आगरा: कुष्ठ रोगियों के बीच वाधवा परिवार ने बिखेरी अपनत्व की खुशबू, सेवा ही बना संकल्प

Agra Desk, tajnews.in | Saturday, May 2, 2026, 08:35:10 PM IST

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Agra Desk | Humanity & Social Welfare

आगरा: ताजनगरी में शनिवार को मानवता की एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने समाज के लिए एक नई प्रेरणा पेश की है। अक्सर समाज द्वारा उपेक्षित और एकांतवास में रहने वाले कुष्ठ रोगियों के बीच जब कोई अपनापन लेकर पहुँचता है, तो उनके मुरझाए चेहरों पर जो मुस्कान आती है, वह किसी भी इबादत से बड़ी है। ताजनगरी की पाश्र्वनाथ पंचवटी कॉलोनी में निवास करने वाले वाधवा परिवार ने आज ताजगंज स्थित कुष्ठ सेवा सदन में पहुँचकर एक भावपूर्ण सेवा कार्यक्रम आयोजित किया। सेवा के इस महायज्ञ में परिवार के न केवल बड़े-बुजुर्गों ने बल्कि बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और यह संदेश दिया कि सेवा भाव ही मनुष्य का असली आभूषण है। भोजन प्रसाद वितरण से लेकर उपयोगी सामग्री तक, वाधवा परिवार के प्रत्येक सदस्य ने आश्रमवासियों के साथ समय बिताकर उन्हें यह अहसास कराया कि वे इस समाज का एक अभिन्न हिस्सा हैं और वे अकेले नहीं हैं।

आगरा के ताजगंज स्थित कुष्ठ सेवा सदन में वाधवा परिवार द्वारा सेवा कार्य का दृश्य
HIGHLIGHTS
  1. मानवता की मिसाल: पाश्र्वनाथ पंचवटी के वाधवा परिवार ने ताजगंज कुष्ठ सेवा सदन में किया भव्य सेवा कार्यक्रम।
  2. भोजन और सामग्री वितरण: आश्रमवासियों को पौष्टिक भोजन प्रसाद और दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री प्रदान की गई।
  3. अध्यात्म और प्रार्थना: ज्ञानी जोगिंदर सिंह ने अरदास के जरिए देश में सुख-शांति और बेरोजगारी से मुक्ति की कामना की।
  4. भ्रांतियों को दूर करने की पहल: समाजसेवियों ने कुष्ठ रोग से जुड़ी सामाजिक वर्जनाओं को प्रेम और सहयोग से तोड़ने का आह्वान किया।

नेक बनो, एक बनो: डॉ. मधु भारद्वाज का मानवतावादी संदेश

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ साहित्यकार एवं लैप्रोसी पेशेन्ट्स वेलफेयर सोसाइटी की सचिव मधु भारद्वाज ने सेवाकार्यों का सफल संचालन किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि “नेक बनो, एक बनो” ही मानवता की असली और सच्ची पहचान है। मधु भारद्वाज ने इस बात पर जोर दिया कि समाज को जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अक्सर कुष्ठ रोग के मरीजों को समाज में तिरस्कार का सामना करना पड़ता है, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। सेवा का अर्थ केवल दान देना नहीं है, बल्कि पीड़ित व्यक्ति के दर्द को समझना और उसे सम्मान देना है।

कुष्ठ रोगियों को भोजन परोसते समाजसेवी और वाधवा परिवार के सदस्य

आश्रमवासियों के बीच पहुँचकर मधु भारद्वाज ने उनकी कुशलक्षेम जानी और सोसाइटी के माध्यम से भविष्य में भी निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने वाधवा परिवार की इस पहल की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और कहा कि यदि हर संपन्न परिवार इसी तरह महीने में एक दिन भी सेवा के लिए निकाले, तो समाज में कोई भी व्यक्ति अपने आप को असहाय महसूस नहीं करेगा।

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प्रेम और सहयोग से बड़ा कोई उपचार नहीं: श्याम भोजवानी

इस पुनीत अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी श्याम भोजवानी ने अपने विचार साझा करते हुए समाज की मानसिकता पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोगियों के बीच जाकर उन्हें अपनापन दिखाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि आज भी समाज के कई हिस्सों में इस रोग को लेकर पुरानी भ्रांतियां और डर व्याप्त है, जिसके कारण इन मरीजों का सामाजिक बहिष्कार किया जाता है। श्याम भोजवानी ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा विज्ञान काफी आगे बढ़ चुका है और कुष्ठ रोग पूरी तरह उपचार योग्य है, लेकिन मानसिक और सामाजिक घावों को भरने के लिए केवल प्यार और सहयोग ही कारगर है।

आश्रमवासियों के साथ समय बिताते और सामग्री वितरित करते गणमान्य नागरिक

उन्होंने शहरवासियों से आह्वान किया कि वे अपने जन्मदिन, पुण्यतिथि या खुशी के अन्य अवसरों पर ऐसे संस्थानों में आएं। इससे न केवल जरूरतमंदों की सहायता होती है, बल्कि दान देने वाले के मन को भी असीम शांति प्राप्त होती है। भोजवानी ने कहा कि प्रेम से बड़ा दुनिया में कोई उपचार नहीं है और इसी प्रेम की शक्ति से हम किसी भी बीमारी या तिरस्कार को मात दे सकते हैं।

शांति और समृद्धि की अरदास: हटे बेरोजगारी और महंगाई का साया

कार्यक्रम का शुभारंभ आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। ज्ञानी जोगिंदर सिंह द्वारा श्रद्धापूर्वक अरदास एवं प्रार्थना की गई। इस दौरान सभी उपस्थित लोगों ने माँ दुर्गा के समक्ष नतमस्तक होकर देश में सुख, शांति और खुशहाली की मंगलकामना की। विशेष रूप से आज के दौर की सबसे बड़ी समस्याओं यानी महंगाई और बेरोजगारी से मुक्ति के लिए भी ईश्वर से गुहार लगाई गई। प्रार्थना के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया, जब आश्रमवासियों ने भी हाथ जोड़कर सामूहिक शांति की कामना में हिस्सा लिया।

पूरे अभियान के दौरान ज्ञानेंद्र अग्रवाल, हरीश मोटवानी, चांदनी भोजवानी, हर्षिल और वाधवा परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे भविष्य में भी जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। ताजगंज के इस कुष्ठ सेवा सदन का कोना-कोना आज सेवा, करुणा और मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत नजर आया। वाधवा परिवार की इस छोटी सी कोशिश ने यह सिद्ध कर दिया कि अगर दिल में करुणा हो, तो दुनिया की किसी भी दूरी और भ्रांति को प्रेम के जरिए मिटाया जा सकता है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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