आर्टिकल डेस्क, 🌐 tajnews.in | सोमवार, 14 सितंबर 2026, 07:15:00 PM IST

जब गंगा की रोशनी टेम्स तक पहुंची
बृज खंडेलवाल | 14 सितंबर 2026
प्रमुख अंश (Highlights):
- टेम्स पर पहली ऐतिहासिक गंगा आरती: लंदन के ऐतिहासिक ग्रीनविच स्थित ओल्ड रॉयल नेवल कॉलेज की सीढ़ियों पर चिन्मय मिशन यूके और टोटली टेम्स फेस्टिवल के तत्वावधान में गूंजे वैदिक मंत्र।
- बिना प्रदूषण के पर्यावरण-सम्मत आस्था: टेम्स में फूल, मूर्तियां या पूजन सामग्री प्रवाहित न करने का सख्त नियम; नदी के प्रति श्रद्धा का अर्थ उसे प्रदूषित करना नहीं, बल्कि संरक्षित रखना।
- दो सभ्यताओं का अनोखा संगम: भारत में जीवनदायिनी गंगा और ब्रिटेन की औद्योगिक जीवनरेखा टेम्स के बीच जल की साझा भाषा और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा का वैश्विक आह्वान।
- रिवर कनेक्ट कैंपेन का सवाल: आगरा से उठी आवाज—नदी को पूजना आसान है पर बचाना कठिन; क्या लंदन की टेम्स जैसा सम्मान भारत में गंगा और यमुना को भी मिल पाएगा?

बृज खंडेलवाल
लंदन में पहली गंगा आरती ने जोड़ा भारत की नदी परंपरा को ब्रिटेन की जीवनरेखा से
Brij Khandelwal
London, September 14, 2026
क्या गंगा की आरती टेम्स के किनारे हो सकती है? रविवार की शाम लंदन ने इस सवाल का जवाब सिर्फ दिया नहीं, बल्कि उसे हजारों दीपों की रोशनी में लिख दिया।
लंदन के ऐतिहासिक Greenwich में Old Royal Naval College की सीढ़ियों पर रविवार शाम पहली बार गंगा आरती हुई। भारत में वाराणसी और हरिद्वार जैसे शहरों से जुड़ी यह परंपरा ब्रिटेन की राजधानी की ऐतिहासिक नदी के किनारे पहुंची तो दृश्य अपने आप में असाधारण था।
आरती का आयोजन Chinmaya Mission UK ने Totally Thames Festival 2026 के सहयोग से किया। चार बजे से शुरू हुआ कार्यक्रम संगीत, भारतीय नृत्य, भोजन और सामुदायिक गतिविधियों से गुजरता हुआ शाम 7.15 बजे मुख्य आरती तक पहुंचा। कार्यक्रम को पहले ही sold out घोषित कर दिया गया था और आयोजकों ने सुरक्षा कारणों से प्रवेश केवल वैध टिकटधारकों तक सीमित रखा।
टेम्स के किनारे दीप जल रहे थे और मंत्र गूंज रहे थे। सामने बह रही थी वह नदी जिसने लंदन के इतिहास, व्यापार और औद्योगिक विकास को सदियों तक अपने साथ बहाया है। पीछे था Old Royal Naval College, जो Greenwich के UNESCO World Heritage क्षेत्र का हिस्सा है।
यह सिर्फ भारतीय प्रवासियों के लिए कोई धार्मिक कार्यक्रम नहीं था। आयोजकों ने इसे भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, सामुदायिक एकता और प्रकृति के प्रति सम्मान का अवसर बताया। Totally Thames ने भी इसे नदी के प्रति कृतज्ञता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जुड़ा आयोजन बताया।
दो नदियां, दो सभ्यताएं और पर्यावरण का साझा संकल्प
भारत में गंगा केवल एक नदी नहीं है। वह सभ्यता, आस्था और जीवन की धारा है। ब्रिटेन में टेम्स भी केवल पानी की एक धारा नहीं है। लंदन का इतिहास, अर्थव्यवस्था और पहचान उससे गहराई से जुड़ी है।
दो नदियां, दो सभ्यताएं और दो देशों की अलग-अलग कहानियां, लेकिन पानी की भाषा एक ही है।
