International Desk, 🌐 tajnews.in | Wednesday, 08 July, 2026, 06:45:12 AM IST.

tajnews.in | वाशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध के बादल गहरे काले होने लगे हैं और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था दांव पर लग गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन वाणिज्यिक तेल टैंकरों पर हुए भीषण हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। वाशिंगटन से प्राप्त आधिकारिक रपट के अनुसार, बुधवार तड़के अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने दक्षिणी ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर जोरदार मिसाइल हमले किए। अमेरिका ने इस आक्रामक सैन्य कदम को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर हुए ईरानी हमलों का मुंहतोड़ जवाब बताया है। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी हमले की पुष्टि करते हुए ईरानी सरकारी मीडिया ने देश के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में सिलसिलेवार धमाकों की जानकारी दी है। इस ताजा सैन्य टकराव के बाद पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका पैदा हो गई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरी दुनिया को सूचित किया है कि उसकी सेनाओं ने ईरान के भीतर तटीय सैन्य ठिकानों पर सुनियोजित और जोरदार हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ये हवाई हमले अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मंगलवार को तीन जहाजों पर हुए ईरानी हमलों के जवाब में किए जा रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में ईरान के इस आक्रामक और हिंसक रवैये को पूरी तरह अनुचित, खतरनाक और पूर्व में हुए युद्धविराम का स्पष्ट व खुला उल्लंघन करार दिया है। अमेरिका ने दोटूक लहजे में कहा है कि समुद्री यातायात की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी हरकत को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वाशिंगटन द्वारा हमलों की आधिकारिक घोषणा किए जाने के तुरंत बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने दक्षिणी ईरान के रणनीतिक क्षेत्रों में भारी तबाही की खबरें प्रसारित करना शुरू कर दिया। ईरानी प्रेस टीवी के अनुसार, तटीय शहर सिरिक में एक के बाद एक लगातार सात भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे पूरा इलाका दहल उठा। बताया जा रहा है कि सिरिक के ताहेरुई पियर क्षेत्र में कम से कम छह मिसाइलें या भारी गोले आकर गिरे हैं। इसके अतिरिक्त, सामरिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले केश्म द्वीप और बंदर अब्बास बंदरगाह के पास भी सिलसिलेवार धमाकों की गूंज सुनाई दी है। हालांकि, ईरानी मीडिया का कहना है कि इन धमाकों से हुए वास्तविक जान-माल के नुकसान या किसी के हताहत होने की तत्काल कोई प्रामाणिक जानकारी सामने नहीं आई है।
इन अमेरिकी हमलों से पूरी तरह भड़के ईरान के विदेश मंत्रालय ने पलटवार करते हुए वाशिंगटन को गंभीर परिणाम भुगतने की खुली चेतावनी जारी की है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में लिखा, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का विदेश मंत्रालय, अमेरिका द्वारा समझौते का खुला उल्लंघन किए जाने के भयानक नतीजों के बारे में वैश्विक बिरादरी को आगाह करता है। ईरान अपने राष्ट्रीय हितों, क्षेत्रीय संप्रभुता और देश की सुरक्षा की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत हर जरूरी कदम उठाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।’ ईरान के इस आक्रामक बयान से साफ संकेत मिल रहे हैं कि वह भी अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों पर जवाबी हमले की बड़ी योजना बना रहा है।
इस महायुद्ध की मुख्य वजह मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ब्रिटिश और अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हुए सिलसिलेवार हमले बने। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी (UKMTO) के अनुसार, ओमान के तट के पास एक लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) टैंकर को निशाना बनाया गया था, जिसके बाद उसमें भीषण आग लग गई थी। ईरानी सरकारी टीवी ने इस पर दलील दी थी कि बार-बार दी जा रही चेतावनी की अनदेखी करने के बाद इस एलएनजी टैंकर पर कार्रवाई की गई, हालांकि तेहरान ने सीधे तौर पर इसकी जिम्मेदारी नहीं ली थी। संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल के अंत के बाद से एक ही दिन में अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों पर हमलों का यह सबसे बड़ा और भयानक मामला है, जिसने समुद्री यातायात को सामान्य बनाने के तमाम वैश्विक प्रयासों को मटियामेट कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर, इन घातक हमलों के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक कर दी। अमेरिका ने ईरान को तेल प्रतिबंधों से दी गई 60 दिनों की विशेष छूट का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। यह विशेष राहत लाइसेंस पिछले महीने ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी किया गया था, जो आगामी 21 अगस्त तक पूरी तरह वैध था। व्हाइट हाउस के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि ईरान की यह हरकत अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के विरुद्ध है और अब उसे इसके गंभीर आर्थिक और सैन्य परिणामों का सामना हर हाल में करना ही होगा। इस आर्थिक और सैन्य घेराबंदी के बाद पूरे पश्चिम एशिया में पूर्ण युद्ध छिड़ने की स्थिति पैदा हो गई है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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