Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Monday, 15 June 2026, 05:10:14 PM IST

आगरा: ताजनगरी के नागरी प्रचारिणी सभा स्थित लाइब्रेरी हॉल में ‘किस्सा कहानी-7’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सांस्कृतिक संस्था रंगलीला और नई दिल्ली से प्रकाशित कहानी की प्रतिष्ठित पत्रिका कथादेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गोष्ठी के मुख्य आयोजक एसिड हमलों की शिकार महिलाओं का संगठन शीरोज़ था। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पूर्णिया, बिहार के वरिष्ठ हिंदी कथाकार दीर्घ नारायन ने अपनी बहुचर्चित कहानी ‘भारत (न्यू) लोग’ का पाठ किया। कहानी के माध्यम से उन्होंने वर्तमान सामाजिक व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और समाज में बढ़ते धन के प्रभाव पर तीखा प्रहार किया। उनके पाठ के उपरांत उपस्थित साहित्य प्रेमियों और समीक्षकों ने कहानी के विविध पहलुओं पर अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं और जिज्ञासापूर्ण सवाल पूछे।

कथाकार दीर्घ नारायन ने अपनी कहानी का मुख्य अंश पढ़ते हुए समाज को झकझोरने वाले संवाद प्रस्तुत किए। उन्होंने पाठ करते हुए कहा कि जिस समाज के लोग अपनी बहन-बेटियों की सुरक्षा करने में असमर्थ हैं और आँखों के सामने घट रही घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने से कतराते हैं, वे वैश्विक सुरक्षा की बात किस नैतिक बल पर करते हैं। कहानी में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि वर्तमान दौर में धनी वर्ग हर व्यवस्था पर हावी होता जा रहा है। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से संविधान की प्रस्तावना को ‘सम्पूर्ण धनराज और यमराज वाला गणराज्य’ के रूप में पढ़े जाने की कड़वी बात कही। इस वैचारिक पाठ ने सभागार में उपस्थित श्रोताओं को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित वरिष्ठ रंगकर्मी और लेखिका प्रो. ज्योत्स्ना रघुवंशी ने कहानी की समीक्षा करते हुए कहा कि यह रचना कहानी और रिपोर्ताज का एक मिला-जुला सामाजिक यथार्थ प्रस्तुत करती है। यह समाज की उस कड़वी सच्चाई को सामने लाती है जो पाठक को चौंकाती नहीं बल्कि भीतर से जड़ कर देती है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस कहानी को पढ़ने के बाद वे कई दिनों तक मानसिक रूप से परेशान रहीं। मुख्य अतिथि लेखक और चिकित्सक डॉ. मुनीश्वर गुप्ता ने देश के चर्चित निर्भया कांड का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं हमारे अंतर्मन को हिला देती हैं। उन्होंने कानूनी व प्रशासनिक खामियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर क्यों ऐसे जघन्य मामलों के अपराधी विधिक प्रक्रियाओं से बच निकलने में कामयाब हो जाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान नई दिल्ली से पधारे कथादेश के संपादक हरिनरायन की गरिमामय उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथि अरुण डंग ने विश्व समाज में मानवीय संवेदनाओं में आ रही कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए नागरिकों से अधिक संवेदनशील बनने की अपील की। कार्यक्रम का संयोजन कर रहे वरिष्ठ कथाकार शक्ति प्रकाश ने कहानी के शिल्प पर व्यावहारिक विचार रखे। उन्होंने कहा कि कहानी के उद्देश्य बेहतर हैं, परंतु लेखक ने इसमें मुख्य किशोरी पात्र को केवल एक प्रतीक के रूप में पेश किया है, उसे पूरी तरह से जीवंत पात्र का रूप नहीं दिया जा सका। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ रचनाकार रमेश पंडित ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि रक्षा संपदा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के साथ उन्होंने करीब 70 कहानियां लिखी हैं, जो देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।

शुरुआत में विषय प्रवर्तन करते हुए रंगलीला संस्था के निर्देशक अनिल शुक्ल ने आगरा की समृद्ध साहित्यिक विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उन्नीसवीं सदी और बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में आगरा हिंदी कहानी की दृष्टि से एक अत्यंत गहन साहित्यिक ऊर्जा का केंद्र था। इस धरा पर लल्लू लाल, अमृतलाल नागर, रांगेय राघव, राजेंद्र यादव, रावी, घनश्याम अस्थाना और विभांशु दिव्याल जैसे विश्वविख्यात कथाकारों ने जन्म लिया और साहित्य को समृद्ध किया। हालांकि, बीती सदी के उत्तरार्ध में यह प्रवाह धीमा पड़ गया। ‘किस्सा कहानी’ श्रृंखला को इसी उद्देश्य से डिजाइन किया गया है ताकि विभिन्न भारतीय भाषाओं की समकालीन कहानियों के माध्यम से आगरा की इस साहित्यिक धरा को पुनः जाग्रत किया जा सके।

समारोह का कुशल मंच संचालन उर्दू लेखिका और कथाकार प्रो. नसरीन बेगम ने किया। कार्यक्रम के आरंभ में आए हुए अतिथियों का स्वागत अर्जुन सवेदिया, डॉ. महेश धाकड़, राम भरत उपाध्याय, शंकर देव तिवारी और अर्निका माहेश्वरी ने किया। कहानी पाठ के समापन पर खुली चर्चा का सत्र हुआ, जिसमें श्रोताओं और दर्शकों ने कहानी के कथ्य पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। इस वैचारिक चर्चा में रामनाथ, डॉ. पीएस कुशवाह और डॉ. सुरेंद्र सिंह ने मुख्य रूप से अपने विचार रखे। इस अवसर पर प्रो. सुषमा सिंह, प्रो. आभा चतुर्वेदी, शलभ भारती, भावना रघुवंशी, रुनू दत्ता, राम शर्मा, दिलीप रघुवंशी, प्रो. कमलेश नागर, सुनीत कुलश्रेष्ठ आलोक, डॉ. कुमकुम श्रीवास्तव, सुनयन शर्मा, ओम ठाकुर, डॉ. राजीव शर्मा निस्पृह, अमरजीत सिंह, शिव नारायण सिंह, रोमी चौहान, शुभम जाखड़, रंजीत गुप्ता, नरेश तन्हा, कामेश मिश्र सनसनी और अभिषेक माहेश्वरी सहित शहर के अनेक वरिष्ठ लेखक, समीक्षक और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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