इसलिए गंगा आरती को टेम्स तक ले जाना सांस्कृतिक आदान-प्रदान से आगे की बात है। यह दुनिया को याद दिलाने का मौका है कि नदियां केवल पूजा या पर्यटन की वस्तु नहीं हैं। वे जीवित प्रणालियां हैं और उनका स्वास्थ्य समाज के भविष्य से जुड़ा है।
इस आयोजन की एक और खास बात थी। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि टेम्स में फूल, मूर्तियां या दूसरी पूजा सामग्री नहीं डाली जाएगी। यानी नदी के प्रति श्रद्धा का अर्थ उसे प्रदूषित करना नहीं, बल्कि उसकी रक्षा करना है।
श्रद्धा और व्यवहार के अंतर्विरोध का आईना
हम गंगा, यमुना और दूसरी नदियों को मां कहते हैं। आरती करते हैं। दीप जलाते हैं। लेकिन उसी नदी में सीवेज, प्लास्टिक और कचरा भी डाल देते हैं। श्रद्धा और व्यवहार के बीच यही विरोधाभास हमारी सबसे बड़ी नदी समस्या है।
टेम्स की कहानी भी हमेशा इतनी सुंदर नहीं रही। कभी यह नदी औद्योगिक प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित हुई थी। बाद में लंबे प्रयासों से इसकी स्थिति में सुधार आया। आज टेम्स लंदन की पहचान का हिस्सा है और उसके संरक्षण को लेकर व्यापक सार्वजनिक चेतना दिखाई देती है।
आगरा से लंदन तक: नदी बचेगी तो सभ्यता बचेगी
आगरा से चल रहे River Connect Campaign के लिए रविवार की गंगा आरती इसलिए खास है क्योंकि अभियान लंबे समय से यह कहता रहा है कि नदियां सीमाओं में नहीं बंधतीं। यमुना से गंगा और गंगा से टेम्स तक संदेश एक ही होना चाहिए; नदी बचेगी तो सभ्यता बचेगी।
River Connect Campaign से जुड़ीं पद्मिनी अय्यर ने लंदन में हुए आयोजन का स्वागत करते हुए कहा कि गंगा की आरती का टेम्स तक पहुंचना भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रभाव का सुंदर उदाहरण है। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अवसर दुनिया की नदियों के लिए साझा जिम्मेदारी का संदेश दे सकता है।
“नदी को पूजना आसान है, नदी को बचाना कठिन,” उन्होंने कहा। “सच्ची आरती वही है जिसमें नदी को स्वच्छ, अविरल और जीवित रखने का संकल्प हो।”
रविवार की शाम टेम्स पर यही संदेश शायद सबसे अधिक महत्वपूर्ण था।
गंगा भारत की स्मृति में बहती है। टेम्स ब्रिटेन की स्मृति में। दोनों नदियों ने शहरों को जन्म दिया, व्यापार को बढ़ाया और पीढ़ियों को जोड़ा। अब समय है कि मनुष्य भी नदियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे।
लंदन की शाम ढल रही थी। टेम्स का पानी बह रहा था। दीपों की रोशनी उसके ऊपर चमक रही थी।
हजारों मील दूर भारत के घाटों से चली एक परंपरा उस शाम लंदन पहुंच चुकी थी।
गंगा की आरती टेम्स के किनारे हुई। लेकिन असली सवाल अब यह है; क्या गंगा और यमुना को भी वैसा ही सम्मान मिलेगा, जैसा लंदन ने रविवार को टेम्स को दिया?
स्थानीय Greenwich listings और Thames Festival Trust ने आयोजन को आधिकारिक रूप से दर्ज किया था; Asian Voice ने कार्यक्रम से पहले इसे “landmark riverside event” बताया था।
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Thakur Pawan Singh
7579990777




