
रक्षा डेस्क, Taj News | Updated: Thursday, 05 Feb 2026 03:15 PM IST
उधमपुर/जम्मू (Jammu & Kashmir): जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। घाटी से लेकर जम्मू संभाग तक सेना के ‘ऑपरेशन ऑलआउट’ ने आतंकियों की कमर तोड़कर रख दी है। बुधवार को उधमपुर और किश्तवाड़ में हुए दो अलग-अलग लेकिन बेहद भीषण एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के शीर्ष कमांडरों समेत कुल तीन खूंखार आतंकियों को मार गिराया है।
उधमपुर के जंगलों में चला यह ऑपरेशन किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था, जहां आतंकियों ने खुद को एक प्राकृतिक गुफा में किलेबंदी कर छिपा रखा था। भारतीय सेना ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए न केवल आतंकियों को घेरा, बल्कि ग्रेनेड और विस्फोटकों का इस्तेमाल कर उस गुफा को ही उड़ा दिया, जहां से वे फायरिंग कर रहे थे। इस ऑपरेशन का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें धुएं का गुबार और धमाकों की गूंज सुनाई दे रही है।

उधमपुर में ‘ऑपरेशन किया’: 20 घंटे चला बारूद का खेल
सेना की व्हाइट नाइट कोर (White Knight Corps) ने इस साहसिक कार्रवाई को ‘ऑपरेशन किया’ (Operation Kiya) नाम दिया है। यह मुठभेड़ उधमपुर जिले के सुदूर वन क्षेत्रों में मंगलवार शाम करीब 4 बजे शुरू हुई थी। खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला था कि जैश-ए-मोहम्मद के कुछ पाकिस्तानी आतंकी इस इलाके की प्राकृतिक गुफाओं का इस्तेमाल पनाहगाह के तौर पर कर रहे हैं।
कैसे हुआ गुफा का विध्वंस: जानकारी मिलते ही सीआईएफ (CIF) डेल्टा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) की संयुक्त टीमों ने इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी। खुद को घिरता देख आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी। मंगलवार शाम की शुरुआती गोलीबारी में ही एक आतंकी घायल हो गया था, लेकिन वह अपने साथी की मदद से घने जंगलों के बीच स्थित एक गहरी गुफा में घुस गया।
गुफा की रणनीतिक स्थिति ऐसी थी कि वहां से आतंकी सुरक्षाबलों को आसानी से निशाना बना रहे थे, जबकि उन पर सीधी गोलीबारी करना मुश्किल हो रहा था। रात होने के कारण ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था। मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे आतंकियों ने अंधेरे का फायदा उठाकर भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उन्हें वापस गुफा में खदेड़ दिया।
बुधवार की सुबह होते ही सुरक्षाबलों ने अपनी रणनीति बदली। आतंकियों को बाहर निकालने के बजाय, सेना ने यूबीजीएल (UBGLs – अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) और अन्य विस्फोटकों का इस्तेमाल कर गुफा के एक हिस्से को ही ध्वस्त कर दिया। जब धुआं छटा, तो वहां तबाही का मंजर था।
जैश का टॉप कमांडर ढेर: गुफा के मलबे से दो आतंकियों के शव बरामद किए गए। एक शव गुफा के मुहाने पर था, जबकि दूसरा काफी गहराई में मिला। मारे गए आतंकियों में जैश-ए-मोहम्मद का टॉप कमांडर रुबानी उर्फ अबू माविया शामिल है। अबू माविया पिछले कई सालों से जम्मू संभाग में सक्रिय था और कई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था। उसकी मौत जैश के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।
घटनास्थल से सुरक्षाबलों ने अमेरिकी मूल की M4 कार्बाइन, AK-47 असॉल्ट राइफल, भारी मात्रा में गोला-बारूद, सैटेलाइट फोन और पाकिस्तान निर्मित खाद्य सामग्री बरामद की है। यह बरामदगी साबित करती है कि ये आतंकी किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे।
किश्तवाड़: चतरू में भी सेना की दहाड़
उधमपुर में जहां ‘ऑपरेशन किया’ चल रहा था, वहीं दूसरी ओर किश्तवाड़ जिले के चतरू (Chatroo) इलाके में भी गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज रही थी। यहां सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच बुधवार शाम को आमना-सामना हुआ। इस मुठभेड़ में भी सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को ढेर कर दिया है।
यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ (Operation Trashi-1) का हिस्सा है, जो पिछले 18 जनवरी से किश्तवाड़ के जंगलों में चल रहा है। चतरू बेल्ट के मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव के घने जंगलों में आतंकी छिपे हुए थे। यह वही इलाका है जहां पिछले 15 दिनों में चार बार आतंकियों से सामना हो चुका है।
इस ऑपरेशन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 18 जनवरी को इसी ऑपरेशन की शुरुआत में आतंकियों के ग्रेनेड हमले में सेना के 8 जवान घायल हुए थे, जिनमें से जांबाज हवलदार गजेंद्र सिंह ने इलाज के दौरान शहादत दी थी। सेना ने अपने साथी की शहादत का बदला लेते हुए आतंकियों को घेरकर मारा है। हालांकि, अभी भी इस इलाके में 2-3 अन्य आतंकियों के छिपे होने की आशंका है, जिसके चलते सर्च ऑपरेशन जारी है।
आतंकियों की नई चाल: गुफाएं बनीं पनाहगाह
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, कश्मीर घाटी में सुरक्षाबलों की सख्ती के बाद आतंकियों ने अपनी रणनीति बदली है। अब वे रिहायशी इलाकों की बजाय पीर पंजाल के दक्षिण में स्थित घने जंगलों और प्राकृतिक गुफाओं को अपना ठिकाना बना रहे हैं। उधमपुर और किश्तवाड़ की भौगोलिक स्थिति उन्हें छिपने में मदद करती है।
गुफाओं में छिपने की रणनीति आतंकियों को दो फायदे देती है:
- सुरक्षा: वे हवाई हमलों और ड्रोन सर्विलांस से बच जाते हैं।
- एंबुश: वे ऊंचाई पर बैठकर सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला कर सकते हैं।
लेकिन भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन किया’ में जिस तरह गुफा को उड़ाकर जवाब दिया है, उससे आतंकियों के हौसले पस्त हो गए हैं। सेना अब ड्रोन और क्वाडकॉप्टर का इस्तेमाल कर इन गुफाओं की मैपिंग कर रही है।
पिछले एक महीने में सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबियां
जम्मू संभाग में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की पाकिस्तान की कोशिशों को भारतीय सेना लगातार नाकाम कर रही है। पिछले कुछ हफ्तों का रिकॉर्ड देखें तो सुरक्षाबलों ने कई बड़े ऑपरेशन अंजाम दिए हैं:
- 31 जनवरी: डोलगाम इलाके में गोलीबारी के बाद घेराबंदी।
- 23 जनवरी (कठुआ): जैश कमांडर उस्मान का खात्मा। उस्मान डोडा-उधमपुर-कठुआ बेल्ट में आतंक का पर्याय बन चुका था। उसके पास से भी एम4 राइफल मिली थी।
- 18 जनवरी (किश्तवाड़): ऑपरेशन त्राशी-1 की शुरुआत।
- 16 दिसंबर 2025 (उधमपुर): मजालता क्षेत्र में मुठभेड़, जिसमें एसओजी के जवान घायल हुए थे।

M4 कार्बाइन: पाकिस्तान की साजिश का सबूत
लगातार एनकाउंटर्स में आतंकियों के पास से M4 कार्बाइन का मिलना एक गंभीर संकेत है। यह अमेरिकी हथियार आमतौर पर पाकिस्तानी सेना की स्पेशल फोर्सेज या अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए जखीरे से आतंकियों तक पहुंच रहे हैं। AK-47 की तुलना में M4 ज्यादा सटीक और घातक होती है, जिसमें नाइट विजन और टेलीस्कोपिक लेंस लगाने की सुविधा होती है। इसका मिलना यह साफ करता है कि सीमा पार से आतंकियों को हाई-टेक हथियारों से लैस करके भेजा जा रहा है।
व्हाइट नाइट कोर ने अपने बयान में कहा, “सुरक्षाबल जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आतंकियों के किसी भी मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। उधमपुर और किश्तवाड़ में मिली सफलता हमारे जवानों के अदम्य साहस और सटीक खुफिया तंत्र का परिणाम है।”
फिलहाल, दोनों इलाकों में सर्च ऑपरेशन जारी है। सेना यह सुनिश्चित कर रही है कि गुफाओं या जंगलों में कोई और आतंकी या विस्फोटक न बचा हो।
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