National Desk, tajnews.in | Saturday, May 2, 2026, 04:35:10 PM IST

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में एक बार फिर माओवादियों की कायराना हरकत ने सुरक्षाबलों को गहरा जख्म दिया है। कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर हुए एक भीषण आईईडी (IED) धमाके में छत्तीसगढ़ पुलिस के तीन जांबाज जवान शहीद हो गए हैं, जबकि एक अन्य जवान की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब जवान इलाके में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए एक विशेष अभियान (De-mining Operation) चला रहे थे। ब्लास्ट इतना शक्तिशाली था कि जवानों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। शहीद जवानों में एक इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबल शामिल हैं, जो नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा संभालने वाली विशेष इकाई डीआरजी (DRG) के सदस्य थे। इस घटना ने एक बार फिर नक्सली क्षेत्रों में जवानों की सुरक्षा और वहां छिपे हुए बारूदी खतरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और अतिरिक्त बल मौके पर भेज दिया गया है।
जंगलों में मौत का जाल: कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) पी. सुंदरराज ने घटना की पुष्टि करते हुए विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि खुफिया इनपुट के आधार पर कांकेर जिले के छोटेबेठिया पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले घने जंगलों में सुरक्षाबलों की एक टीम सर्चिंग और डी-माइनिंग अभियान पर निकली थी। नक्सली अक्सर सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए पगडंडियों और रणनीतिक रास्तों पर आईईडी (Improvised Explosive Device) छिपाकर रखते हैं।
बृहस्पतिवार को जब डीआरजी की टीम एक सक्रिय आईईडी का पता लगाने के बाद उसे निष्क्रिय (Diffuse) करने की कोशिश कर रही थी, तभी तकनीकी खराबी या मानवीय चूक के कारण उसमें जोरदार धमाका हो गया। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मौके पर मौजूद इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कांस्टेबल कृष्णा कोमरा और कांस्टेबल संजय गढ़पाले गंभीर रूप से झुलस गए और उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
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नक्सलवाद मुक्त घोषणा के बाद ‘छिपा हुआ खतरा’
गौरतलब है कि हाल के महीनों में केंद्र और राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों को माओवादी हिंसा से मुक्त घोषित करने की दिशा में बड़े दावे किए थे। शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने भी माना था कि नक्सलियों के प्रभाव क्षेत्र काफी सिमट गए हैं। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों ने आगाह किया था कि माओवादी अपने कैंप छोड़ने या आत्मसमर्पण करने से पहले जंगलों में हजारों की संख्या में आईईडी (IED) प्लांट कर देते हैं, जो लंबे समय तक सुरक्षाबलों और स्थानीय ग्रामीणों के लिए एक बड़ा खतरा बने रहते हैं।
आईजी पी. सुंदरराज ने स्पष्ट किया कि 31 मार्च के बाद छत्तीसगढ़ में यह अपनी तरह का पहला बड़ा आईईडी धमाका है। यह घटना साबित करती है कि भले ही नक्सली सक्रियता कम हुई हो, लेकिन उनके द्वारा छोड़े गए बारूदी अवशेष अभी भी जवानों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। शहीद जवान डीआरजी (District Reserve Guard) से थे, जो स्थानीय युवाओं की एक ऐसी फोर्स है जिसे विशेष रूप से छापामार युद्ध और नक्सल विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इनकी क्षति छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
घायल जवान की स्थिति और आगामी रणनीति
धमाके में घायल चौथे जवान, कांस्टेबल परमानंद कोमरा को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए रायपुर रेफर किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है और विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी जान बचाने का प्रयास कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और शहीदों के परिजनों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
इस हमले के बाद कांकेर और नारायणपुर की सीमा पर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) ने आदेश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी आईईडी को डिफ्यूज करते समय अतिरिक्त सावधानी बरती जाए और आधुनिक रोबोटिक उपकरणों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। सरकार ने साफ किया है कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और नक्सलवाद के अवशेषों को जड़ से मिटाने का अभियान और तेज किया जाएगा। फिलहाल पूरे बस्तर संभाग में अलर्ट जारी कर दिया गया है और सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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