डॉ. मंजू यादव ‘मृदुल’ को ‘सुधी शिक्षक सम्मान’; बोलीं—“हिंदी मेरी मां है, मेरी रोजी-रोटी है”
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | मंगलवार, 15 सितंबर 2026, 08:25:40 PM IST

tajnews.in | आगरा। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में साहित्य साधिका समिति, आगरा की ओर से खंदारी स्थित सेठ पदमचंद जैन प्रबंध संस्थान के वातानुकूलित सभागार में साहित्य साधिका सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने हिंदी के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।
मथुरा की कवयित्री रेनू उपाध्याय को साहित्यिक योगदान के लिए ‘साहित्य साधिका सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। वहीं इटावा की डॉ. मंजू यादव ‘मृदुल’ को शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए ‘सुधी शिक्षक सम्मान-2026’ प्रदान किया गया।
समारोह का शुभारंभ समिति की संरक्षिका कमलेश त्रिवेदी, संस्थापिका डॉ. सुषमा सिंह, रमा वर्मा ‘श्याम’, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजेंद्र मिलन, अध्यक्ष डॉ. रेखा कक्कड़ और सचिव डॉ. यशोधरा यादव ‘यशो’ ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।

‘शिक्षक की डांट भी विद्यार्थी के लिए शुभाशीष’
सम्मानित डॉ. मंजू यादव ‘मृदुल’ ने कहा कि शिक्षक की डांट भी विद्यार्थी के लिए शुभाशीष होती है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों को निरंतर मार्गदर्शन देकर सफलता की राह दिखाता है और विद्यार्थी की उपलब्धि से गुरु स्वयं गौरवान्वित होता है।
हिंदी के प्रति अपने भाव व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “हिंदी मेरी मां है, मेरी रोजी-रोटी है।” उनके इस कथन पर सभागार में मौजूद साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने भावपूर्ण प्रतिक्रिया दी।

हिंदी भाषा के महत्व पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में डॉ. नीलम भटनागर ने हिंदी भाषा के महत्व पर विचार रखे। उत्तर प्रदेश लेखिका मंच की अध्यक्ष राजश्री यादव ने शिक्षा की भूमिका और समाज निर्माण में उसके महत्व पर चर्चा की। सुशील सरित ने ‘वंदे मातरम्’ और उसके हिंदी रूपांतरण का गायन प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि विजय श्रीवास्तव ने नारी शक्ति, परिवार और समाज में महिलाओं की भूमिका पर विचार रखते हुए कहा कि नारी को किसी विशेष दिवस तक सीमित करने के बजाय हमेशा सम्मान दिया जाना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि दुर्ग विजय सिंह दीप ने हिंदी और भारतीय भाषाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने आठवीं अनुसूची में भाषाओं को शामिल किए जाने से जुड़ी राजनीति पर भी अपनी राय व्यक्त की।

साहित्यिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह में आचार्य उमाशंकर पाराशर, साधना वैद, अंशू, मंजू यादव ‘ग्रामीण’, डॉ. ममता भारती, चारु मित्रा, मीरा परिहार, राजश्री यादव और डॉ. नीलम भटनागर सहित साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुतियां दीं।

काव्य और साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से हिंदी के संरक्षण, संवर्धन और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण नहीं है, बल्कि वह समाज को दिशा देने का प्रभावी माध्यम भी है। हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए साहित्यकारों के साथ नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

साहित्य साधिका समिति की गतिविधियों का सिलसिला
साहित्य साधिका समिति आगरा में साहित्यिक आयोजनों और सम्मान समारोहों के माध्यम से सक्रिय रही है। अप्रैल 2026 में समिति ने डॉ. रमा ‘रश्मि’ की साहित्यिक कृतियों के लोकार्पण से जुड़े आयोजन में भी भागीदारी की थी। जून 2026 में समिति ने वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. इंद्रपाल सिंह ‘इंद्र’ की जयंती पर साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया था।
यह भी पढ़ें

Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
7579990777




