Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Monday, 25 May 2026, 08:12:35 AM IST

अपनी सांसें देकर पिता ने बेटे को दी जिंदगी: अरतौनी में डूबते बच्चे को बचाने के लिए यमुना में लगाई छलांग, पिता का शव बरामद
आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र से पितृत्व के सर्वोच्च बलिदान और एक अत्यंत दुखद हादसे की खबर प्रकाश में आई है। क्षेत्र के अरतौनी गांव के समीप रविवार को यमुना नदी के गहरे पानी में डूब रहे अपने बेटे को बचाने के प्रयास में एक पिता ने अपनी जान गंवा दी। पिता ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बच्चे को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, किंतु वे स्वयं नदी के तेज बहाव और गहरे भंवर में फंस गए। इस दुखद घटना के कारण 40 वर्षीय दिनेश कुमार की डूबने से मृत्यु हो गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ घाट पर एकत्र हो गई। सूचना पर पहुंची सिकंदरा थाना पुलिस ने पीएसी के गोताखोरों की मदद से स्टीमर के जरिए नदी में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद शाम करीब छह बजे मृतक पिता का शव घटनास्थल से दो किलोमीटर दूर बलदेव घाट के पास से बरामद किया जा सका। इस हृदय विदारक घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है और अरतौनी सहित समूचे रुनकता क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है।
दोपहर में बेटों के साथ नहाने गए थे दिनेश कुमार, टापू के समीप गहरे पानी में जाने से हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिकंदरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव अरतौनी के निवासी 40 वर्षीय दिनेश कुमार आगरा की एक स्थानीय जूता फैक्ट्री में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी के अतिरिक्त दो बेटे पंकज और पुष्पेंद्र तथा एक बेटी है। रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के कारण दिनेश कुमार दोपहर लगभग 12:30 बजे अपने दोनों बेटों पंकज और पुष्पेंद्र को साथ लेकर अरतौनी के समीप बहने वाली यमुना नदी में स्नान करने के लिए गए थे।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दिनेश कुमार बच्चों को लेकर भैंसा घाट स्थित श्मशान घाट के समीप नदी के मध्य में बने एक रेतीले टापू तक पहुंच गए थे। टापू के किनारे पर बच्चे पानी में खेल रहे थे और स्नान कर रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने अथवा गहराई का सही अनुमान न होने के कारण बड़ा बेटा पंकज नदी के मुख्य बहाव की ओर चला गया। वहां पानी अत्यधिक गहरा था और नदी की जलधारा अत्यंत तीव्र थी। पंकज खुद को संभालने में पूरी तरह असमर्थ रहा और पानी के भीतर डूबने लगा। बेटे को पानी में डूबता और जीवन के लिए संघर्ष करता देख टापू पर खड़े पिता दिनेश कुमार ने बिना एक क्षण गंवाए उसे बचाने के लिए सीधे गहरे पानी में छलांग लगा दी।
पीएसी के गोताखोरों ने चलाया सर्च ऑपरेशन, कई घंटों के बाद बलदेव घाट के पास मिला शव
नदी की लहरों के बीच दिनेश कुमार ने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने पानी के भीतर संघर्ष करते हुए किसी तरह डूब रहे बेटे पंकज को अपने हाथों से सहारा दिया और उसे सुरक्षित रूप से किनारे की ओर धकेल दिया। पंकज तो सुरक्षित रूप से पानी से बाहर निकल आया, परंतु इस कड़े प्रयास में दिनेश कुमार की अपनी शारीरिक ऊर्जा पूरी तरह से समाप्त हो गई। वे स्वयं को नदी की तेज जलधारा के विपरीत संभाल नहीं पाए और देखते ही देखते गहरे पानी तथा भंवर के बीच समा गए। टापू पर मौजूद छोटे बेटे पुष्पेंद्र ने जब पिता को डूबते देखा तो उसने चिल्लाना शुरू कर दिया। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर घाट पर मौजूद अन्य लोग और स्थानीय ग्रामीण तुरंत सहायता के लिए नदी की ओर दौड़े, किंतु तब तक दिनेश कुमार पानी में पूरी तरह ओझल हो चुके थे।
घटना की जानकारी मिलते ही सिकंदरा थाना पुलिस के अधिकारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंच गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीएसी (PAC) के कुशल गोताखोरों को तुरंत घटना स्थल पर बुलाया गया। गोताखोरों की टीम ने सरकारी स्टीमर की सहायता से नदी के भीतर कई किलोमीटर के दायरे में सघन खोजबीन अभियान शुरू किया। दोपहर से लेकर शाम तक पुलिस प्रशासन और गोताखोर नदी की लहरों को खंगालते रहे। अंततः, काफी प्रयासों के बाद शाम लगभग छह बजे घटनास्थल से करीब दो-तीन किलोमीटर दूर बलदेव घाट के पास पानी में तैरता हुआ दिनेश कुमार का शव बरामद हुआ। पुलिस ने विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को अपने कब्जे में ले लिया और पोस्टमार्टम के लिए जिला मर्च्युरी भेज दिया है।
जूता फैक्ट्री कर्मी की मौत से परिवार का सहारा छीना, ग्रामीणों ने घाटों पर सुरक्षा की मांग उठाई
इस हृदय विदारक घटना के कारण पीड़ित परिवार का मुख्य कमाऊ सदस्य हमेशा के लिए छिन गया है। दिनेश कुमार जूता फैक्ट्री में काम करके अपने छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाते थे। उनकी मृत्यु की खबर जैसे ही अरतौनी गांव में पहुंची, उनके पैतृक आवास पर सांत्वना देने वाले ग्रामीणों का तांता लग गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव के हर घर में चूल्हा तक नहीं जला है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ग्रीष्मकाल की छुट्टियों के कारण इन दिनों यमुना नदी के विभिन्न घाटों पर बच्चों और युवाओं के नहाने का सिलसिला काफी बढ़ जाता है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्थानीय कलेक्ट्रेट से मांग की है कि अरतौनी, रुनकता और सिकंदरा के संवेदनशील घाटों पर जहां पानी की गहराई अधिक है, वहां चेतावनी बोर्ड स्थापित किए जाएं। इसके साथ ही व्यस्त दिनों में घाटों पर स्थानीय गोताखोरों अथवा नागरिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी परिवार का चिराग इस तरह असमय न बुझे। पुलिस प्रशासन ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया का आश्वासन दिया है। पुलिस के आला अधिकारी इस संपूर्ण आकस्मिक हादसे और उसके बाद की वैधानिक कागजी कार्यवाही पर पूरी तरह से नजर बनाए हुए हैं।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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