टरों का हाथ जोड़कर भारी आभार व्यक्त किया है।
Trending Tags

Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
7579990777



