Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Monday, 25 May 2026, 07:24:22 AM IST

आगरा चौपाटी में मनोरंजन के नाम पर मौत का खेल: जिप लाइन का लॉक टूटने से 45 फीट नीचे गिरा किशोर, चूड़ी कारोबारी के इकलौते चिराग की मौत
आगरा के ताजगंज क्षेत्र से एक अत्यंत हृदय विदारक और झकझोर देने वाली घटना प्रकाश में आई है। फतेहाबाद रोड स्थित ‘आगरा चौपाटी’ में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी के चलते एक बड़ा हादसा हो गया। फिरोजाबाद से परिवार के साथ घूमने आए एक प्रसिद्ध चूड़ी व्यवसायी के 16 वर्षीय बेटे कुणाल अग्रवाल की जिप लाइन राइड के दौरान ऊंचाई से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। राइड शुरू होने के मात्र 10 फीट आगे बढ़ते ही जिप लाइन की पुली का मुख्य लॉक अचानक टूट गया, जिसके कारण किशोर लगभग 45 फीट की ऊंचाई से सीधे कंक्रीट के फर्श पर आ गिरा। इस दौरान ऑपरेटरों की गंभीर लापरवाही भी उजागर हुई है, क्योंकि पीड़ित को बिना हेलमेट पहनाए ही राइड पर सवार कर दिया गया था और नीचे आपातकालीन सुरक्षा के लिए कोई जाल या गद्दे भी नहीं बिछाए गए थे। इस दर्दनाक हादसे ने आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) और झूला संचालित करने वाली निजी फर्म के सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। घटना के बाद पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर तकनीकी जांच शुरू कर दी है और झूला संचालक व मैनेजर को हिरासत में ले लिया है।

फिरोजाबाद से घूमने आया था परिवार, बेटे की जिद पर पहली बार पहुंचे थे चौपाटी
प्राप्त विवरण के अनुसार, फिरोजाबाद के उत्तर क्षेत्र स्थित गांधी नगर की गली नंबर-15 के निवासी पंकज अग्रवाल चूड़ी के प्रतिष्ठित व्यवसायी हैं। वह अपनी पत्नी रिंकी, बड़े बेटे कुणाल और छोटे बेटे मयंक के साथ आगरा घूमने आए थे। परिवार ने सुबह बलेकश्वर स्थित अपनी बहन पिंकी के घर जाने से पूर्व जीवनी मंडी स्थित खाटू श्याम मंदिर में दर्शन किए और मॉल में चलचित्र देखा। इसके उपरांत, कक्षा 11 के छात्र कुणाल की अत्यधिक जिद पर पूरा परिवार शाम करीब चार बजे फतेहाबाद रोड स्थित आगरा चौपाटी पहुंचा था। कुणाल ने सोशल मीडिया पर आगरा चौपाटी की जिप लाइन राइड की वीडियो देखी थी और वह कई दिनों से इस एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद लेने की इच्छा व्यक्त कर रहा था।

शाम करीब छह बजे कुणाल ने 400 रुपये का टिकट लेकर 120 फीट लंबी और 45 फीट ऊंची जिप लाइन पर जाने की तैयारी की। ऑपरेटरों ने उसे सुरक्षा हार्नेस पहनाकर पुली के जरिए मुख्य स्टील के तार से लटका दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही राइड शुरू हुई और कुणाल शुरुआती पॉइंट से महज 10 फीट आगे बढ़ा, अचानक एक तेज आवाज के साथ पुली का मुख्य लॉकिंग कैराबिनर टूट गया। कुणाल हवा में ही संतुलन खो बैठा और संभलने का अवसर मिलने से पूर्व ही 45 फीट की ऊंचाई से सीधे नीचे कंक्रीट के फर्श पर आ गिरा। उसके सिर और शरीर के विभिन्न अंगों में गंभीर आंतरिक चोटें आईं, जिससे वह लहूलुहान हो गया।
गोद में उठाकर मां चिल्लाती रही—’कोई मेरे लाल को बचा लो’, परिसर में नहीं थी प्राथमिक उपचार की व्यवस्था
कुणाल को नीचे गिरते देख उसकी मां और छोटे भाई की चीख निकल गई। पिता बदहवास होकर बेटे की ओर दौड़ पड़े। मां ने खून से लथपथ बेटे को गोद में उठा लिया और रोते हुए वहां उपस्थित भीड़ से गुहार लगाने लगी कि ‘कोई मेरे लाल को बचा लो, वह बस यहां खेलने आया था।’ इस हृदय विदारक दृश्य को देखकर वहां उपस्थित अन्य पर्यटकों की आंखें भी नम हो गईं। घटना के बाद चौपाटी परिसर में भारी अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे।

इस हादसे ने चौपाटी के आंतरिक प्रबंधन की हकीकत को भी उजागर कर दिया है। परिसर के भीतर प्राथमिक उपचार अथवा आकस्मिक चिकित्सा की कोई समुचित सुविधा उपलब्ध नहीं थी। पीड़ित पिता ने जब वहां उपस्थित पुलिसकर्मियों से वाहन की मांग की, तो उन्होंने सरकारी वाहन न होने का हवाला दिया। ताजमहल के समीपस्थ क्षेत्र होने के बावजूद एम्बुलेंस को घटनास्थल पर पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लगा। इस दौरान कुणाल तड़पता रहा और जब परिजन उसे लेकर सरोजिनी नायडू (एस.एन.) मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे, तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि यदि समय रहते प्राथमिक उपचार मिल जाता, तो शायद किशोर की जान बचाई जा सकती थी।
सुरक्षा उपकरण नदारद और फिटनेस सर्टिफिकेट पर सवाल, दिल्ली की फर्म को मिला था ठेका
आगरा चौपाटी को आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) द्वारा एक बड़े टूरिस्ट हब के रूप में विकसित किया गया है, जिसके चकाचौंध के पीछे लापरवाही की एक भयानक तस्वीर छिपी हुई थी। लगभग एक वर्ष पूर्व इस एडवेंचर स्पोर्ट्स पार्क के संचालन का ठेका दिल्ली की एक निजी फर्म ‘ईओडी एडवेंचर पार्क’ (विज़न एम्यूजमेंट पार्क प्राइवेट लिमिटेड) को दिया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के प्रारंभिक निरीक्षण में यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि संचालन संस्था द्वारा केवल टिकटों की बिक्री और मुनाफे पर ध्यान दिया जा रहा था, जबकि सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया गया।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि नियमानुसार जिप लाइन जैसी जोखिम भरी राइड के नीचे एक मजबूत सुरक्षा जाल और कंक्रीट के फर्श पर मोटे गद्दे होने अनिवार्य हैं, ताकि यदि कोई तकनीकी खराबी हो, तो यात्री सीधे जमीन पर न गिरे। मगर चौपाटी में नीचे केवल नग्न फर्श था। इसके अतिरिक्त, कुणाल को सुरक्षा हेलमेट भी नहीं पहनाया गया था, जिसके कारण सीधे सिर के बल गिरने से उसकी खोपड़ी में घातक चोट आई। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या इस झूले का समय-समय पर तकनीकी और फिटनेस परीक्षण किया जाता था अथवा नहीं।
पुलिस प्रशासन ने शुरू की विधिक जांच, झूला संचालक और मैनेजर हिरासत में
हादसे की सूचना प्राप्त होते ही पुलिस आयुक्त दीपक कुमार और एडीसीपी क्राइम हिमांशु गौरव भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर एडीए और ठेकेदार फर्म की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस महानिरीक्षक ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों में घोर लापरवाही बरती गई है और इसकी तकनीकी जांच लोक निर्माण विभाग या मैकेनिकल इंजीनियरों की टीम से कराई जाएगी।
थाना ताजगंज पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिप लाइन के संचालक और मुख्य मैनेजर को हिरासत में ले लिया है। चौपाटी में चल रहे अन्य सभी झूलों और एडवेंचर गतिविधियों का संचालन अग्रिम आदेशों तक पूरी तरह से बंद करा दिया गया है। पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर सुसंगत विधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। पूर्व में भी आगरा के विभिन्न मेलों में ऐसे हादसे हो चुके हैं, जिनमें दो वर्ष पूर्व आवास विकास कॉलोनी के दुबई कार्निवल में ड्रैगन झूले का बोल्ट खुलने से 10 वर्षीय परी की जान चली गई थी, किंतु हर बार प्रशासनिक लीपापोती के कारण ऐसे अवैध संचालन निरंतर जारी रहते हैं। स्थानीय प्रबुद्ध समाज ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए एडीए के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करने की मांग की है। पुलिस प्रशासन इस पूरे हादसे की कानूनी कार्रवाई, विभागीय जवाबदेही और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की प्रत्येक बारीक गतिविधि पर निरंतर नजर बनाए हुए है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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